शिवहर में बाल सुरक्षा को लेकर पुलिस की नई पहल, हर थाने में हेल्प डेस्क
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👉 WhatsApp से जुड़ेंशिवहर में बाल सुरक्षा को लेकर पुलिस ने बड़ी पहल शुरू की है। बाल सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से जिले के सभी थाना परिसरों में चाइल्ड हेल्प डेस्क का शुभारंभ किया गया है।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों के लिए पुलिस व्यवस्था को अधिक बाल-हितैषी बनाना और जरूरत के समय उन्हें सुरक्षित तथा संवेदनशील सहयोग उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही बाल दुर्व्यापार की रोकथाम को लेकर जिले में विशेष जागरूकता अभियान भी शुरू किया गया है।
यह पहल बिहार पुलिस मुख्यालय के निर्देश और शिवहर पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में शुरू की गई है।
सभी थानों में शुरू हुआ चाइल्ड हेल्प डेस्क
शिवहर जिले के सभी थाना परिसरों में चाइल्ड हेल्प डेस्क की शुरुआत की गई है। इसके जरिए बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस की सहायता को अधिक संवेदनशील और बाल-केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया है।
इसी क्रम में पुलिस उपाधीक्षक यातायात-सह-विशेष अपराध भाई भरत कुमार ने महिला थाना, शिवहर परिसर में चाइल्ड हेल्प डेस्क का उद्घाटन किया।
पुलिस के अनुसार, हेल्प डेस्क का उद्देश्य जरूरत के समय बच्चों और उनके परिवारों को उचित सहायता तक पहुंच उपलब्ध कराना है।
चाइल्ड हेल्प डेस्क के माध्यम से बच्चों से संबंधित सुरक्षा मामलों को गंभीरता से लेने और उन्हें आवश्यक पुलिस सहयोग उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
बाल दुर्व्यापार के खिलाफ जागरूकता अभियान शुरू
चाइल्ड हेल्प डेस्क के शुभारंभ के साथ ही बाल दुर्व्यापार की रोकथाम को लेकर विशेष जन-जागरूकता अभियान भी शुरू किया गया।
यह अभियान शिवहर पुलिस की मानव तस्करी निरोध इकाई यानी एएचटीयू और अदिथी कवच परियोजना के संयुक्त तत्वावधान में संचालित किया जा रहा है।
अभियान के तहत जिले के विभिन्न चिन्हित हॉटस्पॉट और पंचायत स्तर पर जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। टीम लोगों को बच्चों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी देगी।
इस दौरान आम लोगों को संदिग्ध परिस्थितियों में बच्चों को लेकर तत्काल सूचना देने और किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं करने के प्रति जागरूक किया जाएगा।
जागरूकता पोस्टर का किया गया विमोचन
महिला थाना परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बाल दुर्व्यापार की रोकथाम और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े जागरूकता पोस्टर का विमोचन किया गया।
पोस्टरों में हेल्पलाइन नंबर और बाल सुरक्षा से संबंधित जरूरी संदेश शामिल किए गए हैं। इन पोस्टरों के माध्यम से आम लोगों तक बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी पहुंचाने की योजना है।
पुलिस और सहयोगी संस्था की टीम इन संदेशों को अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाने के लिए जागरूकता गतिविधियां चलाएगी।
इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ पुलिस व्यवस्था तक सीमित रहने के बजाय समुदाय को भी बाल सुरक्षा से जोड़ना है।
पुलिस ने समुदाय की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुलिस उपाधीक्षक भाई भरत कुमार ने बच्चों की सुरक्षा में सामूहिक भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने पुलिस, प्रशासन, समुदाय, विद्यालय और अन्य संबंधित पक्षों की भूमिका पर जोर दिया। बाल सुरक्षा के लिए विभिन्न स्तरों पर समन्वय और समय पर सूचना को महत्वपूर्ण माना गया।
बच्चों से जुड़े मामलों में परिवार, स्कूल और स्थानीय समुदाय की सतर्कता भी अहम होती है। किसी बच्चे के साथ संदिग्ध स्थिति दिखाई देने पर समय रहते संबंधित विभाग या पुलिस को सूचना देने से कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
हॉटस्पॉट और पंचायत स्तर पर चलेगा अभियान
शिवहर पुलिस की मानव तस्करी निरोध इकाई और अदिथी कवच परियोजना की संयुक्त टीम जिले के अलग-अलग चिन्हित क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम करेगी।
अभियान को पंचायत स्तर तक ले जाने की योजना है, ताकि बाल सुरक्षा से जुड़े संदेश केवल जिला मुख्यालय या थाना परिसरों तक सीमित न रहें।
स्थानीय लोगों को बाल दुर्व्यापार के संभावित जोखिमों और संदिग्ध परिस्थितियों में सूचना देने के तरीकों के बारे में जागरूक किया जाएगा।
पुलिस की यह पहल बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में जागरूकता और त्वरित सूचना व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है।
कार्यक्रम में पुलिस और छात्र-छात्राएं रहे मौजूद
कार्यक्रम में अदिथी कवच परियोजना के कार्यक्रम प्रबंधक रोहित सिंह, कन्वर्जेंस विशेषज्ञ मुकुंद चौधरी, मनीष कुमार और महिला थाना की बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी सौरभलता मौजूद रहीं।
इसके अलावा छात्र-छात्राओं, पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों के साथ अदिथी कवच परियोजना की टीम ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
शिवहर में शुरू की गई इस पहल के तहत अब चाइल्ड हेल्प डेस्क के साथ जागरूकता गतिविधियों को भी जिले के अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाने पर जोर रहेगा।
बाल दुर्व्यापार की रोकथाम में पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ परिवार और समुदाय की सतर्कता भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में पंचायत स्तर तक चलने वाला जागरूकता अभियान बच्चों की सुरक्षा से जुड़े संदेशों को अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद कर सकता है।
