चंद्रशेखर आजाद पर कोर्ट का बड़ा एक्शन, 8 साल पुराने केस में NBW
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👉 WhatsApp से जुड़ेंउत्तर प्रदेश के नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ गाजियाबाद की विशेष MP-MLA कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट यानी NBW जारी किया है। चंद्रशेखर आजाद से जुड़ा यह मामला करीब आठ साल पुराना है और 2018 में साहिबाबाद में एक शादी समारोह के दौरान कथित मारपीट से जुड़ा है। ताजा कार्रवाई सुनवाई के दौरान उनकी गैरहाजिरी के बाद हुई है।
अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी करने के साथ उनकी संपत्ति की कुर्की से जुड़ी कार्रवाई के भी आदेश दिए हैं। हालांकि, मामले में लगाए गए मारपीट और धमकी के आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इन्हें अंतिम अदालत के फैसले से सिद्ध नहीं माना जा सकता।
2018 की शादी में क्या हुआ था?
यह मामला वर्ष 2018 में साहिबाबाद थाना क्षेत्र के वृंदावन गार्डन में आयोजित एक शादी समारोह से जुड़ा है। शिकायतकर्ता धर्मेंद्र कुमार के मुताबिक, वह शादी में शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान चंद्रशेखर आजाद भी अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे थे।
शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि आजाद के साथ आए लोगों के पास हथियार थे। धर्मेंद्र कुमार ने कथित तौर पर इसको लेकर सवाल किया। इसके बाद विवाद बढ़ गया और उन पर मारपीट तथा गाली-गलौज करने का आरोप लगाया गया। शिकायत में जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया था।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिकायतकर्ता की ओर से चंद्रशेखर आजाद के अलावा कुछ अन्य लोगों के नाम भी मामले में सामने आए थे। पुलिस की ओर से दर्ज मुकदमे में IPC की धारा 323 और 305 का उल्लेख रिपोर्टों में किया गया है। इस मामले की सुनवाई गाजियाबाद की विशेष MP-MLA अदालत में चल रही है।
कोर्ट में पेशी को लेकर क्यों हुई सख्ती?
ताजा कार्रवाई का मुख्य कारण अदालत की कार्यवाही के दौरान सांसद की गैरहाजिरी बताया गया है। शिकायतकर्ता के वकील भजनलाल गौतम ने अदालत में आवेदन देकर चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, शिकायतकर्ता पक्ष ने कहा कि इस मामले में पहले भी वारंट जारी हो चुका था और इसके बावजूद सांसद लगातार सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए। ताजा सुनवाई के दौरान भी उनकी गैरहाजिरी के बाद अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया।
दिलचस्प बात यह है कि रिपोर्टों के अनुसार चंद्रशेखर आजाद मई 2025 में इसी मामले में अदालत के सामने पेश हुए थे और उस समय जारी वारंट को वापस लेने का अनुरोध किया था। इसके बाद मामला आगे की सुनवाई के लिए चलता रहा।
धारा 82 और 83 में क्या होता है?
शिकायतकर्ता के वकील ने अदालत से आपराधिक प्रक्रिया संहिता यानी CrPC की धारा 82 और 83 के तहत कार्रवाई की मांग भी की थी।
धारा 82 के तहत अदालत किसी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ उद्घोषणा जारी कर सकती है, जिसके बारे में अदालत को यह विश्वास हो कि वह वारंट की गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार है या खुद को छिपा रहा है।
वहीं धारा 83 कुछ निर्धारित परिस्थितियों में ऐसे व्यक्ति की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई से संबंधित है। ताजा मामले में अदालत ने चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ NBW जारी करने के साथ संपत्ति कुर्की से जुड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
यहां यह समझना जरूरी है कि संपत्ति कुर्की की कार्रवाई और आपराधिक आरोपों का अंतिम रूप से साबित होना दो अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। मामले में आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की आगे की कार्यवाही के बाद होगा।
क्या चंद्रशेखर आजाद पर आरोप साबित हो चुके हैं?
नहीं। गाजियाबाद की अदालत में यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है। अदालत की ओर से जारी गैर-जमानती वारंट का मतलब यह नहीं है कि 2018 में लगाए गए मारपीट के आरोप अंतिम रूप से साबित हो गए हैं।
अदालत ने मौजूदा कार्रवाई उनकी कथित गैरहाजिरी और लंबित न्यायिक कार्यवाही के संदर्भ में की है। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय करेगा।
अब आगे क्या होगा?
गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद मामले में अगली कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। साथ ही संपत्ति कुर्की से संबंधित आदेश पर भी आगे की कार्रवाई प्रक्रिया के अनुसार होगी।
चंद्रशेखर आजाद फिलहाल नगीना लोकसभा सीट से सांसद हैं और आजाद समाज पार्टी का नेतृत्व करते हैं। 2018 से चल रहा यह मामला अब एक बार फिर अदालत की सख्त कार्रवाई के कारण चर्चा में है।
