बिहार लौटते ही एक्शन में केके पाठक, 15 दिन का सख्त अल्टीमेटम

 


बिहार में एक बार फिर केके पाठक की एंट्री ने प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। सख्त कार्यशैली के लिए चर्चित केके पाठक इस बार कानूनों को सरल बनाने और निवेश माहौल सुधारने की जिम्मेदारी के साथ राज्य में सक्रिय हुए हैं। वर्तमान में भारत सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत केके पाठक ने बिहार सरकार के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर लंबित सुधारों को 15 दिनों के भीतर पूरा करने का सख्त निर्देश दिया है। उन्होंने साफ कहा कि नियमों को सरल बनाने में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पुराने कानून खत्म करने पर जोर

पटना में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में केके पाठक ने ‘डीरेगुलेशन चरण-एक’ और ‘चरण-दो’ की समीक्षा की। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को हटाना तथा व्यापार और निवेश को आसान बनाना है।

उन्होंने कहा कि कई पुराने नियम निवेश और कारोबार के रास्ते में बाधा बनते हैं। ऐसे नियमों की पहचान कर उन्हें समाप्त करने की प्रक्रिया तेज की जाए। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि लंबित मामलों को जल्द पोर्टल पर अपलोड किया जाए।

“छोटी गलती पर जेल नहीं, जुर्माना हो”

बैठक के दौरान केके पाठक ने व्यावसायिक कानूनों में बदलाव पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि छोटी तकनीकी चूकों के लिए जेल की सजा जैसे कठोर प्रावधानों को हटाकर उन्हें जुर्माने में बदला जाना चाहिए।

उनका मानना है कि छोटे स्तर की प्रशासनिक या तकनीकी गलतियों के लिए सख्त दंड व्यवस्था निवेश और व्यापार को प्रभावित करती है। इसलिए नियमों को व्यावहारिक और आधुनिक बनाया जाना जरूरी है।

यह बयान व्यापारिक और औद्योगिक क्षेत्र के लिए अहम माना जा रहा है।

15 दिन में काम पूरा करने का आदेश

केके पाठक ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिया कि डीरेगुलेशन चरण-दो से जुड़े लंबित काम अगले 15 दिनों में पूरे किए जाएं।

उन्होंने कहा कि हर विभाग अपने स्तर पर अनुपालन बोझ यानी ‘कम्प्लायंस बर्डन’ कम करने पर काम करे। यदि किसी सुधार में एक से अधिक विभाग जुड़े हों, तो कैबिनेट सचिवालय समन्वय की भूमिका निभाए।

साथ ही सभी नोडल अधिकारियों को हर शुक्रवार प्रगति रिपोर्ट भेजने का निर्देश भी दिया गया।

निवेश और कारोबार को आसान बनाने की तैयारी

बैठक में बिहार में निवेश बढ़ाने और व्यापार सुगमता सुधारने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ और ‘स्व-प्रमाणीकरण’ व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया।

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि मानवीय हस्तक्षेप कम होने से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी। इससे उद्योगों और निवेशकों को सुविधा मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सुधारों को प्रभावी तरीके से लागू किया गया तो बिहार में निवेश का माहौल बेहतर हो सकता है।

भवन नियमों और शहरी विकास पर भी फोकस

बैठक में राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) 2026 के नए मानकों को बिहार के भवन उपविधियों में शामिल करने पर भी चर्चा हुई।

इसके अलावा ‘फ्लोर एरिया रेशियो’ (FAR) नियमों को तर्कसंगत बनाने और सरकारी संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के लिए ‘टोटल फैसिलिटी मैनेजमेंट’ (TFM) मॉडल अपनाने के निर्देश दिए गए।

सरकार का उद्देश्य शहरी विकास को आधुनिक और व्यवस्थित बनाना बताया जा रहा है।

क्यों खास माने जाते हैं केके पाठक?

केके पाठक बिहार में अपनी सख्त प्रशासनिक शैली के लिए पहले से चर्चित रहे हैं। शिक्षा और मद्य निषेध विभाग में उनके फैसलों को लेकर पहले भी काफी चर्चा हुई थी।

अब नई भूमिका में वे नियमों को आसान बनाने, निवेश बढ़ाने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज करने पर फोकस कर रहे हैं। उनकी वापसी को लेकर नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों में भी काफी चर्चा है।

बिहार को राष्ट्रीय मानकों तक लाने की कोशिश

केके पाठक ने बैठक में कहा कि बिहार ने सुधारों की दिशा में अब तक अच्छी प्रगति की है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार राज्य को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाने में हरसंभव सहयोग करेगी।

बैठक में वित्त, उद्योग, नगर विकास, भवन निर्माण और कई अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी विभागों को ‘मिशन मोड’ में काम करने का निर्देश दिया गया।

आगे क्या असर दिख सकता है?

यदि सरकार तय समयसीमा में सुधार लागू कर पाती है, तो इसका असर उद्योग, निवेश और कारोबार के माहौल पर दिखाई दे सकता है। साथ ही आम लोगों और व्यवसायियों को भी नियमों से जुड़ी प्रक्रियाओं में राहत मिलने की उम्मीद है।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि 15 दिनों की समयसीमा में विभाग कितनी तेजी से काम पूरा करते हैं और बिहार में डीरेगुलेशन प्रक्रिया कितनी प्रभावी साबित होती है।

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