बक्सर स्कूल सफाई एजेंसी विवाद: एक अक्षर के अंतर पर उठे सवाल
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बक्सर स्कूल सफाई व्यवस्था से जुड़े भुगतान का मामला अब प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय तक पहुंच गया है। बक्सर स्कूल सफाई के नाम पर कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर दर्ज शिकायत में एजेंसी के नाम में अंतर और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
परिवादी हरे कृष्ण यादव ने शिकायत में आरोप लगाया है कि मुख्य एजेंसी के नाम से मिलते-जुलते नाम वाली दूसरी एजेंसी के माध्यम से स्कूलों की सफाई का काम कराया गया और भुगतान किया गया।
मामले में अगली सुनवाई 3 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे निर्धारित की गई है। इससे पहले 12 सितंबर को हुई सुनवाई में आयुक्त ने संबंधित बिंदुओं की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता हरे कृष्ण यादव, ग्राम तवकल राय के डेरा निवासी, ने आवेदन संख्या 430110115042607080 के माध्यम से मामला उठाया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बक्सर जिले के सरकारी विद्यालयों में सफाई कार्य के लिए जिस एजेंसी के साथ प्रक्रिया पूरी की गई, उसके नाम और काम से जुड़े दस्तावेजों में अंतर दिखाई देता है।
परिवादी ने तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी पर भी आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि गलत एजेंसी के चयन से संबंधित प्रक्रिया में निजी हित को लाभ पहुंचाने की कोशिश हुई।
हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है और प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच चल रही है।
एजेंसी के नाम में सिर्फ एक अक्षर का अंतर
मामले का सबसे प्रमुख बिंदु एजेंसी के नाम में बताया गया अंतर है।
परिवादी के अनुसार एक दस्तावेज में FIRST IDEA DIGITAL APPLICATIONS Pvt. LTD नाम दर्ज है, जबकि दूसरे स्थान पर FIRST IDEA DIGITALS APPLICATIONS Pvt. LTD नाम का उल्लेख किया गया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि “DIGITAL” और “DIGITALS” के बीच केवल एक अक्षर का अंतर है, लेकिन इसी नाम के अंतर के आधार पर भुगतान और काम से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
इसी बिंदु पर प्रमंडलीय आयुक्त ने जिलाधिकारी को दोनों एजेंसियों के नामों में अंतर और उससे जुड़े पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया है।
आयुक्त ने अगली सुनवाई में जिला शिक्षा पदाधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित करने को भी कहा है।
एकरारनामा और वर्कऑर्डर की तारीख पर भी सवाल
शिकायत में केवल एजेंसी के नाम का मुद्दा नहीं उठाया गया है। परिवादी ने एकरारनामा और वर्कऑर्डर की तारीखों को लेकर भी सवाल किए हैं।
शिकायत के अनुसार, विभाग ने FIRST IDEA DIGITALS APPLICATIONS Pvt. Ltd. के साथ 8 जनवरी 2024 को एकरारनामा किया था। इस दस्तावेज पर जिला शिक्षा पदाधिकारी के हस्ताक्षर होने की बात शिकायत में कही गई है।
दूसरी ओर, परिवादी का आरोप है कि FIRST IDEA DIGITAL APPLICATIONS Pvt. Ltd. के नाम से वर्कऑर्डर पहले ही 11 नवंबर 2023 को जारी किया गया था।
यानी शिकायतकर्ता ने इस बात पर सवाल उठाया है कि जब एकरारनामा जनवरी 2024 में हुआ, तो उससे पहले नवंबर 2023 में वर्कऑर्डर किस आधार पर जारी किया गया।
इसी आधार पर परिवादी ने भुगतान प्रक्रिया की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
12 सितंबर की सुनवाई में क्या हुआ?
मामले की पिछली सुनवाई 12 सितंबर 2026 को हुई थी। उस दौरान परिवादी स्वयं उपस्थित रहे, जबकि जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी की ओर से भेजा गया प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया गया। रिपोर्ट के अनुसार यह पत्र 10 सितंबर 2026 का था।
इसमें बताया गया कि जिला शिक्षा पदाधिकारी ने मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की है।
इसके बाद प्रमंडलीय आयुक्त ने एजेंसियों के नाम में अंतर और उससे संबंधित पूरी प्रक्रिया की जांच कर प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया।
शिकायतकर्ता ने क्या मांग की?
परिवादी ने मामले की विस्तृत जांच के साथ कथित तौर पर गलत तरीके से किए गए भुगतान की भी जांच कराने की मांग की है।
शिकायत में संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और भुगतान की गई राशि की वसूली की मांग भी रखी गई है।
फिलहाल इन मांगों पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। मामला प्रशासनिक जांच और सुनवाई की प्रक्रिया में है।
मामले में अब तक सामने आए प्रमुख बिंदु
- शिकायत प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में पहुंची है।
- शिकायतकर्ता ने स्कूल सफाई के भुगतान में वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया है।
- एजेंसियों के नाम में “DIGITAL” और “DIGITALS” के अंतर पर सवाल उठाया गया है।
- एकरारनामा और वर्कऑर्डर की तारीखों को लेकर भी शिकायत की गई है।
- जिला शिक्षा पदाधिकारी ने जांच समिति गठित की है।
- आयुक्त ने जिलाधिकारी से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है।
- अगली सुनवाई 3 अक्टूबर 2026, सुबह 11 बजे निर्धारित है।
3 अक्टूबर की सुनवाई पर रहेगी नजर
अब इस मामले में अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी। इसमें जांच समिति की रिपोर्ट और एजेंसियों के नाम से जुड़े दस्तावेजों पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
खास तौर पर यह देखा जाएगा कि संबंधित दस्तावेजों में एजेंसी का सही नाम क्या था, वर्कऑर्डर और एकरारनामे की प्रक्रिया किस क्रम में हुई तथा भुगतान किस संस्था के नाम से किया गया।
जब तक जांच पूरी नहीं होती, शिकायत में लगाए गए आरोपों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता। प्रशासनिक जांच और सुनवाई के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
