रोहिणी आचार्या 10 महीने बाद पटना लौटीं, पिता लालू यादव ने एयरपोर्ट पर किया स्वागत
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रोहिणी आचार्या गुरुवार को करीब 10 महीने से ज्यादा समय बाद सिंगापुर से पटना लौटीं। रोहिणी आचार्या के पटना पहुंचने पर उनके पिता और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव खुद एयरपोर्ट पहुंचे। इस दौरान मां राबड़ी देवी और बड़ी बहन मीसा भारती भी मौजूद रहीं। एयरपोर्ट पर रोहिणी ने पहले अपने पिता के पैर छुए और फिर उन्हें गले लगाया। इसके बाद उन्होंने अपनी मां राबड़ी देवी को भी गले लगाया। पूरा परिवार एक ही गाड़ी से घर के लिए रवाना हुआ। रोहिणी का पटना लौटना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नवंबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद वह राबड़ी आवास से निकलकर सीधे एयरपोर्ट पहुंची थीं और फिर सिंगापुर चली गई थीं।
पिता के बुलावे पर पटना आईं रोहिणी
पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में रोहिणी आचार्या ने कहा कि उनका यह दौरा निजी है। उन्होंने बताया कि वह अपने पिता लालू प्रसाद यादव के बुलावे पर पटना आई हैं। रोहिणी ने साफ किया कि उनकी यात्रा का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह केवल अपने माता-पिता से मिलने आई हैं और इस यात्रा को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। भाई तेजस्वी यादव के साथ पुराने विवाद को लेकर पूछे गए सवालों पर रोहिणी ने कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की। इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी अपने पिता के प्रति भावनाएं जाहिर की थीं। रोहिणी ने पटना आने से दो दिन पहले फेसबुक पोस्ट में लिखा था कि उनके लिए पिता लालू यादव की खुशी और उनका आशीर्वाद सबसे ऊपर है। उन्होंने यह भी कहा था कि पिता के बुलावे से बढ़कर उनके लिए कोई आदेश नहीं है।
चुनाव नतीजों के बाद सामने आया था पारिवारिक विवाद
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद लालू परिवार में कथित विवाद की खबरें सामने आई थीं। इसी दौरान रोहिणी आचार्या अचानक 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी देवी के आवास से निकलकर पटना एयरपोर्ट पहुंची थीं। एयरपोर्ट पर रोहिणी भावुक नजर आई थीं। उन्होंने मीडिया के सामने अपने मायके में कथित बदसलूकी का आरोप लगाया था। रोहिणी ने अपने भाई तेजस्वी यादव और उनके सहयोगियों संजय यादव तथा रमीज पर उनके साथ बदतमीजी करने के आरोप लगाए थे। उन्होंने उस समय तेजस्वी यादव से संबंध खत्म करने और राजनीति से दूरी बनाने की बात भी कही थी। इसके बाद रोहिणी सिंगापुर चली गई थीं और वहां से सोशल मीडिया पर कई पोस्ट किए थे। इन पोस्ट के बाद लालू परिवार के भीतर का यह मामला राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया था। हालांकि, अलग-अलग पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों और उनके जवाबों को अलग-अलग संदर्भ में देखा गया है।
रक्षाबंधन और पारिवारिक समारोह में भी नहीं आई थीं
पटना छोड़ने के बाद रोहिणी आचार्या ने लंबे समय तक मायके से दूरी बनाए रखी। परिवार के कई कार्यक्रमों में लालू परिवार के दूसरे सदस्य नजर आए, लेकिन रोहिणी की मौजूदगी नहीं रही। मई 2026 में तेजस्वी यादव के बेटे इराज के जन्मदिन के मौके पर भी लालू परिवार के कई सदस्य एक साथ जुटे थे। यह कार्यक्रम दिल्ली के पास गाजियाबाद में आयोजित हुआ था, लेकिन रोहिणी इसमें शामिल नहीं हुई थीं। इसके अलावा रक्षाबंधन के दौरान भी परिवार के सदस्य दिल्ली में जुटे थे। उस समय भी रोहिणी अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए नहीं पहुंची थीं। ऐसे में करीब 10 महीने बाद उनका पटना लौटना परिवार के लिहाज से अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, रोहिणी ने खुद इस यात्रा को पारिवारिक और निजी बताया है।
लालू यादव भी सिंगापुर गए थे
इस बीच लालू प्रसाद यादव मई-जून 2026 में नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए सिंगापुर गए थे। इस दौरान वह कुछ समय अपनी बेटी रोहिणी के साथ भी रहे थे। लालू यादव और रोहिणी के बीच लंबे समय से करीबी रिश्ता रहा है। यही वजह है कि रोहिणी के पटना लौटने के बाद पिता-पुत्री की एयरपोर्ट पर हुई मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। एयरपोर्ट पर रोहिणी ने पिता के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और फिर उन्हें गले लगाया। इसके बाद वह पीछे की सीट पर बैठीं और मां राबड़ी देवी को गले लगाया। परिवार इसके बाद एक साथ घर के लिए रवाना हुआ।
पिता को किडनी दान कर चुकी हैं रोहिणी
रोहिणी आचार्या का नाम लालू यादव के किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान भी देशभर में चर्चा में आया था। वर्ष 2022 में सिंगापुर में लालू यादव का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। इस दौरान रोहिणी ने अपने पिता को अपनी किडनी दान की थी। पिता के लिए किए गए इस फैसले की उस समय काफी चर्चा हुई थी। अब करीब 10 महीने बाद रोहिणी के पटना लौटने से लालू परिवार के रिश्तों को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, परिवार के भीतर पुराने विवाद को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है, इस पर रोहिणी ने फिलहाल कोई राजनीतिक या सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। उनके अनुसार, इस बार पटना आने का मकसद केवल अपने माता-पिता से मिलना है। इसलिए इस यात्रा को लेकर किसी राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले रोहिणी के आगे के सार्वजनिक बयानों और परिवार की गतिविधियों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।