अनंत सिंह पर कार्रवाई तेज, ललन सिंह ने कहा- यह संजय झा का मामला
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ें
बिहार की राजनीति में अनंत सिंह पर कार्रवाई का मुद्दा लगातार चर्चा में है। अनंत सिंह पर कार्रवाई के तहत जदयू पहले उन्हें और उनकी पत्नी नीलम देवी को पार्टी से बाहर कर चुका है। अब उनकी विधानसभा सदस्यता और सरकारी आवास से जुड़े मामलों में भी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री और जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह से जब अनंत सिंह पर पार्टी की कार्रवाई को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इस मामले से खुद को अलग कर लिया। दिल्ली में ललन सिंह और जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा एक साथ नजर आए। इसी दौरान पत्रकारों ने दोनों नेताओं से अनंत सिंह पर हुई कार्रवाई को लेकर सवाल किया।
ललन सिंह ने संजय झा की ओर किया इशारा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सवाल सुनने के बाद ललन सिंह और संजय झा आगे बढ़ने लगे। पत्रकारों ने उनका पीछा करते हुए अनंत सिंह पर कार्रवाई से जुड़े सवाल पूछे। गाड़ी में बैठने से पहले ललन सिंह ने संजय झा की ओर इशारा करते हुए कहा कि उनसे बात कर लीजिए। उन्होंने बताया कि यह मामला संजय झा के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है। इसके बाद ललन सिंह अपनी गाड़ी में बैठकर वहां से रवाना हो गए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि अनंत सिंह पर पार्टी की कार्रवाई का फैसला किस स्तर पर हुआ।
संजय झा ने भी सवाल का जवाब नहीं दिया
ललन सिंह के बाद पत्रकारों ने संजय झा से भी अनंत सिंह पर कार्रवाई को लेकर सवाल किया। हालांकि, संजय झा ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और आगे बढ़ गए। जदयू ने अनंत सिंह को छह साल के लिए पार्टी से बाहर करने का आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई बिहार विधान परिषद चुनाव के दौरान पार्टी की रणनीति के खिलाफ अभियान चलाने के आरोपों के बीच हुई। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के नाम से कार्रवाई का कार्यालय आदेश जारी हुआ। इसके अलावा अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भी सौंपा गया है।
अनंत सिंह और जदयू के बीच क्यों बढ़ा विवाद?
अनंत सिंह और जदयू के बीच विवाद की पृष्ठभूमि हाल के विधान परिषद चुनाव से जुड़ी बताई जा रही है। इस चुनाव में अनंत सिंह पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ खड़े दिखाई दिए। पार्टी की रणनीति से अलग रुख अपनाने के बाद जदयू ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की। इसके बाद अनंत सिंह और पार्टी नेतृत्व के बीच बयानबाजी भी देखने को मिली। अनंत सिंह को पहले भी जदयू के प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता रहा है। उनके राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए उनके खिलाफ हुई कार्रवाई को बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
ललन सिंह और अनंत सिंह का पुराना राजनीतिक समीकरण
ललन सिंह जदयू के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी नेताओं के तौर पर उनकी पहचान रही है। वह जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। अनंत सिंह के साथ उनके पुराने राजनीतिक समीकरण की चर्चा भी होती रही है। विधानसभा चुनाव के दौरान जब अनंत सिंह दुलारचंद यादव हत्याकांड में जेल चले गए थे, तब मोकामा क्षेत्र में ललन सिंह की सक्रियता बढ़ी थी। वहीं, विधान परिषद चुनाव के दौरान अनंत सिंह के पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ जाने के बाद ललन सिंह को चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा हुई थी। उस समय ललन सिंह की ओर से यह कहा गया था कि अनंत सिंह आगे बयानबाजी नहीं करेंगे। हालांकि, इसके कुछ ही दिनों बाद अनंत सिंह ने फिर अपने तेवर दिखाए और यहां तक कहा कि वह ललन सिंह को नहीं जानते।
नीलम देवी पर भी जदयू ने की कार्रवाई
अनंत सिंह की पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी पर भी जदयू ने कार्रवाई की है। उनकी पार्टी सदस्यता खत्म करने के साथ ही उन्हें बीस सूत्री समिति से भी हटा दिया गया। इसके अलावा नीलम देवी को मिला उपमंत्री का दर्जा भी वापस ले लिया गया है। अब उनके नाम से आवंटित सरकारी आवास को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मॉल रोड स्थित सरकारी बंगला खाली करने के लिए नीलम देवी को 25 नवंबर तक का समय दिया गया है। बताया जाता है कि इस आवास में अनंत सिंह लंबे समय से रह रहे थे। यहां उनके द्वारा गाय और घोड़े भी पाले जाते हैं।
आगे क्या हो सकता है?
अनंत सिंह के खिलाफ पार्टी की कार्रवाई के बाद अब उनकी विधानसभा सदस्यता से जुड़ा मामला भी महत्वपूर्ण हो गया है। जदयू ने इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है। हालांकि, सदस्यता समाप्त करने का अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होगा। इसी तरह सरकारी आवास खाली कराने की प्रक्रिया भी प्रशासनिक नियमों के अनुसार आगे बढ़ेगी। ललन सिंह के बयान और संजय झा की चुप्पी के बाद इस बात को लेकर राजनीतिक चर्चा जरूर तेज हुई है कि जदयू में अनंत सिंह के खिलाफ लिए गए फैसले के पीछे पार्टी नेतृत्व की रणनीति क्या है। फिलहाल पार्टी की ओर से कार्रवाई को लेकर कोई अलग विस्तृत राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।