ललन सिंह का खरगे पर हमला, बोले- इंदिरा गांधी के विरोध में भी नहीं दी जाती थी गाली
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ें
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के प्रधानमंत्री को लेकर दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने 1974 के आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नीतियों का कड़ा विरोध करने के बावजूद उस समय राजनीतिक मर्यादा का ध्यान रखा जाता था।
ललन सिंह ने सवाल उठाया कि कांग्रेस जैसी पुरानी और प्रमुख राजनीतिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से प्रधानमंत्री के लिए इस तरह की भाषा की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च राजनीतिक पदों पर बैठे नेताओं को अपनी बात रखते समय शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब प्रधानमंत्री को लेकर कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। हालांकि, विवाद की पृष्ठभूमि में खरगे के जिस बयान का उल्लेख किया गया है, उसके सटीक शब्दों और संदर्भ को लेकर पूरी जानकारी सामने होना जरूरी है।
1974 के आंदोलन का हवाला देकर ललन सिंह ने उठाए सवाल
ललन सिंह ने अपने बयान में 1974 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष काफी तीखा था, लेकिन विरोध जताने के लिए अपमानजनक भाषा का सहारा नहीं लिया जाता था।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, राजनीतिक मतभेद अपनी जगह होते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के प्रति सार्वजनिक व्यवहार में गरिमा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने खरगे के शब्दों पर आपत्ति जताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष के पद की जिम्मेदारी का भी उल्लेख किया।
इस दौरान ललन सिंह ने खरगे की उम्र और मानसिक स्थिति को लेकर भी विवादास्पद टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष के बयान से ऐसा लगता है कि उन्होंने मर्यादा की सीमाओं का ध्यान नहीं रखा। उनकी इस टिप्पणी से राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
राहुल गांधी और कांग्रेस पर भी साधा निशाना
ललन सिंह ने कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि देश की जनता ने चुनावों में कांग्रेस को दोबारा सत्ता सौंपने से इनकार करके सही फैसला किया है। उनके मुताबिक, पार्टी का राजनीतिक प्रभाव लगातार कमजोर हो रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि यदि कांग्रेस को फिर से सरकार चलाने का अवसर मिलता, तो देश की स्थिति इंदिरा गांधी के शासनकाल से भी खराब हो सकती थी। यह टिप्पणी कांग्रेस के नेतृत्व और उसकी राजनीतिक दिशा पर सीधा हमला मानी जा रही है।
हालांकि, ये ललन सिंह के राजनीतिक विचार और आरोप हैं। देश की स्थिति को लेकर उनके दावे का आकलन आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए।
निशिकांत दुबे ने भी कांग्रेस नेतृत्व पर बोला हमला
इस राजनीतिक विवाद में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने पार्टी की मौजूदा स्थिति की आलोचना करते हुए कहा कि लगातार चुनावी हार के कारण कांग्रेस नेतृत्व मुश्किलों का सामना कर रहा है।
दुबे ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के बाद के दौर का उदाहरण दिया। उन्होंने दावा किया कि उस समय अमेरिका के तत्कालीन नेताओं हेनरी किसिंजर और रिचर्ड निक्सन की ओर से इंदिरा गांधी के प्रति कथित अपमानजनक टिप्पणियों के बाद भारतीय विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं ने संसद में प्रधानमंत्री का बचाव किया था।
दुबे ने अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सम्मान को दलगत राजनीति से ऊपर रखा जाता था। उनके बयान का उद्देश्य यह बताना था कि राजनीतिक विरोध के बावजूद देश के प्रधानमंत्री के पद की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, खरगे के बयान को लेकर ललन सिंह और निशिकांत दुबे की प्रतिक्रियाओं ने भाजपा-कांग्रेस के बीच जुबानी जंग को और तेज कर दिया है। अब इस विवाद में कांग्रेस की प्रतिक्रिया और आगे आने वाले राजनीतिक बयान अहम रहेंगे।
