UP स्कूल प्रार्थना गीत | स्कूल की दैनिक प्रार्थना हिंदी में (UP परिषदीय स्कूल)
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👉 WhatsApp से जुड़ेंउत्तर प्रदेश के सभी जिलों के विद्यालयों के लिए दैनिक प्रार्थना (ऑडियो सहित)
उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के विद्यालयों में प्रातःकालीन सभा (Morning Assembly) का विशेष महत्व है। दिन की शुरुआत सुमधुर प्रार्थना से करने से छात्रों में सकारात्मक ऊर्जा, अनुशासन और एकाग्रता का विकास होता है। यहाँ सोमवार से शनिवार तक की दैनिक स्कूल प्रार्थनाओं, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के स्पष्ट बोल और उनके स्मार्ट ड्युअल-सर्वर ऑडियो दिए गए हैं। आप इन्हें सुनकर अभ्यास कर सकते हैं।
सोमवार
वह शक्ति हमें दो दयानिधे
वह शक्ति हमें दो दयानिधे, कर्त्तव्य मार्ग पर डट जावें।
पर-सेवा पर-उपकार में हम, जग(निज)-जीवन सफल बना जावें
वह शक्ति हमें दो दयानिधे...
हम दीन-दुखी निबलों-विकलों के, सेवक बन संताप हरें।
जो हैं अटके, भूले-भटके, उनको तारें खुद तर जावें॥
छल, दंभ-द्वेष, पाखंड-झूठ, अन्याय से निशिदिन दूर रहें।
जीवन हो शुद्ध सरल अपना, शुचि प्रेम-सुधा रस बरसावें॥
निज आन-बान, मर्यादा का, प्रभु ध्यान रहे अभिमान रहे।
जिस देश-जाति में जन्म लिया, बलिदान उसी पर हो जावें॥
मंगलवार
दया कर दान भक्ति का
दया कर दान भक्ति का हमें परमात्मा देना,
दया करना हमारी आत्मा में शुद्धता देना।
हमारे ध्यान में आओ, प्रभु आँखों में बस जाओ।
अँधेरे दिल में आकर के, परम ज्योति जगा देना।
हमारा कर्म हो सेवा, हमारा धर्म हो सेवा।
सदा ईमान हो सेवा, व सेवक चर बना देना।
बहादो प्रेम की गंगा दिलो में प्रेम का सागर।
हमें आपस में मिलजुल के प्रभो रहना सिखा देना।
वतन के वास्ते जीना वतन के वास्ते मरना
वतन पर जाँ फिदा करना, प्रभो हमको सिख देना।
बुधवार
ऐ, मालिक, तेरे बंदे हम
ऐ मालिक तेरे बंदे हम, ऐसे हो हमारे करम
नेकी पर चले और बदी से टले, ताकी हँसते हुये निकले दम
ये अंधेरा घना छा रहा, तेरा इन्सान घबरा रहा
हो रहा बेख़बर, कुछ ना आता नज़र, सुख का सूरज छुपा जा रहा
है तेरी रोशनी में वो दम, तो अमावस को कर दे पूनम
बड़ा कमजोर है आदमी, अभी लाखों हैं इस में कमी
पर तू जो खड़ा, है दयालू बड़ा, तेरी क्रिपा से धरती थमी
दिया तूने हमें जब जनम, तू ही झेलेगा हम सब के ग़म
जब जुल्मों का हो सामना, तब तू ही हमें थामना
वो बुराई करें, हम भलाई भरें, नहीं बदले की हो कामना
बढ़ उठे प्यार का हर कदम, और मिटे बैर का ये भरम
गुरुवार
सुबह सवेरे लेके तेरा नाम प्रभु
सुबह सवेरे लेकर तेरा नाम प्रभु,
करते हैं हम शुरु आज का काम प्रभु ।
शुद्ध भाव से तेरा ध्यान लगाएं हम,
विद्या का वरदान तुम्हीं से पाए हम ।
तुम्ही से है आगाज़ तुम्हीं से अंजाम प्रभु,
करते है हम शुरु आज का काम प्रभु ।
गुरुओं का सत्कार कभी न भूले हम,
इतना बनें महान गगन को छु ले हम ।
तुम्हीं से है हर सुबह तुम्ही से शाम प्रभु,
करते है हम शुरु आज का काम प्रभु ।
शुक्रवार
हर देश में तू, हर भेष में तू
हर देश में तू, हर भेष में तू,
तेरे नाम अनेक तू एक ही है,
तेरी रंगभूमि, यह विश्व भरा,
सब खेल में, मेल में तू ही तो है ॥
सागर से उठा बादल बनके,
बादल से फटा जल हो करके ।
फिर नहर बना नदियाँ गहरी,
तेरे भिन्न प्रकार, तू एक ही है ॥
चींटी से भी अणु-परमाणु बना,
सब जीव-जगत् का रूप लिया ।
कहीं पर्वत-वृक्ष विशाल बना,
सौंदर्य तेरा, तू एक ही है ॥
शनिवार
इतनी शक्ति हमें देना दाता
इतनी शक्ति हमें देना दाता, मनका विश्वास कमजोर हो ना
हम चलें नेक रस्ते पे, हमसे भूलकर भी कोई भूल हो ना
दूर अज्ञान के हो अँधेरे तू हमें ज्ञान की रौशनी दे
हर बुराई से बचके रहें हम जीतनी भी दे भली ज़िन्दगी दे
बैर हो ना किसी का किसी से भावना मन में बदले की हो ना
हम न सोचें हमें क्या मिला है हम ये सोचें क्या किया है अर्पण
फूल खुशियों के बांटें सभी को सबका जीवन ही बन जाए मधुबन
अपनी करुणा को जल तू बहा के करदे पावन हर एक मन का कोना
राष्ट्रीय गीत
वन्दे मातरम्
वन्दे मातरम्! सुजलाम्, सुफलाम्, मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलाम्, मातरम्!
शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीम्, फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्, सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!
कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले, कोटि-कोटि-भुजैरधृत-खरकरवाले,
अबला केन मा एत बले? बहुबलधारिणीं, नमामि तारिणीं, रिपुदलवारिणीं, मातरम्!
तुमि विद्या, तुमि धर्म, तुमि हृदि, तुमि मर्म, त्वम् हि प्राणा: शरीरे!
बाहुते तुमि मा शक्ति, हृदये तुमि मा भक्ति, तोमारई प्रतिमा गडी मन्दिरे-मन्दिरे!
त्वम् हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी, कमला कमलदलविहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्, नमामि कमलाम्, अमलाम् अतुलाम्, सुजलां सुफलां, मातरम्!
श्यामलाम् सरलाम् सुस्मिताम् भूषिताम्, धरणीम् भरणीम्, मातरम्!
राष्ट्रगान
जन गण मन
जन-गण-मन अधिनायक जय हे, भारत भाग्य विधाता!
पंजाब-सिन्ध-गुजरात-मराठा, द्रविड़-उत्कल-बङ्ग
विंध्य हिमाचल यमुना गंगा, उच्छल जलधि तरंग
तब शुभ नामे जागे, तब शुभ आशिष माँगे
गाहे तब जय गाथा।
जन-गण-मंगलदायक जय हे, भारत भाग्य विधाता!
जय हे! जय हे! जय हे! जय जय जय जय हे!
प्रतिज्ञा
दैनिक प्रतिज्ञा
भारत हमारा देश है। हम सब भारतवासी भाई-बहिन है।
हम उन महान परम्पराओं पर गर्व करते हैं जो इस देश की बहुमूल्य थाती हैं।
हम माता-पिता एवं गुरुजनों का आदर करेगें।
हम अपने देश तथा देशवासियों के प्रति निष्ठावान होने की प्रतिज्ञा करते हैं।
उनकी सुख समृद्धि में ही हमारा सुख निहित है।
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