राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, पहली बार CEO की नियुक्ति; अखिलेश ने उठाए सवाल
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👉 WhatsApp से जुड़ेंअयोध्या में राम मंदिर के प्रबंधन को लेकर बुधवार को बड़ा फैसला सामने आया। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया है। इसके साथ ही ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को भी शामिल किया गया है। इस बदलाव के बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और इससे जुड़े विवादों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि राम मंदिर से जुड़े मामलों में सामने आए विवादों और विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के बाद ट्रस्ट के सामने बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के घटनाक्रम से धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों के भरोसे पर असर पड़ा है।
राम मंदिर ट्रस्ट ने पहली बार नियुक्त किया CEO
अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक बुधवार को श्री मणिरामदास छावनी में हुई। इसी बैठक में ट्रस्ट के पहले CEO के नाम पर फैसला किया गया। ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में नियुक्तियों की जानकारी दी।
रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, अयोध्या के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी संभालेंगे। CEO की नियुक्ति को मंदिर के प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इसके अलावा दिल्ली निवासी महेश भगचंदका, अयोध्या निवासी मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद निवासी डॉ. निर्मला यादव को नए ट्रस्टी के तौर पर शामिल किया गया है। इन नियुक्तियों के साथ ट्रस्ट की संरचना में भी बदलाव हुआ है।
अखिलेश यादव ने उठाए SIT जांच और कार्रवाई पर सवाल
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने राम मंदिर ट्रस्ट में हुई नियुक्तियों पर सीधे कोई टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट अपने स्तर पर निर्णय लेता है और इस मामले में अंतिम फैसला सरकार तथा ट्रस्ट की व्यवस्था से जुड़ा है।
हालांकि, उन्होंने पिछले विवादों और SIT की जांच का जिक्र करते हुए जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए। अखिलेश के मुताबिक, जांच के बाद FIR दर्ज हुई, कुछ लोगों को जेल भेजा गया और बाद में कुछ मामलों में क्लीन चिट भी दी गई। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं ने पूरे मामले में सवाल खड़े किए हैं।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि धार्मिक आस्था केवल किसी संस्था की विश्वसनीयता तक सीमित नहीं होती। उनके अनुसार, राम मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं में जो विवाद सामने आए हैं, उनका असर श्रद्धालुओं की भावनाओं पर पड़ा है।
नए CEO के सामने होगी बड़ी जिम्मेदारी
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO के रूप में जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब मंदिर के प्रबंधन और प्रशासन को लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज है। नई जिम्मेदारी के तहत उनके सामने मंदिर से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करने की चुनौती होगी।
वहीं, तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति से ट्रस्ट के कामकाज में नए सदस्यों की भागीदारी बढ़ेगी। ट्रस्ट की बैठक में हुई इन नियुक्तियों को राम मंदिर प्रबंधन की आगे की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
राजनीतिक स्तर पर अखिलेश यादव की टिप्पणियों के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से किए गए प्रशासनिक फैसले और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग संदर्भों में देखी जानी चाहिए।
