JDU का BJP में विलय होगा? तेजस्वी यादव के दावे से बिहार में सियासी हलचल
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ें
बिहार की राजनीति में तेजस्वी यादव ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) को लेकर बड़ा दावा किया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि JDU अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की बी टीम बनकर रह गई है और आने वाले समय में उसका BJP में विलय हो सकता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब बिहार में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर NDA के घटक दलों के बीच अलग-अलग रुख सामने आ रहे हैं। तेजस्वी ने यह भी कहा कि RJD बिहार में UCC लागू नहीं होने देगी। वहीं JDU पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि बिहार में UCC लागू नहीं होगा और इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत की जाएगी।
तेजस्वी यादव ने JDU के भविष्य पर क्या कहा?
तेजस्वी यादव ने JDU पर निशाना साधते हुए दावा किया कि यह पार्टी अब स्वतंत्र राजनीतिक पहचान के साथ काम नहीं कर रही है। उनके मुताबिक JDU फिलहाल BJP की बी टीम की तरह काम कर रही है और आगे चलकर BJP में उसका विलय हो सकता है। तेजस्वी ने इस संभावित विलय की जिम्मेदारी JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से भी जोड़ दी। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि JDU के BJP में विलय को लेकर तेजस्वी का बयान एक राजनीतिक दावा है। JDU की ओर से ऐसा कोई निर्णय या घोषणा सामने नहीं आई है। तेजस्वी ने अपने पुराने राजनीतिक दावे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि RJD पहले से कहती रही है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर नहीं रहेंगे और अब उनका यह दावा सही साबित हुआ। गौरतलब है कि 2026 में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद संभाला है। इस बदलाव के बाद JDU और BJP के संबंधों को लेकर बिहार की राजनीति में लगातार चर्चा बनी हुई है।
UCC को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
समान नागरिक संहिता को लेकर ताजा विवाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद तेज हुआ। अमित शाह ने कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP-NDA शासित 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। UCC का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और BJP लंबे समय से अपना समर्थन जताते रहे हैं। अमित शाह के बयान के बाद बिहार में JDU ने अलग रुख सामने रखा। JDU विधायक श्याम रजक ने कहा कि बिहार में UCC लागू नहीं होने दिया जाएगा। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि इस मुद्दे पर संजय झा केंद्रीय गृह मंत्री से बातचीत करेंगे। JDU ने बाद में यह संकेत भी दिया कि UCC का ड्राफ्ट सामने आने के बाद उसके प्रावधानों को देखकर अंतिम रुख तय किया जाएगा। यानी पार्टी की मौजूदा स्थिति को बिहार में UCC लागू करने के विरोध के तौर पर बताया गया है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर कानून के अंतिम प्रावधानों पर चर्चा की बात भी सामने आई है।
RJD ने UCC पर क्या रुख अपनाया?
तेजस्वी यादव ने UCC के मुद्दे पर RJD का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी पार्टी बिहार में इसे लागू नहीं होने देगी। इस बयान के साथ ही UCC बिहार की राजनीति में NDA और विपक्ष के बीच एक प्रमुख मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। एक तरफ केंद्र की ओर से NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने की समयसीमा बताई गई है, वहीं बिहार में JDU ने राज्य में इसे लागू करने से इनकार किया है। इस स्थिति में BJP और JDU के बीच UCC को लेकर मतभेद चर्चा का विषय बने हुए हैं। हालांकि, दोनों दल अभी NDA का हिस्सा हैं और JDU ने अपने स्तर पर बातचीत के जरिए इस मुद्दे पर आगे बढ़ने का संकेत दिया है।
महागठबंधन की ओर से JDU को पहले भी मिला ऑफर
UCC विवाद के बीच RJD विधायक भाई वीरेंद्र की ओर से भी JDU को लेकर बयान सामने आया था। उन्होंने JDU से BJP का साथ छोड़कर महागठबंधन के साथ आने और मिलकर सरकार बनाने की अपील की थी। बताया गया कि भाई वीरेंद्र ने इस तरह का ऑफर दो बार दिया, लेकिन JDU की ओर से इसे स्वीकार करने का कोई संकेत नहीं मिला। अब तेजस्वी यादव के JDU के BJP में संभावित विलय वाले बयान ने इस राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। हालांकि, JDU की तरफ से BJP में विलय की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
BJP-NDA में UCC पर सभी दलों का रुख एक जैसा नहीं
UCC को लेकर NDA के सभी घटक दलों की स्थिति एक जैसी नहीं है। JDU ने बिहार में इसे लागू करने का विरोध जताया है, जबकि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) ने UCC का समर्थन किया है। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने अभी अपना अंतिम रुख स्पष्ट नहीं किया है। चिराग पासवान ने कहा है कि UCC का ड्राफ्ट सामने आने के बाद उसके प्रावधानों पर विस्तार से विचार किया जाएगा। उपेंद्र कुशवाहा ने भी ड्राफ्ट देखने के बाद रुख तय करने की बात कही है। इस तरह बिहार में UCC को लेकर NDA के भीतर अलग-अलग रुख सामने आ रहे हैं। आने वाले समय में ड्राफ्ट के प्रावधान और सहयोगी दलों की बातचीत इस मुद्दे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।