‘ज्ञानेश कुमार देशद्रोही’, राहुल गांधी ने CEC से मांगा इस्तीफा
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👉 WhatsApp से जुड़ेंकांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग करते हुए चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और वोटों से जुड़ी गंभीर चिंताएं उठाईं। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के कई फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज की।
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची और वोट की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि मतदाता के वोट पर ही सवाल खड़ा हो जाए तो लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
राहुल गांधी ने CEC ज्ञानेश कुमार पर क्या कहा?
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में CEC ज्ञानेश कुमार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए और उनके इस्तीफे की मांग की। उन्होंने चुनावों में कथित धांधली को लेकर कहा कि उनके पास इसके समर्थन में जानकारी और सबूत हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग मतदाता के वोट का संरक्षक है और उसकी जिम्मेदारी वोट की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। राहुल गांधी ने कहा कि वोट की प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर होने से संविधान और कानून से जुड़ी संस्थाओं पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि, राहुल गांधी द्वारा लगाए गए ये आरोप राजनीतिक आरोप हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से चुनावों में धांधली का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर चुनावी प्रक्रियाओं और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों का बचाव किया है।
10 महीने में 14 आपत्तियों की रिपोर्ट से क्यों बढ़ा विवाद?
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट है। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के भीतर कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर औपचारिक आपत्ति जताई।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने, नाम हटाने, डेटा तक पहुंच और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से संबंधित प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए। कुछ आपत्तियों में प्रक्रियाओं को कथित तौर पर “अनधिकृत” या “अवैध” बताया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों की प्रतियां CEC ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं। इसी रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग के कामकाज और आंतरिक निर्णय प्रक्रिया पर सवाल और तेज कर दिए।
SIR को लेकर क्या है पूरा विवाद?
विवाद का एक बड़ा हिस्सा Special Intensive Revision यानी SIR से जुड़ा है। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के तहत अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता रिकॉर्ड की समीक्षा की है।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया के दौरान 13 करोड़ से अधिक नाम ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से हटाए जाने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों ने मतदाता नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया से जुड़े कई मामलों पर आपत्ति जताई।
यही मुद्दा अब राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। विपक्ष इसे मतदाताओं के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया से जोड़ रहा है, जबकि चुनाव आयोग की ओर से आंतरिक मतभेदों को निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा बताया गया है।
मतदाता सूची और IT सिस्टम को लेकर भी उठे सवाल
रिपोर्ट में चुनाव आयोग के IT सिस्टम और मतदाता डेटाबेस तक पहुंच को लेकर भी आपत्तियों का उल्लेख किया गया है।
दो चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर इस बात पर चिंता जताई कि मतदाता सूची से जुड़े डिजिटल डेटाबेस का नियंत्रण कहीं अधिक केंद्रीकृत न हो जाए। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि स्थानीय स्तर के वैधानिक अधिकारियों की मतदाता डेटा तक पहुंच और उसमें बदलाव की प्रक्रिया किस तरह संचालित हो रही है।
रिपोर्ट में गोवा से जुड़े एक मामले का भी उल्लेख है, जहां सॉफ्टवेयर से संबंधित समस्या के कारण कुछ ऐसे मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं हो पाए, जिन्हें स्थानीय स्तर पर पात्र माना गया था। यह मामला भी चुनावी डेटा और तकनीकी व्यवस्था को लेकर उठाई गई चिंताओं का हिस्सा बना।
राहुल गांधी ने इस्तीफे की मांग क्यों की?
राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी वोट की रक्षा करना है। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की और आरोप लगाया कि चुनावी व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास इस मुद्दे से संबंधित और जानकारी है और आने वाले समय में कई बातें सामने आएंगी। राहुल गांधी ने दो चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों का भी हवाला दिया।
उनके अनुसार, इन आपत्तियों से चुनाव आयोग के भीतर उठ रहे सवालों की गंभीरता सामने आती है। हालांकि, इन दावों और रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियों की व्याख्या को लेकर राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग के बीच मतभेद बने हुए हैं।
चुनाव आयोग का क्या पक्ष है?
इस विवाद के बीच चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि आयोग के भीतर अलग-अलग मुद्दों पर मतभेद होना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। उपलब्ध रिपोर्टों में आयोग ने आंतरिक विचार-विमर्श को लेकर उठे सवालों का जवाब देते हुए इसे संस्थागत प्रक्रिया के संदर्भ में रखा है।
यानी मौजूदा विवाद में दो अलग पहलू हैं। एक तरफ विपक्ष चुनावी प्रक्रिया और SIR को लेकर गंभीर आरोप लगा रहा है, जबकि दूसरी तरफ चुनाव आयोग अपनी प्रक्रियाओं का बचाव कर रहा है।
आगे क्या होगा?
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष का दबाव अब और बढ़ गया है। कांग्रेस ने 25 सितंबर को देशभर में चुनाव कार्यालयों तक मार्च करने का कार्यक्रम भी घोषित किया है और CEC को हटाने तथा कार्रवाई की मांग उठाई है।
अब इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों, SIR से जुड़े फैसलों और विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों पर आगे की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल राहुल गांधी की मांग राजनीतिक बयान और विपक्ष के आरोपों के रूप में सामने आई है। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि या खंडन संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड, जांच अथवा न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगा।
