ज्ञानेश कुमार पर CJP का बड़ा हमला, 48 घंटे में इस्तीफे का अल्टीमेटम

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 48 घंटे के भीतर इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों से लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। हालांकि, ये आरोप CJP के हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के तौर पर नहीं माना जा सकता।

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 24 सितंबर को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कई मांगें रखीं। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि 48 घंटे में इस्तीफा नहीं दिया गया तो देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

CJP ने ज्ञानेश कुमार के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगें

CJP के मुताबिक उसकी पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने से जुड़ी है। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि कथित फैसलों के लिए ज्ञानेश कुमार को निर्देश किसने दिए।

दूसरी मांग के तहत CJP ने आगामी चुनावों को रोकने, SIR यानी Special Intensive Revision प्रक्रिया को फ्रीज करने और जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने की मांग की है। इसके साथ ही पार्टी ने SIR से जुड़े पूरे निर्णय लेने की प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग भी रखी।

तीसरी मांग चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को बदलने की है। CJP ने नए कानून में नागरिक समाज की भागीदारी की मांग की है।

पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से SIR से संबंधित फाइलों को अपनी कस्टडी में लेने की भी मांग की। ये सभी मांगें CJP की ओर से रखी गई हैं और इन पर संबंधित संवैधानिक संस्थाओं की कार्रवाई या निर्णय अलग विषय है।

48 घंटे बाद देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं देते हैं तो पार्टी देशभर में आंदोलन शुरू करेगी। पार्टी ने दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की भी बात कही है।

CJP ने इसे केवल किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा न बताते हुए मतदाता अधिकार और चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा विषय बताया। पार्टी ने कहा कि वह देशभर में लोगों को जोड़ने के बाद दिल्ली में आंदोलन करेगी।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित आंदोलन किस स्वरूप में होगा और इसमें कितने लोग शामिल होंगे। फिलहाल यह CJP की ओर से घोषित राजनीतिक कार्यक्रम है।

SIR और चुनाव आयोग के भीतर आपत्तियों का मामला

CJP का हमला ऐसे समय हुआ है जब चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को लेकर रिपोर्ट सामने आई है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं।

रिपोर्ट के अनुसार ये आपत्तियां मतदाता जोड़ने और हटाने, मतदाता सूची से जुड़ी अपीलों, Form-6 में बदलाव और चुनावी डेटा की पहुंच जैसे मुद्दों से संबंधित थीं। कुछ मामलों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर फैसलों को अपनी जानकारी या मंजूरी के बिना लिया गया बताया।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि SIR के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने की प्रक्रिया सामने आई है। यह आंकड़ा ड्राफ्ट रोल से हटाए गए नामों से संबंधित है और इसे स्थायी रूप से मताधिकार खोने वाले लोगों की संख्या के रूप में नहीं समझना चाहिए।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

14 आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इस बात से इनकार किया कि SIR या अन्य फैसलों में कोई संस्थागत टूट हुई है। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, आयोग के सूत्रों ने कहा कि SIR सहित आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से और सर्वसम्मति से लिए गए।

इस तरह पूरे विवाद में दो अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। एक तरफ जांच रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज औपचारिक आपत्तियों का विवरण है, जबकि चुनाव आयोग की ओर से यह कहा गया है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए।

यही अंतर मौजूदा विवाद का प्रमुख हिस्सा बना हुआ है। इसलिए किसी भी आरोप को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय उपलब्ध दस्तावेजों, आयोग के जवाब और आगे होने वाली कानूनी या संस्थागत कार्रवाई को देखना महत्वपूर्ण होगा।

13 करोड़ नाम हटाने के दावे पर क्या स्थिति है?

CJP ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर कई दावे किए। पार्टी ने दावा किया कि SIR के जरिए करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाए गए और इससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

लेकिन मतदाता सूची से नाम हटना अपने आप में किसी व्यक्ति का स्थायी रूप से मतदान अधिकार खत्म होना नहीं है। पश्चिम बंगाल के मामले में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि SIR के दौरान हटाए गए 27.16 लाख मतदाताओं में से 22 लाख से अधिक ने दोबारा शामिल किए जाने के लिए अपील की थी।

इसलिए CJP द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोपों और आधिकारिक चुनावी रिकॉर्ड के बीच अंतर समझना जरूरी है। किसी मतदाता का नाम हटने, अपील करने और दोबारा सूची में शामिल होने की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में होती है।

विवाद अब किस दिशा में जाएगा?

ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद अब केवल SIR तक सीमित नहीं दिख रहा है। विपक्षी दलों की ओर से भी चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी बीच 24 सितंबर को INDIA ब्लॉक की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की दिशा में संसद में प्रस्ताव लाने की तैयारी की खबर सामने आई है।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने निर्णयों को सर्वसम्मत बताया है। ऐसे में आगे की स्थिति राजनीतिक बयानों के साथ-साथ संवैधानिक प्रक्रिया, चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण और न्यायिक कार्रवाई पर भी निर्भर करेगी।

फिलहाल CJP ने 48 घंटे की समयसीमा देकर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि CJP की घोषणा के बाद क्या कार्रवाई होती है और SIR से जुड़े विवाद पर चुनाव आयोग तथा अदालतों का अगला रुख क्या रहता है।

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