पटना में छात्रों-किसानों के मार्च पर बवाल, वाटर कैनन के बाद लाठीचार्ज
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ेंपटना प्रदर्शन सोमवार को उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब विभिन्न छात्र, किसान और मजदूर संगठनों का मार्च गांधी मैदान से आगे बढ़ते हुए जेपी गोलंबर और डाकबंगला चौराहे तक पहुंचा। पटना प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग कर भीड़ को रोकने की कोशिश की और बाद में वाटर कैनन तथा लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया गया।
रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने जेपी गोलंबर पर बैरिकेडिंग तोड़ दी। इसके बाद डाकबंगला चौराहे पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
गांधी मैदान से शुरू हुआ मार्च, जेपी गोलंबर पर टूटी बैरिकेडिंग
सोमवार सुबह अलग-अलग संगठनों के लोग गांधी मैदान में जुटने लगे। मार्च में छात्र, किसान, मजदूर, महिला संगठन और विभिन्न वामपंथी संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता शामिल हुए।
बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज से जुड़े नर्सिंग और पारा मेडिकल छात्र भी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन में शामिल हुए। वहीं किसान और मजदूर संगठनों ने महंगाई, बेरोजगारी, बाढ़-सूखा और अन्य मुद्दे उठाए।
प्रशासन ने मार्च को नियंत्रित करने के लिए गांधी मैदान से आगे कई स्थानों पर पुलिस बल और बैरिकेडिंग लगाई थी। जेपी गोलंबर पर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की गई।
रिपोर्टों के अनुसार, करीब आधे घंटे की खींचतान के बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और डाकबंगला की ओर आगे बढ़ गए। इसके बाद पुलिस ने रास्ते को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल लगाया।
डाकबंगला पर वाटर कैनन के बाद लाठीचार्ज
डाकबंगला चौराहे के आसपास प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ने के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
इसके बावजूद प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग के पास मौजूद रहे और आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को पीछे हटाने की कार्रवाई की।
लाठीचार्ज और अफरातफरी के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों के घायल होने तथा कुछ लोगों के बेहोश होने की खबरें सामने आईं। स्थानीय रिपोर्टों में घायल लोगों को इलाज के लिए अस्पताल भेजे जाने की जानकारी दी गई है।
प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी की बात भी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों की ओर भी पत्थर फेंके जाने की सूचना है। हालांकि, इस दौरान किस व्यक्ति ने पत्थर फेंका, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती।
नर्सिंग-पारा मेडिकल छात्रों की क्या मांग है?
इस आंदोलन में बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के नर्सिंग और पारा मेडिकल छात्र भी शामिल हुए। छात्रों की प्रमुख मांगों में नियमित शैक्षणिक सत्र, स्थायी कुलपति की नियुक्ति और परीक्षा परिणाम से जुड़े विवादों का समाधान शामिल बताया गया है।
छात्रों की ओर से परीक्षा परिणाम को लेकर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के असफल होने पर सवाल उठाए गए हैं। कुछ रिपोर्टों में छात्रों के हवाले से बड़ी संख्या में छात्रों के फेल होने का दावा किया गया है। हालांकि, उपलब्ध स्वतंत्र रिपोर्टों में इसकी सटीक प्रतिशत संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है।
इसी वजह से छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब और परीक्षा परिणाम से जुड़े मामलों के समाधान की मांग कर रहे हैं।
किन मुद्दों को लेकर निकाला गया था मार्च?
किसान, मजदूर और छात्र संगठनों ने अलग-अलग मांगों को लेकर लोकभवन/राजभवन मार्च का आह्वान किया था। आंदोलन से जुड़े संगठनों ने बाढ़ और सूखे के स्थायी समाधान, बाढ़ पीड़ितों को राहत, रोजगार और महंगाई जैसे मुद्दे उठाए।
इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा नीति, श्रम कानूनों, कृषि से जुड़े मुद्दों और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित मांगें भी रखीं। कुछ संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी विरोध जताया।
प्रदर्शन में AISF, AIYF, किसान संगठनों, ट्रेड यूनियनों और अन्य जनसंगठनों से जुड़े लोगों की भागीदारी रही।
11 सूत्री मांगों में क्या-क्या शामिल?
प्रदर्शन से जुड़े संगठनों की ओर से बताई गई प्रमुख मांगों में शामिल हैं—
- बाढ़ पीड़ितों को राहत और मुआवजा।
- बाढ़ और सूखे का स्थायी समाधान।
- बेरोजगारों के लिए रोजगार की व्यवस्था।
- महंगाई पर नियंत्रण।
- कृषि ऋण माफी की मांग।
- शिक्षा और शुल्क वृद्धि से जुड़े मुद्दों का समाधान।
- श्रमिकों के हितों से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई।
- चार लेबर कोड वापस लेने की मांग।
- महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग।
- बेरोजगारों और बुजुर्गों के लिए मासिक पेंशन की मांग।
- भ्रष्टाचार और अपराध पर नियंत्रण की मांग।
इन मांगों को लेकर प्रदर्शनकारी लोकभवन की ओर बढ़ना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें डाकबंगला चौराहे के आसपास रोक दिया।
कई प्रदर्शनकारी हिरासत में, करीब तीन बजे खाली कराया गया डाकबंगला
तनाव बढ़ने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाना शुरू किया। रिपोर्टों के अनुसार, कई महिला और पुरुष प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
डाकबंगला चौराहे पर अफरातफरी के बीच प्रदर्शनकारी अलग-अलग दिशाओं में जाते दिखाई दिए। पुलिस ने इलाके को खाली कराने की कार्रवाई की और करीब तीन बजे तक डाकबंगला चौराहा खाली करा लिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के कारण पटना के मध्य हिस्से में यातायात भी प्रभावित हुआ। प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी ताकि प्रदर्शन को अन्य इलाकों में फैलने से रोका जा सके।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव ने बढ़ाई चिंता
पटना की इस घटना में एक तरफ प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर मार्च निकाला, वहीं दूसरी तरफ पुलिस ने बैरिकेडिंग और बल प्रयोग के जरिए उन्हें आगे बढ़ने से रोका।
बैरिकेडिंग टूटने, पुलिस से धक्कामुक्की, वाटर कैनन और लाठीचार्ज के बाद स्थिति कुछ समय के लिए काफी तनावपूर्ण हो गई। इस दौरान घायल और बेहोश हुए लोगों को चिकित्सा सहायता दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
घटना के बाद अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासन प्रदर्शनकारियों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और नर्सिंग-पारा मेडिकल छात्रों की परीक्षा परिणाम तथा विश्वविद्यालय से जुड़ी शिकायतों का समाधान किस तरह किया जाता है।

