बिहार एनकाउंटर पर PK का बड़ा बयान, बोले- गोली से नहीं रुकेगा क्राइम
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार एनकाउंटर को लेकर जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने सरकार और पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। बिहार एनकाउंटर पर अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण का रास्ता केवल गोली चलाने से नहीं निकलता, बल्कि बेहतर पुलिसिंग और प्रभावी व्यवस्था से अपराध पर रोक लगाई जा सकती है।
प्रशांत किशोर ने हालिया बातचीत में कहा कि अगर अपराधियों को गोली मारने से अपराध पूरी तरह रुक जाता, तो कश्मीर में लंबे समय पहले शांति स्थापित हो गई होती। उनका कहना है कि एनकाउंटर को अपराध नियंत्रण का स्थायी समाधान बताना लोगों को भ्रमित करने जैसा है।
एनकाउंटर को लेकर क्या बोले प्रशांत किशोर?
प्रशांत किशोर ने कहा कि किसी आरोपी या अपराधी को गोली मारने से अपराध की मूल समस्या खत्म नहीं होती। उनके मुताबिक, अपराध रोकने के लिए पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार, थानों की जवाबदेही और कानून का प्रभावी पालन जरूरी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि गोली चलाना ही अपराध रोकने का पर्याप्त तरीका होता, तो दुनिया के दूसरे देशों में भी यही मॉडल अपनाया जाता। उनका तर्क है कि सभ्य समाज में अपराध से निपटने के लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था और कानून की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में हाल की कुछ आपराधिक घटनाओं और पुलिस मुठभेड़ों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है। जमुई की घटना में पुलिस कार्रवाई के बाद भी इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
पुलिसिंग सुधार को बताया अपराध रोकने का रास्ता
प्रशांत किशोर ने अपराध नियंत्रण के लिए पुलिसिंग व्यवस्था में सुधार को प्रमुख उपाय बताया। उन्होंने कहा कि थानों में भ्रष्टाचार कम होना चाहिए और पुलिस तंत्र को अपराधियों या कथित माफिया प्रभाव से मुक्त रखने की जरूरत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में कई जगहों पर शराब और बालू माफिया का पुलिस व्यवस्था पर प्रभाव है। यह उनका राजनीतिक आरोप है और इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसी तरह के आरोप वे पहले भी बिहार में पुलिस प्रशासन और शराबबंदी को लेकर सार्वजनिक रूप से लगा चुके हैं।
प्रशांत किशोर का कहना है कि अपराध होने के बाद आरोपी के खिलाफ गोली चलाने की कार्रवाई करने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे अपराध होने से पहले ही पुलिस की मौजूदगी और कानून का डर प्रभावी हो।
उनके मुताबिक, पुलिस की जांच क्षमता, थानों की जवाबदेही और अपराधियों पर समय पर कानूनी कार्रवाई अपराध नियंत्रण की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।
“बिहार को अफगानिस्तान बनाना चाहते हैं?” PK का सवाल
प्रशांत किशोर ने अपने बयान में एनकाउंटर की नीति पर सवाल उठाते हुए यह भी पूछा कि क्या बिहार को ऐसी व्यवस्था की ओर ले जाना है, जहां अपराध के जवाब में लगातार गोली चलाने को समाधान माना जाए।
उन्होंने कहा कि पुलिस हो या अपराधी, गोली चलना किसी भी सभ्य व्यवस्था का सामान्य समाधान नहीं होना चाहिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि अपराधियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई हो और पुलिस व्यवस्था इतनी मजबूत हो कि अपराध को नियंत्रित किया जा सके।
यह टिप्पणी उस बहस के बीच आई है जिसमें बिहार में पुलिस की सख्त कार्रवाई और मुठभेड़ को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हाल ही में पटना में जन सुराज से जुड़े अनिल यादव पर गोलीबारी की घटना के बाद भी प्रशांत किशोर ने पुलिस व्यवस्था और अपराध नियंत्रण पर सवाल उठाए थे।
जमुई की घटना के बाद बढ़ी राजनीतिक बहस
जमुई में नाबालिग छात्रा से कथित छेड़खानी और उसके साथी के साथ बदसलूकी की घटना के बाद बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई। पुलिस ने मामले में कार्रवाई की और मुख्य आरोपी को मुठभेड़ के दौरान गोली लगने के बाद गिरफ्तार किया गया।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अपराधियों को पुलिस को चुनौती नहीं देनी चाहिए और कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अपराधी की कोई जाति या धर्म नहीं होता।
दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं ने इसी घटना को लेकर सरकार और मुख्यमंत्री से जवाब मांगा। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री के पुराने बयान का हवाला देते हुए उनके इस्तीफे की मांग भी की।
सम्राट चौधरी पर PK ने क्यों साधा निशाना?
प्रशांत किशोर ने जमुई की घटना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पुराने बयान पर भी सवाल उठाया। उन्होंने तंज करते हुए पूछा कि जब मुख्यमंत्री ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पहले सख्त टिप्पणी की थी, तो अब जमुई की घटना के बाद उस बयान के संदर्भ में उनकी जिम्मेदारी क्या बनती है।
सम्राट चौधरी के पुराने बयान को लेकर विपक्ष के कई नेताओं ने भी हाल में सवाल उठाए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उस बयान में उन्होंने रात में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कड़ा दावा किया था और अनहोनी की स्थिति में इस्तीफे की बात कही थी।
हालांकि, इस राजनीतिक बयानबाजी को अलग रखते हुए जमुई मामले में पुलिस की कार्रवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया अपने स्तर पर चल रही है। किसी आरोपी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और अदालत में अपराध सिद्ध होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
अपराध रोकने के लिए क्या है PK का तर्क?
प्रशांत किशोर के बयान का मुख्य केंद्र पुलिसिंग व्यवस्था है। उनका कहना है कि अपराध नियंत्रण के लिए केवल एनकाउंटर या कठोर कार्रवाई पर निर्भर रहने के बजाय पुलिस तंत्र को मजबूत करना चाहिए।
इसमें थानों की जवाबदेही, निष्पक्ष जांच, समय पर प्राथमिकी, प्रभावी गश्त, अपराधियों की निगरानी और अदालतों में मामलों की मजबूत पैरवी जैसे पहलू शामिल हैं।
उनके मुताबिक, अगर पुलिस व्यवस्था मजबूत होगी तो अपराधियों पर कार्रवाई केवल घटना के बाद नहीं, बल्कि अपराध रोकने के स्तर पर भी प्रभावी हो सकेगी।
