ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़े आशुतोष रांका, 2 अक्टूबर से आंदोलन
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👉 WhatsApp से जुड़ेंअसम में हिरासत से रिहा होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई है। रांका ने कहा कि संगठन इस मांग से पीछे नहीं हटेगा और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर 2 अक्टूबर से प्रस्तावित देशव्यापी आंदोलन की तैयारी जारी है।
रांका ने यह भी कहा कि CJP अब पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में अपनी गतिविधियां बढ़ाएगी। संगठन के मुताबिक, छात्रों, युवाओं और स्थानीय मुद्दों को आंदोलन के केंद्र में रखा जाएगा। यह बयान असम पुलिस द्वारा रांका समेत CJP के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के एक दिन बाद आया है।
2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन की तैयारी
CJP ने इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। संगठन ने कहा था कि मांग पूरी नहीं होने पर 2 अक्टूबर से देशव्यापी प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन की शुरुआत मुंबई से करने की बात कही थी।
अब असम से रिहाई के बाद आशुतोष रांका ने भी साफ किया है कि संगठन आंदोलन के कार्यक्रम से पीछे नहीं हट रहा है। उन्होंने कहा कि अभिजीत दीपके फिलहाल 2 अक्टूबर के प्रदर्शन की तैयारी में व्यस्त हैं और इसी वजह से उनका असम दौरा रद्द हो गया।
रांका के मुताबिक, CJP का आंदोलन SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर उठाए जा रहे सवालों और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है।
13 करोड़ नाम हटाने के दावे पर क्या बोले रांका?
आशुतोष रांका ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। उन्होंने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए ज्ञानेश कुमार से सार्वजनिक रूप से आरोपों पर स्पष्टीकरण देने की मांग की।
हालांकि, 13 करोड़ नाम हटाए जाने का आंकड़ा केवल CJP का दावा नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, SIR के तहत 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने की बात सामने आई है।
इस मुद्दे पर कानूनी चुनौती भी सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में SIR के दौरान करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने की जांच के लिए SIT गठित करने की मांग की गई है। हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध निष्कर्ष नहीं हैं।
वहीं, निर्वाचन आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों में किसी तरह की असहमति के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि आयोग के नीतिगत और प्रशासनिक निर्णयों को सभी आयुक्तों की सर्वसम्मति से मंजूरी मिली।
असम में हिरासत के बाद रांका के तेवर
रांका और CJP के कई सदस्यों को रविवार को गुवाहाटी में संगठन की क्षेत्रीय स्वयंसेवक बैठक से पहले पुलिस ने हिरासत में लिया था। अलग-अलग रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या 30 से 40 से अधिक बताई गई है। बाद में सभी को रिहा कर दिया गया।
रिहाई के बाद रांका ने पुलिस कार्रवाई को कथित तौर पर गैरकानूनी बताया। उनका आरोप है कि उन्हें और अन्य CJP सदस्यों को निजी परिसर से हिरासत में लिया गया और कार्रवाई का स्पष्ट आधार नहीं बताया गया।
रांका के मुताबिक, जब उन्होंने पुलिस से हिरासत का कारण पूछा तो अधिकारियों ने कथित तौर पर केवल “ऊपर से आदेश” मिलने की बात कही। उन्होंने इसे संगठन को डराने या दबाव में लेने की कोशिश बताया। इन आरोपों पर पुलिस या राज्य सरकार का विस्तृत पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
पूर्वोत्तर में CJP का विस्तार करने की तैयारी
हिरासत से रिहाई के बाद CJP ने असम और पूरे पूर्वोत्तर में अपनी गतिविधियां बढ़ाने की बात कही है। रांका ने कहा कि संगठन सभी पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंचेगा और अब तक उसे मिली प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है।
उन्होंने बताया कि CJP छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देगी। इसके अलावा स्थानीय समस्याओं, स्वदेशी समुदायों के अधिकार, बाढ़ और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे भी संगठन के एजेंडे में शामिल किए जा सकते हैं।
रांका ने असम के दूरदराज इलाकों में स्कूलों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि कई जगह स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है और CJP इन मुद्दों को सामने लाने का प्रयास करेगी। ये दावे संगठन की ओर से किए गए हैं और इनके अलग-अलग पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल CJP की नजर 2 अक्टूबर के प्रस्तावित देशव्यापी आंदोलन पर है। संगठन ने इसे SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जोड़कर देखा है।
दूसरी ओर, मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुए बदलाव और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सार्वजनिक बहस जारी है। ऐसे में 2 अक्टूबर को होने वाले CJP के कार्यक्रम पर राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर नजर रहेगी।
