Bihar Flood: लालू यादव ने सरकार को घेरा, बाढ़ के स्थायी समाधान की मांग

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बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर बना हुआ है। लालू यादव ने इसी बीच बिहार और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए बाढ़ के स्थायी समाधान की मांग उठाई है। लालू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लंबा पोस्ट शेयर कर सरकार से बिहार को पर्याप्त आर्थिक मदद देने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य के करीब 13 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर है और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हैं। उनके मुताबिक, मौजूदा संकट के बीच सरकार को राहत-बचाव के साथ-साथ भविष्य में बाढ़ रोकने के लिए स्थायी उपायों पर भी ध्यान देना चाहिए।

बाढ़ के बीच लालू यादव ने सरकार को घेरा

लालू प्रसाद यादव ने अपने पोस्ट में बिहार की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि भीषण बाढ़ के दौर में राज्य पर राजकोषीय दबाव है। उन्होंने अपने पुराने राजनीतिक संघर्ष को याद करते हुए दावा किया कि उन्होंने सत्ता और विपक्ष दोनों में रहते हुए बिहार के अधिकारों की आवाज उठाई। लालू ने अपने पोस्ट में केंद्र से बिहार को उसके हिस्से का बजट और आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने अपने राजनीतिक कार्यकाल का उल्लेख करते हुए केंद्र की तत्कालीन सरकारों के साथ बिहार के विकास के लिए किए गए प्रयासों का भी दावा किया। हालांकि, उनके ये दावे राजनीतिक संदर्भ में हैं और पोस्ट में उन्होंने मौजूदा बाढ़ संकट को लेकर अपनी मांगों को प्रमुखता से रखा।

2004 का जिक्र कर क्या बोले लालू यादव?

लालू यादव ने अपने पोस्ट में वर्ष 2004 का खास तौर पर उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उस समय राष्ट्रीय जनता दल के 24 सांसदों के साथ यूपीए-1 सरकार में रेल मंत्री बनने के बाद उन्होंने बिहार के विकास के लिए केंद्र से बड़ी राशि दिलाने का दावा किया। उनके मुताबिक, वर्ष 2004 से 2009 के बीच बिहार के विकास कार्यों के लिए करीब 1 लाख 44 हजार करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई। लालू ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी का भी अपने पोस्ट में उल्लेख किया। उन्होंने इस उदाहरण के जरिए यह बताने की कोशिश की कि राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल बिहार के विकास और आर्थिक संसाधनों के लिए किया जा सकता है।

नेपाल से आने वाली बाढ़ पर भी उठाया सवाल

लालू यादव ने बिहार में बाढ़ की समस्या को केवल राहत और बचाव तक सीमित न रखने की बात कही। उन्होंने नेपाल से आने वाली नदियों और बाढ़ के मुद्दे का जिक्र करते हुए स्थायी समाधान की जरूरत बताई। उन्होंने नदियों के रखरखाव को लेकर नेपाल सरकार के साथ स्पष्ट बातचीत की आवश्यकता जताई। लालू ने अपने पोस्ट में कर्पूरी ठाकुर के पुराने प्रयासों का भी उल्लेख किया और कहा कि यह मुद्दा लंबे समय से बिहार के लिए महत्वपूर्ण रहा है। बिहार की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए नेपाल से आने वाली नदियों का जलस्तर बढ़ना राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ का बड़ा कारण बनता है। ऐसे में नदी प्रबंधन और सीमापार समन्वय का मुद्दा हर बड़े बाढ़ संकट के दौरान चर्चा में आता है।

'भीख नहीं, क्रेडिट में पैसा दें'

लालू यादव ने केंद्र और राज्य सरकार के सामने आर्थिक सहायता को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बिहार किसी से भीख नहीं मांग रहा है, बल्कि राज्य को क्रेडिट में पैसा दिया जाना चाहिए। उन्होंने नदियों के रखरखाव पर खर्च को लेकर भी सवाल उठाया। लालू का दावा है कि इस मद में बिहार को पर्याप्त राशि नहीं मिली है। उनका तर्क है कि केवल बाढ़ आने के बाद राहत पहुंचाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए नदी प्रबंधन, तटबंधों की स्थिति, जल निकासी और बाढ़ प्रभावित इलाकों के दीर्घकालिक विकास पर लगातार निवेश जरूरी है।

CDR को लेकर भी लालू यादव का सवाल

अपने पोस्ट के आखिर में लालू यादव ने बिहार के CDR यानी Credit Deposit Ratio का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि बिहार का क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात कम क्यों है और राज्य को बैंकिंग व्यवस्था से पर्याप्त आर्थिक लाभ क्यों नहीं मिल रहा। क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो किसी क्षेत्र में बैंकों द्वारा जमा राशि के मुकाबले दिए गए कर्ज की स्थिति को दर्शाता है। किसी राज्य में यह अनुपात कम होने पर स्थानीय स्तर पर ऋण और निवेश की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ सकते हैं। लालू यादव ने इसी मुद्दे को बिहार की आर्थिक चुनौतियों से जोड़ते हुए केंद्र और वित्तीय संस्थानों के सामने सवाल खड़ा किया है।

बाढ़ के स्थायी समाधान पर बढ़ी राजनीतिक बहस

बिहार में बाढ़ का मुद्दा हर साल राहत, बचाव और मुआवजे से आगे बढ़कर स्थायी समाधान की मांग तक पहुंचता है। इस बार भी बाढ़ प्रभावित जिलों में प्रशासनिक स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। लालू यादव के ताजा बयान ने इस संकट को राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बना दिया है। उन्होंने सरकार से तत्काल राहत के साथ दीर्घकालिक योजना पर जोर देने की मांग की है। फिलहाल, बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत और बचाव कार्य सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसके साथ ही नदी प्रबंधन, नेपाल के साथ समन्वय और बाढ़ नियंत्रण के स्थायी उपायों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखने वाली बात होगी। 

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