बिहार बाढ़ पर तेजस्वी का PM मोदी को पत्र, रखीं 7 बड़ी मांगें
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बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। तेजस्वी यादव ने अपने पत्र में बिहार की बाढ़ को “राष्ट्रीय आपदा” घोषित करने के साथ 5 हजार करोड़ रुपये की तत्काल वित्तीय सहायता देने की मांग रखी है। उन्होंने केंद्र के सामने कुल सात सूत्री मांग पत्र पेश किया और प्रधानमंत्री से जल्द बिहार का दौरा कर बाढ़ पीड़ितों की स्थिति का जायजा लेने की अपील की। राजद नेता ने राज्य सरकार पर बाढ़ राहत में कथित लापरवाही का आरोप लगाया है। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री के बाढ़ प्रभावित इलाकों के हवाई सर्वेक्षण और राहत शिविरों के निरीक्षण का उल्लेख सामने आया है।
तेजस्वी यादव ने PM मोदी के सामने रखीं 7 मांगें
तेजस्वी यादव ने अपने पत्र में केंद्र सरकार से बिहार के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए तत्काल राहत और बचाव व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। उनकी सात प्रमुख मांगों में बिहार की विनाशकारी बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करना और राज्य को तत्काल 5 हजार करोड़ रुपये का विशेष बाढ़ राहत पैकेज देना शामिल है। इसके अलावा सड़क संपर्क से कट चुके इलाकों में अतिरिक्त नाव, बोट और जरूरी संसाधन भेजने की मांग की गई है। तेजस्वी ने बाढ़ राहत एवं बचाव अभियान में जरूरत वाले क्षेत्रों के लिए सेना और वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की सहायता सुनिश्चित करने की भी मांग की है। उनके मांग पत्र में प्रभावित लोगों के लिए भोजन, पेयजल, दवा, पशुचारा और अस्थायी आश्रय की पर्याप्त व्यवस्था करने की बात कही गई है।
किसानों और मजदूरों के लिए आर्थिक मदद की मांग
तेजस्वी यादव ने बाढ़ से प्रभावित किसानों, मजदूरों, पशुपालकों और परिवारों के लिए विशेष आर्थिक सहायता देने की मांग भी उठाई है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य की वित्तीय और आपदा-प्रबंधन तैयारियों की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग की। राज्य की आकस्मिक निधि के इस्तेमाल और लेन-देन की CAG जांच कराने की मांग भी पत्र में शामिल है।
बिहार सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर बाढ़ पीड़ितों की मदद में उदासीनता बरतने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आपदा के समय राहत कार्यों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध होना चाहिए था। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति खराब है और बाढ़ से पहले सामान्य सरकारी कार्यों के लिए आकस्मिक निधि से करीब 4 हजार करोड़ रुपये निकाले गए। तेजस्वी के मुताबिक, इसका असर अब बाढ़ राहत व्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित क्षेत्रों से राहत और सहायता को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। हालांकि, ये आरोप विपक्ष के नेता की ओर से लगाए गए हैं। इन दावों पर राज्य सरकार या संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष अलग से महत्वपूर्ण होगा।
मुख्यमंत्री के हवाई सर्वेक्षण पर भी साधा निशाना
तेजस्वी यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर लोगों को पर्याप्त राहत नहीं मिल रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री भी बिहार का दौरा करें और स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन करें। उनका कहना है कि बिहार में बड़ी आपदा के बीच केंद्र की ओर से व्यापक स्तर पर राहत सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। वहीं, मुख्यमंत्री की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण और राहत शिविरों का निरीक्षण किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में बाढ़ राहत को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिख रही है।
5 हजार करोड़ के पैकेज की मांग क्यों अहम?
बिहार में बड़े पैमाने पर बाढ़ आने की स्थिति में राहत और पुनर्वास के लिए भारी संसाधनों की जरूरत होती है। सड़क संपर्क टूटने वाले इलाकों में नाव, भोजन, दवा और पेयजल की व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। तेजस्वी यादव की 5 हजार करोड़ रुपये की मांग इसी व्यापक राहत जरूरत को ध्यान में रखकर रखी गई है। साथ ही उन्होंने सेना और वायुसेना की मदद की मांग करके दुर्गम इलाकों तक राहत पहुंचाने पर जोर दिया है। किसानों और पशुपालकों के लिए आर्थिक सहायता की मांग भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बाढ़ से फसल, पशुधन और आजीविका प्रभावित होने की आशंका रहती है।
अब केंद्र और राज्य सरकार के जवाब पर नजर
तेजस्वी यादव की सात सूत्री मांग के बाद अब केंद्र और बिहार सरकार की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। खासतौर पर राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और 5 हजार करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग पर केंद्र का रुख अहम माना जाएगा। दूसरी ओर, राज्य सरकार के सामने भी बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री और जरूरी सेवाएं तेजी से पहुंचाने की चुनौती है। बाढ़ के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रभावित परिवारों को कितनी जल्दी भोजन, दवा, पानी, आश्रय और आर्थिक सहायता मिलती है।