जमुई कांड पर प्रशांत किशोर का बड़ा हमला, बोले- वीडियो नहीं चलता तो?
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👉 WhatsApp से जुड़ेंजमुई मामले को लेकर बिहार की सियासत गरमा गई है। जमुई मामला सामने आने के बाद जन सुराज नेता प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। जमुई मामला सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद चर्चा में आया, जिसके बाद पुलिस ने घटना में आरोपियों के साथ-साथ नाबालिगों की पहचान उजागर करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी कार्रवाई शुरू की। पुलिस के मुताबिक करीब 120 प्रोफाइल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
प्रशांत किशोर ने वीडियो वायरल होने पर क्या कहा?
प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर घटना का वीडियो सामने नहीं आता तो आम लोगों को इस घटना की जानकारी कैसे मिलती। उन्होंने पुलिस-प्रशासन की उस कार्रवाई पर सवाल उठाया, जिसमें वीडियो शेयर करने वाले सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ भी कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।
अपने बयान में किशोर ने सरकार पर आरोप लगाया कि घटना का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ और अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने सरकार की महिला सुरक्षा नीति पर भी राजनीतिक टिप्पणी की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान का संदर्भ लेते हुए सरकार पर तंज कसा। यह प्रशांत किशोर का राजनीतिक बयान है, जबकि सरकार और पुलिस की ओर से सोशल मीडिया कार्रवाई के पीछे अलग कानूनी आधार बताया गया है।
सोशल मीडिया पर 120 प्रोफाइल पुलिस के रडार पर
जमुई साइबर थाना में वीडियो से संबंधित सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल को मामले में नामजद या जांच के दायरे में रखा गया है।
पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो में नाबालिग पीड़ितों की पहचान उजागर होने की वजह से सोशल मीडिया पर इसे शेयर या रीपोस्ट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। तीन सोशल मीडिया यूजर्स को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नाबालिग पीड़ितों की पहचान बताने वाली तस्वीर, वीडियो या अन्य सामग्री को सोशल मीडिया पर साझा न करें। अधिकारियों के अनुसार, पहचान उजागर करना कानून के तहत गंभीर मामला हो सकता है।
पुलिस की दलील: नाबालिग की पहचान उजागर करना अपराध
इस पूरे विवाद में पुलिस की कार्रवाई का मुख्य आधार नाबालिग पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा बताया गया है।
पुलिस के मुताबिक घटना से जुड़े वीडियो को बिना पहचान छिपाए प्रसारित करने से पीड़ितों की निजता और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से वीडियो को प्रसारित करने वाले अकाउंट्स की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय प्रोफाइल की पहचान शुरू की है। कुछ अकाउंट्स को नोटिस भी दिए गए हैं और आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जा रही है।
मूल जमुई घटना में भी जारी है जांच
मामला केवल सोशल मीडिया वीडियो तक सीमित नहीं है। 19 सितंबर को जमुई में दो नाबालिगों के साथ कथित बदसलूकी और छेड़छाड़ की घटना सामने आई थी।
पुलिस के मुताबिक दोनों छात्र कोचिंग से लौट रहे थे, तभी रास्ते में एक समूह ने उन्हें रोका और उनके साथ कथित तौर पर मारपीट तथा बदसलूकी की। घटना का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर सामने आया और तेजी से फैल गया।
इस मामले में पुलिस ने आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच तेज की है। एक विशेष जांच दल यानी SIT का गठन भी किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक शुरुआती कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
बाद की रिपोर्टों में मुख्य आरोपी नंदन यादव को पुलिस मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी अभियान के दौरान उसने भागने की कोशिश की थी।
बीजेपी और विपक्ष के बीच भी बढ़ी बयानबाजी
जमुई घटना के बाद बिहार में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। प्रशांत किशोर ने सरकार की कानून-व्यवस्था और सोशल मीडिया पर हो रही कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं।
वहीं, बीजेपी की ओर से भी विपक्षी नेताओं पर पलटवार किया गया है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि कुछ विपक्षी नेताओं और अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने वीडियो साझा करके नाबालिगों की पहचान सार्वजनिक होने की स्थिति पैदा की।
इस तरह मामले में दो अलग-अलग सवाल सामने आए हैं—पहला, मूल घटना में शामिल आरोपियों पर कार्रवाई और दूसरा, पीड़ित नाबालिगों की पहचान उजागर करने वाले कंटेंट के प्रसार पर कानूनी कार्रवाई।
वीडियो शेयर करने वालों पर कार्रवाई क्यों?
पुलिस का कहना है कि किसी नाबालिग पीड़ित की पहचान उजागर करने वाली सामग्री को प्रसारित करना उसकी निजता और सुरक्षा के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
इसी आधार पर पुलिस ने वीडियो को शेयर या रीपोस्ट करने वाले अकाउंट्स की जांच शुरू की है। उपलब्ध रिपोर्टों में पुलिस ने POCSO और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की बात कही है।
इस बीच, राजनीतिक नेताओं के बयान से मामला और व्यापक बहस का विषय बन गया है। प्रशांत किशोर का सवाल पुलिस की कार्रवाई और घटना के सामने आने के तरीके पर केंद्रित है, जबकि पुलिस का जोर नाबालिगों की पहचान सुरक्षित रखने पर है।
जमुई मामले में अब तक क्या हुआ?
- 19 सितंबर को दो नाबालिगों से कथित बदसलूकी की घटना सामने आई।
- घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ।
- पुलिस ने मूल घटना की जांच के लिए SIT गठित की।
- शुरुआती कार्रवाई में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई।
- सोशल मीडिया पर पीड़ितों की पहचान उजागर करने वाले अकाउंट्स पर भी कार्रवाई शुरू हुई।
- करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पुलिस की जांच के दायरे में बताए गए हैं।
- प्रशांत किशोर ने सरकार की कार्रवाई और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।
- पुलिस ने लोगों से नाबालिग पीड़ितों की पहचान वाली सामग्री शेयर नहीं करने की अपील की।
फिलहाल जमुई मामले की जांच जारी है। मूल घटना में शामिल अन्य संदिग्धों की भूमिका और सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित करने वाले अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई—दोनों पहलुओं पर पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है।
