समस्तीपुर में मेडिकल स्टोर पर अब CCTV की नजर, दवा बिक्री होगी रिकॉर्ड
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👉 WhatsApp से जुड़ेंसमस्तीपुर में मेडिकल स्टोर CCTV व्यवस्था को लेकर निगरानी सख्त करने की तैयारी है। मेडिकल स्टोर CCTV के जरिए दवा बिक्री की प्रक्रिया रिकॉर्ड करने और फुटेज सुरक्षित रखने की व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य बिना पर्ची एंटीबायोटिक, नशीली और नियंत्रित दवाओं की बिक्री पर नजर रखना है। जिले में करीब दो हजार लाइसेंस प्राप्त दवा दुकानों का उल्लेख स्थानीय रिपोर्ट में किया गया है।
केंद्रीय स्तर पर CDSCO ने 8 सितंबर 2026 को Drugs Rules, 1945 में बिक्री परिसर पर CCTV निगरानी व्यवस्था से संबंधित एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन प्रकाशित किया है।
मेडिकल स्टोर में CCTV क्यों जरूरी किया जा रहा है?
नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य दवा की बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है। खासकर ऐसी दवाओं की बिक्री पर निगरानी रखने की जरूरत बताई जा रही है, जिनका इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह और निर्धारित नियमों के तहत होना चाहिए।
रिटेल फार्मेसी में ग्राहक को दवा देने वाले स्थान पर कैमरा लगाने से बिक्री की प्रक्रिया रिकॉर्ड की जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसी संबंधित फुटेज देखकर बिक्री से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर सकेगी।
स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की जानकारी के अनुसार, जिन मेडिकल स्टोर में पहले से CCTV लगा है, वहां व्यवस्था को निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप रखने की जरूरत होगी। जिन दुकानों में कैमरे नहीं हैं, उन्हें व्यवस्था स्थापित करनी होगी।
90 दिन तक सुरक्षित रखनी होगी रिकॉर्डिंग
प्रस्तावित व्यवस्था में CCTV रिकॉर्डिंग को कम से कम 90 दिनों तक सुरक्षित रखने की बात सामने आई है। इसका मतलब यह है कि मेडिकल स्टोर संचालकों को केवल कैमरा लगाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि रिकॉर्डिंग को निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखना भी जरूरी होगा।
जांच के दौरान ड्रग इंस्पेक्टर संबंधित मेडिकल स्टोर की फुटेज मांग सकते हैं। इससे किसी खास दवा की बिक्री, बिक्री का समय और काउंटर पर हुई प्रक्रिया की जांच में मदद मिल सकती है।
अगर किसी दुकान में दवा बिक्री से संबंधित अनियमितता सामने आती है, तो उपलब्ध CCTV फुटेज जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकता है। हालांकि, कार्रवाई संबंधित कानून और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होगी।
एंटीबायोटिक और नशीली दवाओं पर खास नजर
नई निगरानी व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य ऐसी दवाओं के अनधिकृत इस्तेमाल को रोकना है, जिनकी बिक्री पर विशेष नियम लागू होते हैं।
खास तौर पर Schedule H, H1 और X जैसी श्रेणियों की दवाओं की बिक्री को लेकर रिकॉर्ड और निगरानी महत्वपूर्ण हैं। इन श्रेणियों में कई ऐसी दवाएं आती हैं, जिनकी बिक्री सामान्य ओवर-द-काउंटर दवाओं की तरह नहीं की जानी चाहिए।
बिना चिकित्सकीय सलाह एंटीबायोटिक लेने की आदत से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी समस्या बढ़ सकती है। वहीं नियंत्रित या आदत डालने वाली दवाओं का गलत इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
CCTV व्यवस्था से दुकानदार और बिक्री प्रक्रिया की जवाबदेही बढ़ाने का उद्देश्य है।
समस्तीपुर में करीब 2 हजार मेडिकल स्टोर
जिला ड्रग इंस्पेक्टर शंभूनाथ ठाकुर के अनुसार, समस्तीपुर जिले में करीब दो हजार लाइसेंस प्राप्त दवा दुकानें हैं। इनमें कुछ दुकानों में पहले से CCTV कैमरे लगे हुए हैं।
अब जिन रिटेल मेडिकल स्टोर में यह व्यवस्था नहीं है, वहां भी निर्धारित प्रावधान के अनुसार CCTV लगाने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय रिपोर्ट में इसे जिले के सभी रिटेल फार्मेसी प्रतिष्ठानों से जोड़कर बताया गया है।
इससे जिले में दवा कारोबार की निगरानी का दायरा बढ़ सकता है। विभाग को उम्मीद है कि बिक्री की रिकॉर्डिंग उपलब्ध रहने से नियमों के उल्लंघन की जांच करना आसान होगा।
थोक दुकानों और रिटेल स्टोर में क्या अंतर?
यह व्यवस्था मुख्य रूप से उन रिटेल फार्मेसियों से संबंधित बताई जा रही है, जहां आम ग्राहक सीधे दवा खरीदते हैं।
यानी किसी ग्राहक को दवा बेचने की प्रक्रिया CCTV के दायरे में लाने पर जोर है। थोक दवा कारोबार के लिए यही व्यवस्था लागू है या नहीं, यह संबंधित अंतिम अधिसूचना और उसके दायरे पर निर्भर करेगा।
यहां यह समझना जरूरी है कि 8 सितंबर 2026 को CDSCO की वेबसाइट पर उपलब्ध दस्तावेज ड्राफ्ट नोटिफिकेशन है। इसलिए अंतिम कानूनी प्रावधानों में बदलाव संभव है।
दवा दुकानदारों पर बढ़ेगी जिम्मेदारी
CCTV लगने के बाद मेडिकल स्टोर संचालकों की जिम्मेदारी केवल दवा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि निगरानी प्रणाली ठीक तरह से काम करे और निर्धारित अवधि तक रिकॉर्डिंग उपलब्ध रहे।
जांच के समय फुटेज मांगे जाने पर संबंधित दुकानदार को नियमों के अनुसार उसे उपलब्ध कराना पड़ सकता है। इससे दवा बिक्री से जुड़ी शिकायतों और अनियमितताओं की जांच में डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल बढ़ सकता है।
हालांकि, किसी दुकान के खिलाफ कार्रवाई केवल CCTV फुटेज की मौजूदगी या अनुपस्थिति से स्वतः तय नहीं होगी। संबंधित नियम, निरीक्षण और मामले के तथ्यों के आधार पर विभागीय कार्रवाई होगी।
मरीजों की सुरक्षा पर क्या पड़ेगा असर?
दवाओं की बिक्री में निगरानी बढ़ने का सीधा उद्देश्य मरीजों तक सही दवा और सही तरीके से पहुंच सुनिश्चित करना है। खासकर ऐसी दवाओं में सावधानी जरूरी है जिनके गलत इस्तेमाल से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
CCTV व्यवस्था अकेले दवा के गलत इस्तेमाल की समस्या खत्म नहीं कर सकती। इसके साथ डॉक्टर की सलाह, फार्मासिस्ट की जिम्मेदारी, रिकॉर्ड मेंटेनेंस और ड्रग इंस्पेक्शन जैसी व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण रहेंगी।
मेडिकल स्टोर संचालकों के लिए प्रमुख बातें
- रिटेल मेडिकल स्टोर में बिक्री क्षेत्र की CCTV निगरानी पर जोर।
- दवा बिक्री की स्पष्ट रिकॉर्डिंग रखने की व्यवस्था।
- स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार फुटेज 90 दिन तक सुरक्षित रखने की बात।
- जांच के दौरान ड्रग इंस्पेक्टर फुटेज मांग सकते हैं।
- एंटीबायोटिक और नियंत्रित दवाओं की बिक्री पर विशेष निगरानी।
- समस्तीपुर में करीब 2,000 लाइसेंस प्राप्त दवा दुकानों का उल्लेख।
- CCTV संबंधी केंद्रीय दस्तावेज 8 सितंबर 2026 को ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के रूप में प्रकाशित हुआ है।
समस्तीपुर में इस व्यवस्था के लागू होने से दवा बिक्री की निगरानी डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए मजबूत होने की उम्मीद है। हालांकि अंतिम कानूनी स्थिति और सभी तकनीकी शर्तों के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय/CDSCO की अंतिम अधिसूचना को आधार माना जाएगा।
