लालू CM, देवगौड़ा PM थे, तब हुई फरक्का जल संधि; विजय चौधरी ने उठाया बड़ा मुद्दा

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बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच फरक्का जल संधि को लेकर जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि बिहार के लिए कई मुश्किलें खड़ी करने वाली साबित हुई है। विजय चौधरी ने याद दिलाया कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच यह जल संधि हुई थी, उस समय बिहार में लालू प्रसाद यादव मुख्यमंत्री थे और केंद्र में एच. डी. देवगौड़ा प्रधानमंत्री थे।

मंत्री ने यह बयान 7 सितंबर 2026 को पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया। इस दौरान उन्होंने राज्य में बाढ़ की मौजूदा स्थिति, गंगा के जलस्तर और फरक्का बैराज से जुड़ी बिहार की चिंताओं पर विस्तार से बात की।

बिहार में अभी भी गंभीर बनी हुई है बाढ़ की स्थिति

विजय चौधरी ने कहा कि बिहार में बाढ़ की स्थिति फिलहाल गंभीर बनी हुई है। हालांकि पटना में गंगा का जलस्तर पिछले 24 घंटे के दौरान घटा है, लेकिन भागलपुर और सुल्तानगंज में पानी का स्तर अभी स्थिर बना हुआ है।

उन्होंने साफ कहा कि जब तक गंगा, पुनपुन और दरधा जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर नीचे नहीं आता, तब तक राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ का खतरा बना रहेगा।

मंत्री के मुताबिक इस बार बिहार में बाढ़ का पैटर्न भी सामान्य से अलग दिखाई दे रहा है। आमतौर पर नेपाल से आने वाली नदियों में पहले उफान आता है और इसके बाद सितंबर के आसपास गंगा का जलस्तर बढ़ता है।

लेकिन इस बार गंगा में अपेक्षाकृत पहले ही बाढ़ की स्थिति बन गई, जिससे राज्य के सामने चुनौती बढ़ गई है।

फरक्का संधि पर विजय चौधरी ने क्या कहा?

फरक्का बैराज और भारत-बांग्लादेश जल समझौते का मुद्दा उठाते हुए विजय चौधरी ने कहा कि गंगा में लगातार बढ़ रही गाद बिहार की समस्याओं को और गंभीर बना रही है।

उनका कहना है कि फरक्का से जुड़ी व्यवस्था और गंगा में गाद के कारण नदी के प्रवाह तथा जल निकासी पर असर पड़ता है। इसका प्रभाव बिहार में बाढ़ की स्थिति पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि 1996 में जब भारत और बांग्लादेश के बीच जल संधि हुई थी, उस समय लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री और एच. डी. देवगौड़ा देश के प्रधानमंत्री थे।

विजय चौधरी ने इस मुद्दे को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखने के बजाय बिहार के हित से जोड़ने की अपील की।

संधि के नवीनीकरण में बिहार के हित का ध्यान जरूरी

विजय चौधरी ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच फरक्का समझौते के नवीनीकरण के दौरान बिहार के हितों को विशेष प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस विषय पर राज्य के हित में एकजुट होकर आवाज उठाएं।

उनके मुताबिक बिहार लंबे समय से गंगा में गाद और बाढ़ की समस्या का सामना करता रहा है। ऐसे में भविष्य में जल समझौतों और नदी प्रबंधन से जुड़े फैसले लेते समय राज्य पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना जरूरी है।

यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि गंगा बिहार के कई जिलों से होकर गुजरती है और इसके जलस्तर में बदलाव का सीधा असर बड़े इलाके पर पड़ता है।

बाढ़ का पैटर्न बदलने से बढ़ी चुनौती

जल संसाधन मंत्री ने इस बार की बाढ़ की प्रकृति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में बिहार में बाढ़ का क्रम अलग दिखाई देता है।

पहले नेपाल से आने वाली नदियों में पानी बढ़ता है और उसके बाद गंगा में जलस्तर बढ़ने की स्थिति बनती है। इस बार गंगा में पहले ही उफान आने से बाढ़ प्रबंधन की चुनौती अलग तरह की हो गई है।

वर्तमान में पटना में गंगा का पानी घटने का संकेत जरूर मिला है, लेकिन भागलपुर और सुल्तानगंज में स्थिति स्थिर है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की निगाह लगातार प्रमुख नदियों के जलस्तर पर बनी हुई है।

विधान परिषद की सीटों पर भी विजय चौधरी ने दिया बयान

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विजय चौधरी ने बिहार विधान परिषद की आठ सीटों को लेकर भी प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि एनडीए में आपसी सहमति के आधार पर सीटों का फैसला किया जाएगा। विजय चौधरी ने दावा किया कि एनडीए सभी आठ सीटों पर जीत हासिल करेगा।

जदयू में नाराजगी की चर्चाओं पर भी उन्होंने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पार्टी में किसी तरह की नाराजगी नहीं है और जदयू पूरी तरह एकजुट है।

इस बयान के जरिए उन्होंने संगठन के भीतर किसी मतभेद की अटकलों को खारिज किया और एनडीए की चुनावी रणनीति पर भरोसा जताया।

बिहार के लिए क्यों अहम है फरक्का का मुद्दा?

फरक्का बैराज और गंगा में गाद का मुद्दा बिहार के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। राज्य में बाढ़ के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने और पानी की निकासी से जुड़े सवाल अक्सर चर्चा में आते रहे हैं।

विजय चौधरी का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब बिहार के कई हिस्से बाढ़ के प्रभाव का सामना कर रहे हैं। इसलिए फरक्का समझौते के नवीनीकरण में बिहार के हितों को शामिल करने की उनकी मांग राजनीतिक और जल प्रबंधन दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अब देखना होगा कि भविष्य में फरक्का समझौते को लेकर केंद्र और संबंधित पक्षों के स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं और बिहार की चिंताओं को किस तरह इसमें शामिल किया जाता है।

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