सत्य निकेतन हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, हॉस्टल सुरक्षा पर मांगा जवाब
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👉 WhatsApp से जुड़ेंदिल्ली के सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्रों की हॉस्टल सुविधा और सुरक्षा का मुद्दा दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। सत्य निकेतन हादसे को लेकर दाखिल नई जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में DU के सभी कॉलेजों में छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि छात्रों को सुरक्षित और पर्याप्त आवास नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी पीजी और हॉस्टल में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ऐसे भवनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
हाईकोर्ट ने केंद्र, DU और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब
दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के अधीन आने वाले सभी कॉलेजों में छात्रों के लिए हॉस्टल की पर्याप्त व्यवस्था हो।
याचिका में छात्रों के लिए सुरक्षित आवास को जरूरी बताते हुए कहा गया है कि विश्वविद्यालय की ओर से पर्याप्त हॉस्टल उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को असुरक्षित या मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले निजी आवासों पर निर्भरता कम हो सकती है।
हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने कहा है कि इस मामले की सुनवाई मुख्य मामले के साथ की जाएगी।
मामले में अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
छात्रों की सुरक्षा को लेकर उठे कई बड़े सवाल
सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद दिल्ली में छात्रों के आवास की सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है।
दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले बड़ी संख्या में विद्यार्थी हॉस्टल की सीमित उपलब्धता के कारण निजी पीजी, किराये के कमरे और अन्य आवासीय विकल्पों का सहारा लेते हैं।
याचिका में इसी व्यवस्था से जुड़े सुरक्षा पहलुओं पर ध्यान देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता के मुताबिक छात्रों के लिए सिर्फ रहने की जगह उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भवन की संरचनात्मक सुरक्षा और अन्य जरूरी मानकों की भी नियमित निगरानी होनी चाहिए।
ABVP ने नॉर्थ कैंपस में निकाली ‘न्याय यात्रा’
सत्य निकेतन हादसे के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने मंगलवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में ‘न्याय यात्रा’ का आयोजन किया।
संगठन ने हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों के लिए न्याय की मांग उठाई। इसके साथ ही दिल्ली में छात्रों के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया गया।
ABVP ने मांग की कि दिल्ली में पीजी और हॉस्टल की सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। संगठन का तर्क है कि यदि सुरक्षा ऑडिट की जानकारी सार्वजनिक होगी तो छात्रों को आवास चुनते समय संबंधित भवन की सुरक्षा स्थिति के बारे में बेहतर जानकारी मिल सकेगी।
इस मांग का उद्देश्य छात्रों और उनके परिवारों को आवास की सुरक्षा को लेकर अधिक पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराना है।
DU छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल की भी मांग
ABVP ने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए हॉस्टल की संख्या बढ़ाने की मांग भी की है।
संगठन का दावा है कि विश्वविद्यालय में उपलब्ध हॉस्टल सीमित होने के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को निजी पीजी और किराये के आवासों पर निर्भर रहना पड़ता है।
संगठन ने कहा कि सभी हॉस्टल और पीजी की नियमित सुरक्षा जांच होनी चाहिए। जो भवन निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करते हैं, उनके खिलाफ समय रहते कार्रवाई की जानी चाहिए।
मांग यह भी है कि सुरक्षा व्यवस्था हादसा होने के बाद सक्रिय होने के बजाय पहले से मजबूत की जाए, ताकि किसी बड़े नुकसान की स्थिति बनने से पहले खामियों को दूर किया जा सके।
6 सितंबर को ढही थी सत्य निकेतन की इमारत
सत्य निकेतन में 6 सितंबर को एक इमारत ढह गई थी। हादसे के बाद राहत और बचाव के लिए कई एजेंसियां मौके पर पहुंचीं।
NDRF, दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर बचाव अभियान चलाया। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।
इस हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। घटना के बाद से ही इमारतों की सुरक्षा, निर्माण मानकों और छात्रों के आवास की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
आगे क्या होगा?
दिल्ली हाईकोर्ट की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी। अब केंद्र सरकार, दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली सरकार की ओर से अदालत में अपना जवाब दाखिल किया जाना है।
मामले की सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण होगा कि छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधा बढ़ाने और निजी पीजी व हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अदालत के सामने क्या पक्ष रखा जाता है।
सत्य निकेतन हादसे ने राजधानी में छात्रों के आवास और भवन सुरक्षा से जुड़े मुद्दे को एक बार फिर प्रमुखता से सामने ला दिया है। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही से इस मामले में आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।
