बिहार में सुरक्षा पर चिराग का बड़ा बयान, जन सुराज ने सम्राट को घेरा
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बिहार में सुरक्षा को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने हाल की घटनाओं के संदर्भ में कहा कि आज की तारीख में बिहार में कोई सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है। बिहार में सुरक्षा को लेकर चिराग के इस बयान के बाद जन सुराज ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को निशाने पर लिया है। जन सुराज के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ सिंह ने चिराग पासवान के बयान को लेकर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री अपने ही दल और गठबंधन से जुड़े नेताओं की बात सुन लें, तो उन्हें राज्य की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी मिल सकती है।
चिराग पासवान ने बिहार की सुरक्षा पर क्या कहा?
चिराग पासवान ने हाल में बिहार में सामने आई घटनाओं को लेकर चिंता जताई। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि राज्य में लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं और यह सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय है। चिराग ने यह भी कहा कि वह खुद सरकार में सहयोगी हैं, इसलिए इस सवाल से बच नहीं सकते। उन्होंने मौजूदा घटनाओं पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार को नागरिकों में सुरक्षा की भावना सुनिश्चित करनी चाहिए। उनके बयान में खास तौर पर महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंता दिखाई दी। चिराग ने कहा कि ऐसी घटनाओं को हल्के में नहीं लिया जा सकता और बिहार की छवि पर भी इसका असर पड़ता है।
जन सुराज ने सम्राट चौधरी को घेरा
चिराग पासवान के बयान के बाद जन सुराज ने इसे बिहार की कानून-व्यवस्था के मुद्दे से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधा। जन सुराज के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ सिंह ने अपने पोस्ट में एनडीए से जुड़े नेताओं के अलग-अलग बयानों का उल्लेख किया। उनका तर्क था कि सरकार के अपने सहयोगी और नेता यदि सुरक्षा तथा प्रशासन को लेकर सवाल उठा रहे हैं, तो इन बयानों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। कुमार सौरभ सिंह ने चिराग पासवान के अलावा बीजेपी के राज्यसभा सांसद शंभू शरण पटेल और बीजेपी विधायक विनय बिहारी के बयानों का भी जिक्र किया। जन सुराज ने इन बयानों के जरिए यह सवाल उठाया कि बिहार की मौजूदा कानून-व्यवस्था को लेकर एनडीए के भीतर से उठ रही आवाजों पर सरकार की क्या प्रतिक्रिया है। हालांकि, ये सभी राजनीतिक दलों और नेताओं के सार्वजनिक बयान हैं, जिनकी अपनी राजनीतिक व्याख्या भी हो सकती है।
शंभू शरण पटेल ने भी उठाए सवाल
बीजेपी के राज्यसभा सांसद शंभू शरण पटेल ने भी बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में पुलिस व्यवस्था कमजोर हुई है और उन्होंने दावा किया कि किसी लड़की के साथ घटना होने पर एसपी तक फोन नहीं उठाते। शंभू शरण पटेल ने कथित तौर पर कहा कि मौजूदा सरकार का ‘इकबाल खत्म’ हो गया है। उन्होंने 2005 के बाद के एनडीए शासन का हवाला देते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति की तुलना भी की। यह ध्यान रखना जरूरी है कि पुलिस व्यवस्था और सरकार के कामकाज को लेकर सांसद द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक बयान हैं। इनके अलग-अलग हिस्सों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की जा रही है।
विनय बिहारी के बयान का भी किया गया जिक्र
जन सुराज के प्रवक्ता ने बीजेपी विधायक विनय बिहारी के एक बयान का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके बयान में सरकार की वित्तीय स्थिति और चुनाव के दौरान कथित खर्च को लेकर सवाल उठाए गए थे। इस तरह चिराग पासवान, शंभू शरण पटेल और विनय बिहारी के अलग-अलग बयानों को एक साथ रखते हुए जन सुराज ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की है। हालांकि, इन नेताओं के बयान अलग-अलग संदर्भों में दिए गए बताए जा रहे हैं। इसलिए इन्हें एक ही मुद्दे पर सरकार के खिलाफ संयुक्त रुख के रूप में देखना जरूरी नहीं है।
बिहार में कानून-व्यवस्था पर बढ़ी राजनीतिक बहस
बिहार में हाल की आपराधिक घटनाओं के बाद कानून-व्यवस्था राजनीतिक चर्चा का प्रमुख मुद्दा बन गई है। सत्तापक्ष से जुड़े कुछ नेताओं की ओर से भी सार्वजनिक रूप से चिंता जताए जाने के बाद विपक्षी और गैर-एनडीए दलों को सरकार पर हमला करने का मुद्दा मिला है। चिराग पासवान का बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उनकी पार्टी एनडीए सरकार की सहयोगी है। ऐसे में सरकार के सहयोगी दल के प्रमुख नेता की ओर से सुरक्षा को लेकर चिंता जताना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। दूसरी ओर, जन सुराज ने इस बयान को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर सीधे सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल किया है। पार्टी ने एनडीए के भीतर से सामने आए अन्य बयानों का हवाला देकर सरकार से कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था पर जवाब मांगा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में कितना आगे बढ़ता है, यह सरकार की प्रतिक्रिया और राज्य में कानून-व्यवस्था से जुड़े अगले घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।