नेपाल की बारिश से गंडक उफान पर, उत्तर बिहार में बाढ़ का कहर
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नेपाल में भारी बारिश के बाद गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। गंडक नदी के उफान से पश्चिम चंपारण के बगहा शहर समेत कई निचले इलाकों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। पश्चिम चंपारण के 10 प्रखंडों के दियारा क्षेत्रों में सैकड़ों घर प्रभावित हुए हैं। वहीं बागमती और कोसी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने पूर्वी चंपारण, मधुबनी, दरभंगा, सुपौल और सहरसा के कई गांवों में भी चिंता बढ़ा दी है। वाल्मीकिनगर गंडक बराज से रविवार की रात 12 बजे करीब 5.29 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जल संसाधन विभाग ने चंपारण से वैशाली तक तटबंधों की लगातार निगरानी के लिए अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट रहने का निर्देश दिया है।
12 घंटे में गंडक का जलस्राव 1.05 लाख क्यूसेक बढ़ा
वाल्मीकिनगर बराज पर रविवार सुबह 11 बजे करीब 4.24 लाख क्यूसेक जलस्राव दर्ज किया गया था। इसके बाद महज 12 घंटे में जलस्राव बढ़कर 5.29 लाख क्यूसेक हो गया। इस तरह करीब 1.05 लाख क्यूसेक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वर्ष 2024 में भी गंडक का जलस्राव 5.62 लाख क्यूसेक तक पहुंच चुका था। गंडक नदी डुमरियाघाट में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसके अलावा कोसी बलतारा, बागमती ढेंग, सोनाखान, कटौंझा और बेनीबाद तथा लालबकिया गोवाबारी में भी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बताया गया है।
बगहा के कई इलाकों में घुसा बाढ़ का पानी
पश्चिम चंपारण में गंडक के बढ़ते जलस्तर का असर सबसे ज्यादा दियारा और निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। वाल्मीकिनगर, बगहा-2, बगहा-1, पिपरासी, मधुबनी, ठकराहा, भितहा, योगापट्टी, बैरिया और नौतन के दियारा क्षेत्र में सैकड़ों घरों में पानी पहुंच गया है। बगहा शहर में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। बगहा-वाल्मीकिनगर सड़क के कुछ हिस्से पानी में डूब गए हैं, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। मधुबनी प्रखंड के चिऊरही के रवहिया इलाके में पानी बढ़ने के बाद कई लोग सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर चले गए हैं। प्रशासन और स्थानीय स्तर पर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
VTR में पानी फैलने से वन्यजीवों की बढ़ी परेशानी
गंडक के बढ़ते पानी का असर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) क्षेत्र में भी दिखाई दे रहा है। जंगल के कुछ हिस्सों में पानी फैलने के कारण वन्यजीवों के अपने सामान्य क्षेत्र से बाहर आने की स्थिति बनी है। स्थानीय स्तर पर लोग वन्यजीवों की गतिविधियों को लेकर भी सतर्क हैं। बाढ़ की स्थिति में जंगल और आसपास के ग्रामीण इलाकों के बीच आवाजाही बढ़ने से चुनौती और बढ़ सकती है। पूर्वी चंपारण के अरेराज प्रखंड के तटवर्ती इलाकों में भी खेतों में पानी फैलना शुरू हो गया है। वहीं भिसवा-मझौरा सड़क पर पानी चढ़ने की सूचना है।
कोसी और बागमती ने भी बढ़ाई चिंता
गंडक के साथ-साथ कोसी और बागमती का जलस्तर बढ़ने से उत्तर बिहार के कई अन्य जिलों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कोसी बराज से रविवार को करीब 2.23 लाख क्यूसेक पानी गुजरा। इसका असर सुपौल और सहरसा के तटबंध के अंदर बसे इलाकों में दिखाई दे रहा है। सुपौल के किशनपुर और सरायगढ़ क्षेत्रों में कोसी का पानी परेशानी बढ़ा रहा है। दरभंगा के किरतपुर प्रखंड के करीब आधा दर्जन गांवों में भी बाढ़ का पानी फैल गया है। भारत-नेपाल सीमा पर सोनबरसा-मलंगवा मार्ग में चेकपोस्ट के पास नो-मेंस लैंड क्षेत्र में करीब तीन फीट पानी बहने की जानकारी सामने आई है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, सुपौल और पश्चिम चंपारण के 11 प्रखंडों की करीब 82 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित है।
गोपालगंज और सारण में भी बढ़ा बाढ़ का खतरा
गंडक के बढ़ते जलस्तर का असर गोपालगंज और सारण में भी दिखाई देने लगा है। गोपालगंज सदर प्रखंड के कई गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। खाप मकसूदपुर, जागिरी टोला, मेंहदिया और रामनगर के कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं। डुमरियाघाट में गंडक नदी खतरे के निशान से करीब 22 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। सारण के मकेर प्रखंड में लगुनिया, बाघाकोल पोखरा, हैजलपुर और नौकाडा समेत करीब दर्जनभर गांव पानी से घिर गए हैं। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
तटबंधों की निगरानी के लिए 24 घंटे अलर्ट
गंडक में तेजी से बढ़े जलस्राव को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने क्षेत्रीय पदाधिकारियों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया है। चंपारण से वैशाली जिले तक तटबंधों की निगरानी पर विशेष जोर दिया गया है। बाढ़ की स्थिति में तटबंधों की सुरक्षा, पानी के बहाव और निचले इलाकों में जलभराव पर लगातार नजर रखना महत्वपूर्ण है। लोगों से भी नदी और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की अपील की जा रही है। फिलहाल गंडक, कोसी और बागमती के जलस्तर पर नजर बनी हुई है। नेपाल में बारिश और बराज से छोड़े जाने वाले पानी के कारण उत्तर बिहार के कई जिलों में आने वाले समय में स्थिति बदल सकती है।