दीपक प्रकाश का विपक्ष पर हमला, SIR और जमुई मामले पर दिया जवाब, 'अपने गिरेबान में झांके'

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बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश ने चुनाव आयोग के SIR स्पष्टीकरण को लेकर विपक्ष के सवालों पर प्रतिक्रिया दी है। दीपक प्रकाश ने कहा कि चुनाव आयोग ने अपने स्तर से स्थिति स्पष्ट कर दी है और अब यदि विपक्ष को किसी बात पर संदेह है तो वह उपलब्ध संवैधानिक और न्यायिक रास्तों का इस्तेमाल कर सकता है। उन्होंने बिहार की कानून-व्यवस्था और जमुई की नाबालिग पीड़िता की तस्वीर साझा किए जाने को लेकर चल रहे विवाद पर भी अपनी बात रखी।

चुनाव आयोग ने 27 सितंबर को जारी अपने स्पष्टीकरण में कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े सभी अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की पूर्ण सहमति और सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

SIR पर चुनाव आयोग की सफाई के बाद क्या बोले दीपक प्रकाश?

चुनाव आयोग में कथित आंतरिक मतभेद को लेकर पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक बहस चल रही थी। इसी बीच आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR से जुड़े फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।

मंत्री दीपक प्रकाश ने आयोग के इस बयान का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आयोग ने अपने स्तर पर सभी मुद्दों को स्पष्ट कर दिया है और अब भ्रम की स्थिति नहीं रहनी चाहिए।

इस पूरे विवाद में विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए हैं। दीपक प्रकाश ने इन सवालों पर कहा कि यदि विपक्ष को अभी भी किसी बात पर संदेह है तो वह आगे उपलब्ध कानूनी रास्ते अपना सकता है।

उनके अनुसार, विपक्ष चाहे तो हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के सवालों पर क्या कहा?

दीपक प्रकाश ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से उठाए जा रहे सवालों का भी जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है। यदि इसके बावजूद विपक्ष अपनी आपत्तियों पर कायम है तो उसके पास न्यायिक और संवैधानिक मंचों पर जाने का विकल्प मौजूद है।

यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण उसका आधिकारिक पक्ष है, जबकि विपक्ष की ओर से उठाए गए सवाल और आरोप अलग राजनीतिक दावे हैं। दोनों पक्षों की बातों को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

बिहार की कानून-व्यवस्था पर भी बोले मंत्री

बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर पूछे गए सवाल पर दीपक प्रकाश ने कहा कि शासन और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है।

गैराज ऑपरेटर की हत्या समेत आपराधिक घटनाओं को लेकर उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं दुखद हैं और सरकार की ओर से कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने प्रशासन द्वारा मामलों में सख्ती से कार्रवाई करने की बात कही।

हालांकि, कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार के दावों और विपक्ष की आलोचनाओं के बीच राजनीतिक बहस अलग-अलग घटनाओं के आधार पर जारी है। ऐसे मामलों में किसी व्यापक निष्कर्ष के लिए आधिकारिक अपराध आंकड़ों और जांच की स्थिति को देखना जरूरी होता है।

जमुई की नाबालिग पीड़िता की तस्वीर पर क्या बोले?

जमुई मामले में नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा किए जाने को लेकर विवाद हुआ।

रिपोर्टों के मुताबिक तस्वीर मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट हुई और बाद में हटा दी गई। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि तस्वीर से नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर होने का खतरा पैदा हुआ और POCSO कानून के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ।

दीपक प्रकाश ने इस विवाद पर विपक्ष के नेताओं से पहले अपने कार्यकाल और पिछली सरकार के समय की कानून-व्यवस्था को देखने की बात कही। उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक तौर पर पलटवार करते हुए कहा कि उसे पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।

इस मामले में बाद में मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आई। पुलिस शिकायत में POCSO Act की धारा 23 समेत अन्य कानूनी प्रावधानों का उल्लेख किया गया।

जमुई मामले में POCSO विवाद क्यों अहम है?

POCSO कानून में नाबालिग पीड़ित की पहचान की सुरक्षा को लेकर विशेष प्रावधान हैं। इसलिए किसी फोटो, वीडियो या अन्य जानकारी से पहचान उजागर होने के आरोपों की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत महत्वपूर्ण हो जाती है।

जमुई मामले में विपक्ष ने मुख्यमंत्री पर सीधे आरोप लगाए हैं, जबकि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार तस्वीर पोस्ट होने के बाद उसे हटा दिया गया और बाद में कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इसलिए आरोप, एफआईआर और अंतिम कानूनी निष्कर्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है।

SIR और जमुई विवाद से बिहार की राजनीति में क्या बदला?

एक तरफ चुनाव आयोग के SIR स्पष्टीकरण के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। दूसरी तरफ जमुई मामले में नाबालिग की पहचान और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर कानूनी सवाल उठे हैं।

दीपक प्रकाश ने दोनों मुद्दों पर सरकार और चुनाव आयोग के पक्ष का समर्थन करते हुए विपक्ष के सवालों का राजनीतिक जवाब दिया है। वहीं विपक्ष इन मामलों को लेकर अपनी आपत्तियां सार्वजनिक रूप से उठा रहा है।

फिलहाल SIR पर चुनाव आयोग का आधिकारिक रुख यह है कि अंतिम निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए। जमुई मामले में तस्वीर हटाए जाने के बाद कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की रिपोर्ट भी सामने आ चुकी है। आगे की स्थिति संबंधित कानूनी और संस्थागत प्रक्रियाओं से तय होगी।

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