बिहार पंचायत चुनाव पर बड़ा अपडेट: परिसीमन के बाद ही होगा चुनाव
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार पंचायत चुनाव को लेकर सोमवार को बड़ा अपडेट सामने आया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि आगामी पंचायत चुनाव नए परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कराए जाएंगे। पटना में आयोजित ‘ग्राम संसद, बिहार चैप्टर’ कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ ग्रामीण विकास, वित्तीय संसाधन, आधारभूत संरचना और ग्राम कचहरी से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया पर काम कर रहा है।
इस घोषणा के बाद मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद से जुड़े संभावित उम्मीदवारों के बीच चुनाव की तैयारियों को लेकर नई स्थिति बनी है। हालांकि, अभी चुनाव की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।
परिसीमन पूरा होने के बाद होगा पंचायत चुनाव
ग्राम संसद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि पंचायतों का नया परिसीमन पूरा होने के बाद ही अगला पंचायत चुनाव कराया जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग परिसीमन की प्रक्रिया पर काम कर रहा है।
परिसीमन का सीधा संबंध पंचायतों की सीमा और संरचना से है। इसके पूरा होने के बाद पंचायत क्षेत्रों की नई तस्वीर सामने आएगी। इसी आधार पर आगामी चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने नगर निकायों की सीमाओं के पुनर्निर्धारण की बात भी कही है। रिपोर्टों के अनुसार अगले वर्ष नगर निकायों के परिसीमन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर
ग्राम संसद में पंचायतों की वित्तीय आत्मनिर्भरता का मुद्दा भी प्रमुख रहा। मुख्यमंत्री ने पंचायतों के Own Source Revenue यानी OSR को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इसके लिए गरीब और आम नागरिकों पर नया कर लगाने के बजाय व्यावसायिक गतिविधियों से पंचायतों को राजस्व उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत करने की बात सामने आई। इनमें ईंट-भट्ठे, निजी विद्यालय, मोबाइल टावर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां शामिल हैं।
इसका उद्देश्य पंचायतों को केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय अपने स्तर पर भी राजस्व जुटाने में सक्षम बनाना है।
30 नवंबर और 31 मार्च तक विकास कार्यों का लक्ष्य
ग्राम संसद में ‘सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान’ पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इसके तहत पंचायत स्तर पर सार्वजनिक परिसंपत्तियों की मरम्मत, उन्नयन और नई आधारभूत संरचनाओं के निर्माण पर जोर दिया गया।
दिए गए कार्यक्रम के अनुसार छोटे विकास और मरम्मत कार्यों को 30 नवंबर तक पूरा करने तथा नई आधारभूत संरचनाओं के निर्माण को 31 मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसमें विद्यालय, आंगनबाड़ी भवन, उप-स्वास्थ्य केंद्र, शौचालय, सामुदायिक भवन और विवाह भवन जैसी ग्रामीण सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर है।
भुगतान व्यवस्था को लेकर प्रतिनिधियों ने उठाई मांग
ग्राम संसद में पंचायत प्रतिनिधियों ने विकास कार्यों के भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग भी रखी।
मुखिया महासंघ के प्रतिनिधियों की ओर से कहा गया कि प्रखंड स्तर पर भुगतान की प्रक्रिया रहने से योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आ सकती है। जिला स्तर पर भुगतान व्यवस्था से काम की गति प्रभावित होने की शिकायत भी रखी गई।
मनरेगा से जुड़े लंबित भुगतान के लिए केंद्र सरकार से राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध भी मुख्यमंत्री के सामने रखा गया।
प्रतिनिधियों ने केंद्र और राज्य के वित्तीय अंशदान से चलने वाली विभिन्न योजनाओं को पंचायत स्तर पर कन्वर्जन के माध्यम से लागू करने का सुझाव दिया। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, भवन, खेल मैदान और दूसरी आधारभूत सुविधाओं के निर्माण को गति देने की अपेक्षा जताई गई।
16वें वित्त आयोग से पंचायतों को बड़ी राशि
बिहार की पंचायतों के लिए 16वें वित्त आयोग के तहत 2026-27 से 2030-31 की अवधि में 51,923 करोड़ रुपये के अनुदान का प्रावधान बताया गया है। PRS के बजट विश्लेषण में भी बिहार के ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 51,923 करोड़ रुपये का आंकड़ा दर्ज है।
राज्य कैबिनेट ने भी 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के तहत पंचायती राज संस्थाओं के लिए इस राशि के वितरण और उपयोग को मंजूरी दी है।
ग्राम संसद में पंचायत सरकार भवनों की लंबित राशि जारी करने और अन्य ग्रामीण निर्माण कार्यों के लिए योजनाओं के बेहतर कन्वर्जन की मांग रखी गई।
पंचायतों की जवाबदेही पर भी चर्चा
मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया। रिपोर्टों के अनुसार जिला परिषद, प्रखंड प्रमुख और मुखिया से उनके कार्यकाल के दौरान क्षेत्र के विकास से जुड़े आंकड़ों और उपलब्धियों पर सवाल किए जाने की बात कही गई है।
पंचायतों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए जिला स्तर पर रैंकिंग कराने और बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को प्रोत्साहित करने का सुझाव भी दिया गया।
प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से पंचायतों का दौरा कर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की स्थिति देखने का आग्रह किया।
ग्राम कचहरी को मजबूत करने की मांग
ग्राम संसद में ग्राम कचहरी से जुड़े मुद्दे भी सामने आए। निर्वाचित प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के लिए बेहतर सुविधाओं की मांग की गई।
इसके अलावा ग्राम कचहरी की कार्यप्रणाली को मजबूत करने, सुनवाई से संबंधित निर्धारित राशि बढ़ाने और कंटीजेंसी मद में नियमित राशि उपलब्ध कराने जैसे सुझाव दिए गए।
ग्राम कचहरी और अंचल स्तर के पदाधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता भी बताई गई। पंचायतों को नशामुक्त बनाने और स्थानीय स्तर पर न्याय व्यवस्था को प्रभावी बनाने से जुड़े सुझाव भी चर्चा में रहे।
अब आगे क्या होगा?
मुख्यमंत्री के बयान के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगला पंचायत चुनाव नए परिसीमन के बाद ही होगा। फिलहाल परिसीमन की प्रक्रिया चल रही है और चुनाव की निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।
इसका मतलब है कि पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे प्रतिनिधियों और संभावित उम्मीदवारों को नई पंचायत सीमाओं और परिसीमन की प्रक्रिया पर नजर रखनी होगी।
ग्राम संसद में हुई चर्चा से यह भी संकेत मिला कि आने वाले वर्षों में पंचायतों की भूमिका केवल योजनाओं को लागू करने तक सीमित रखने के बजाय वित्तीय संसाधन जुटाने, विकास की निगरानी और जवाबदेही तय करने पर अधिक जोर दिया जा सकता है।
