असम में CJP के आशुतोष रांका हिरासत में, हिमंत सरकार पर लगाए आरोप

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असम में आशुतोष रांका और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की टीम को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का दावा सामने आया है। आशुतोष रांका के मुताबिक, वह अपनी टीम के साथ असम के स्कूलों की स्थिति देखने और स्थानीय वॉलंटियर्स से मुलाकात करने पहुंचे थे। CJP के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए हिरासत का विरोध किया है। हालांकि, पुलिस की ओर से हिरासत के कारण या रांका को कहां ले जाया गया, इसकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के समय उपलब्ध नहीं है।

CJP ने इस घटनाक्रम को लेकर असम सरकार और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर कई आरोप लगाए हैं। रांका ने स्कूलों के अलावा काजीरंगा, जमीन, जंगल और पानी से जुड़े अधिकारों का मुद्दा भी उठाया।

असम में क्या करने गए थे आशुतोष रांका?

CJP की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक, आशुतोष रांका और उनकी टीम ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत असम पहुंचे थे। उनका दावा है कि टीम राज्य के सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति देखने और स्थानीय वॉलंटियर्स के साथ एक छोटी बैठक करने वाली थी।

अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि असम पुलिस ने रांका और CJP की टीम को हिरासत में लिया और उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।

CJP के मुताबिक, टीम का उद्देश्य स्कूलों की स्थिति से जुड़े मुद्दों को सामने लाना था। इससे पहले संगठन अलग-अलग राज्यों में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर निरीक्षण और अभियान चलाने की बात कह चुका है। इंडिया टुडे ने भी सितंबर में CJP के ‘School Thik Karo’ अभियान के कई राज्यों तक पहुंचने की रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

हिमंत सरमा पर आशुतोष रांका ने लगाए क्या आरोप?

हिरासत के घटनाक्रम के बीच आशुतोष रांका ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर कई आरोप लगाए। रांका का कहना है कि सरकार इस बात को लेकर चिंतित है कि यदि CJP असम के स्कूलों की स्थिति सामने लाती है तो राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा हो सकती है।

उन्होंने काजीरंगा को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। रांका के मुताबिक, स्थानीय लोगों के जमीन, जंगल और पानी से जुड़े अधिकार प्रभावित किए जा रहे हैं और उन्होंने आरोप लगाया कि इन संसाधनों को कॉरपोरेट हितों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है। असम सरकार या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इन विशेष आरोपों पर प्रतिक्रिया की जानकारी भी इस रिपोर्ट के समय सामने नहीं आई है।

विधानसभा सीटों और SIR को लेकर भी उठाए सवाल

आशुतोष रांका ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में असम की विधानसभा सीमाओं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी सवाल उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा क्षेत्रों की सीमा इस तरह तय की गई कि एक गांव के लोगों को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में बांट दिया गया। उन्होंने SIR के दौरान असम के नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का भी आरोप लगाया।

इन दावों को CJP के आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए। मतदाता सूची और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े किसी भी दावे की पुष्टि के लिए निर्वाचन आयोग और संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।

CJP पहले से ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR प्रक्रिया को लेकर विरोध कर रही है। संगठन ने चुनाव आयोग से जुड़े विवादों पर अपने आंदोलन की घोषणा भी की है।

पुलिस कार्रवाई को लेकर क्या कहा गया?

रांका ने एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि जिस स्थान पर CJP की बैठक होनी थी, वहां जाने वाली सड़क के दोनों ओर बैरिकेड लगाए गए थे।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस आंसू गैस के साथ मौजूद थी और CJP के कुछ वॉलंटियर्स को हिरासत में लिया जा रहा था। उनके मुताबिक, लोगों को बैठक स्थल तक पहुंचने से रोका गया।

CJP ने सवाल उठाया कि असम सरकार उसके कार्यक्रम को लेकर इतनी सख्ती क्यों कर रही है। हालांकि, पुलिस की ओर से कार्रवाई की वजह, हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और किसी कानूनी कार्रवाई की जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि अभी जरूरी है।

CJP का 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन का ऐलान

आशुतोष रांका की हिरासत का मामला ऐसे समय सामने आया है जब CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है।

CJP के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने 25 सितंबर को कहा था कि यदि ज्ञानेश कुमार पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो संगठन 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से मुंबई से राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगा। इसके बाद आंदोलन को दूसरे शहरों तक ले जाने की बात कही गई थी।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 2 अक्टूबर से आंदोलन शुरू करने की घोषणा की थी। संगठन ने SIR और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी अपने विरोध का हिस्सा बनाया है।

ज्ञानेश कुमार और SIR विवाद से कैसे जुड़ा है मामला?

CJP पिछले कुछ समय से निर्वाचन आयोग और SIR प्रक्रिया को लेकर मुखर रही है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

दूसरी ओर, इन आरोपों को CJP के राजनीतिक दावे के रूप में देखना जरूरी है। मतदाता सूची में नाम जुड़ने, हटने या संशोधन की प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के नियमों और आधिकारिक रिकॉर्ड के तहत होती है।

इसी मुद्दे पर CJP ने पहले भी विरोध प्रदर्शन किए हैं। अब संगठन ने 2 अक्टूबर को मुंबई से आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है।

अब आगे क्या होगा?

असम में आशुतोष रांका और CJP टीम की कथित हिरासत के मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि पुलिस ने उन्हें किस आधार पर रोका और क्या उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की गई है।

इसके अलावा यह भी महत्वपूर्ण होगा कि असम पुलिस या सरकार इस मामले पर आधिकारिक रूप से क्या जानकारी देती है। CJP द्वारा लगाए गए स्कूल, काजीरंगा और मतदाता सूची संबंधी आरोपों पर भी संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में CJP के बयान और सोशल मीडिया पोस्ट प्रमुख स्रोत हैं। इसलिए हिरासत और लगाए गए आरोपों को अंतिम रूप से स्थापित तथ्य मानने के बजाय संबंधित आधिकारिक पक्ष का इंतजार करना महत्वपूर्ण है।

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