मदरसों में वंदे मातरम् अनिवार्य, गोहत्या पर भी शुभेंदु का बड़ा ऐलान
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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को राज्य के रजिस्टर्ड मदरसों में वंदे मातरम् के गायन को अनिवार्य किए जाने की बात कही। शुभेंदु अधिकारी ने यह बयान कोलकाता की नेशनल लाइब्रेरी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया। उन्होंने इसके साथ ही राज्य में गोहत्या को लेकर भी अपनी सरकार की नीति स्पष्ट की और गौशालाओं को सरकारी सहयोग देने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में घुसपैठ, राज्य की जनसांख्यिकी, सांस्कृतिक मुद्दों और प्रस्तावित समान नागरिक संहिता यानी UCC पर भी सरकार का रुख सामने रखा।
रजिस्टर्ड मदरसों में वंदे मातरम् को लेकर क्या बोले शुभेंदु?
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार ने राज्य के स्कूलों और रजिस्टर्ड मदरसों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य किया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब देशभर में वंदे मातरम् के गायन और इसके कानूनी प्रावधानों को लेकर भी चर्चा चल रही है।
मुख्यमंत्री ने इसे अपनी सरकार की नीतियों का हिस्सा बताते हुए कहा कि राज्य में राष्ट्रीय और सांस्कृतिक मुद्दों को प्राथमिकता दी जा रही है।
हालांकि, वंदे मातरम् से जुड़े कानूनी पहलू पर सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में सुनवाई हुई है। 22 सितंबर को कोर्ट ने यह तय करने से इनकार किया कि गीत के दो अंतरे गाए जाएं या छह। अदालत ने कहा कि इस विषय पर निर्णय सरकार और संसद के क्षेत्र से जुड़ा है। साथ ही कोर्ट ने इस सवाल की जांच पर सहमति जताई कि धार्मिक या अंतरात्मा संबंधी आधार पर वंदे मातरम् नहीं गाने पर किसी व्यक्ति को दंडित किया जा सकता है या नहीं।
इसलिए बंगाल सरकार के प्रशासनिक निर्देश और सुप्रीम कोर्ट में लंबित कानूनी सवालों को अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी है।
गोहत्या पर भी मुख्यमंत्री ने कही बड़ी बात
कार्यक्रम में शुभेंदु अधिकारी ने गोहत्या को लेकर भी अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में वह राज्य में गोहत्या की अनुमति नहीं देंगे।
उन्होंने राज्यभर में गौशालाओं की स्थापना और संचालन के लिए सरकार की ओर से सहयोग देने की बात कही। साथ ही गौ संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों और संगठनों से अधिक संख्या में गौशालाएं स्थापित करने का आग्रह किया।
उन्होंने बकरीद के दौरान राज्य में पशु वध से जुड़े विवाद का भी संदर्भ दिया। इस साल पश्चिम बंगाल सरकार ने पशु वध को लेकर नियमों और प्रमाणन से संबंधित दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिसके बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी बहस भी हुई थी।
मुख्यमंत्री का ताजा बयान इसी व्यापक नीति संदर्भ में सामने आया है।
घुसपैठ और सीमा सुरक्षा पर भी सरकार का रुख
नेशनल लाइब्रेरी के कार्यक्रम में शुभेंदु अधिकारी ने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर राज्य में घुसपैठ को बढ़ावा देने और जनसांख्यिकी में बदलाव का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार राज्य की सीमाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देगी और अवैध रूप से रह रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह बयान मुख्यमंत्री के राजनीतिक भाषण का हिस्सा था और इसमें उन्होंने पिछली सरकार की नीतियों की आलोचना की।
इन आरोपों पर राजनीतिक तौर पर अलग-अलग दलों की अपनी प्रतिक्रियाएं रही हैं। इसलिए इन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में।
राम मंदिर और शौर्य दिवस का भी किया जिक्र
शुभेंदु अधिकारी ने अपने संबोधन में राम मंदिर और अयोध्या से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने भाजपा और अन्य हिंदुत्व संगठनों को 6 दिसंबर को ‘शौर्य दिवस’ मनाने की अनुमति नहीं दी थी।
उन्होंने जनवरी 2024 में अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय तत्कालीन सरकार की गतिविधियों को लेकर भी टिप्पणी की। ये बयान मुख्यमंत्री द्वारा पिछली सरकार की नीतियों पर लगाए गए राजनीतिक आरोपों के रूप में सामने आए।
UCC को लेकर भी शुभेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान
समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर भी मुख्यमंत्री ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य में UCC लागू किया जाएगा।
बंगाल सरकार ने जून 2026 में जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी, जिसे प्रस्तावित UCC विधेयक की समीक्षा और सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है। समिति में कानूनी विशेषज्ञ, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति और प्रशासनिक प्रतिनिधि भी शामिल हैं।
सितंबर में समिति ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में सार्वजनिक सुझाव और सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी की थी। मुख्यमंत्री ने कहा है कि समिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार विधेयक को विधानसभा के सामने लाएगी।
बंगाल की राजनीति में सांस्कृतिक मुद्दे फिर चर्चा में
शुभेंदु अधिकारी के ताजा बयान में वंदे मातरम्, गो संरक्षण, राम मंदिर, सीमा सुरक्षा और UCC जैसे कई मुद्दे एक साथ सामने आए हैं।
इन मुद्दों का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इनमें राष्ट्रीय गीत, धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराएं, व्यक्तिगत अधिकार और कानून से जुड़े प्रश्न शामिल हैं। वंदे मातरम् पर सुप्रीम कोर्ट की हालिया सुनवाई ने भी इस बहस में कानूनी पहलू जोड़ दिया है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि रजिस्टर्ड मदरसों में वंदे मातरम् से संबंधित सरकारी व्यवस्था व्यवहार में किस तरह लागू होती है और UCC को लेकर समिति अपनी सिफारिशें कब देती है।
