समस्तीपुर में शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन, शिक्षक पर 1 करोड़ का आरोप
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समस्तीपुर में शिक्षक निलंबन का बड़ा मामला सामने आया है। शिक्षक निलंबन की कार्रवाई एक करोड़ रुपये से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में हुई है। बिहार शिक्षा विभाग ने वैशाली के एक उच्च माध्यमिक विद्यालय के तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक और वर्तमान में समस्तीपुर में पदस्थापित सहायक शिक्षक जगन्नाथ महतो को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विभागीय आदेश के मुताबिक, उन पर विद्यालय के विभिन्न खातों से बड़ी राशि की अवैध नकद निकासी और वित्तीय नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।
28 अगस्त 2026 को माध्यमिक शिक्षा निदेशक सज्जन आर. के हस्ताक्षर से जारी आदेश के बाद विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। मामले की विस्तृत जांच के लिए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।
किस मामले में हुई शिक्षक पर कार्रवाई?
जगन्नाथ महतो पहले वैशाली जिले के आर्शों कुवँर उच्च माध्यमिक विद्यालय, भरथीपुर, पातेपुर में प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत थे। वर्तमान में वह समस्तीपुर जिले के विदेही परियोजना बालिका उच्च विद्यालय में सहायक शिक्षक के पद पर पदस्थापित हैं।
शिक्षा विभाग के अनुसार, वैशाली के जिला शिक्षा पदाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ आरोप पत्र गठित किया गया था। जांच में विद्यालय के छात्र कोष और विकास कोष से जुड़े चार अलग-अलग बैंक खातों के रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई।
विभाग ने पाया कि संबंधित कैशबुक में लेन-देन का विवरण नियमों के अनुसार दर्ज नहीं किया गया था। कई वाउचरों को भी निर्धारित क्रम में नहीं रखा गया था।
एक करोड़ से ज्यादा की नकद निकासी का आरोप
विभागीय आदेश में जगन्नाथ महतो पर विद्यालय के विभिन्न खातों से एक करोड़ रुपये से अधिक की नगद राशि की अवैध निकासी का आरोप बताया गया है।
इतनी बड़ी राशि के नकद लेन-देन को विभाग ने गंभीर वित्तीय गड़बड़ी माना है। जांच में यह भी देखा गया कि राशि निकालने और खर्च करने से संबंधित जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध नहीं कराए गए।
विभागीय समीक्षा के दौरान मजदूरों की उपस्थिति पंजी, भुगतान रजिस्टर, बैंक से निकासी से जुड़े विवरण और खरीद प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत करने में भी कथित तौर पर कमी पाई गई।
खरीदारी में भी नियमों की अनदेखी का आरोप
मामले में विद्यालय में की गई खरीदारी को लेकर भी विभाग ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप के अनुसार, कई सामानों और सेवाओं के भुगतान में संबंधित विक्रेताओं के वैध GST नंबर का विवरण दर्ज नहीं था।
इसके अलावा, विभागीय नियमों के अनुसार बिलों से आयकर की आवश्यक कटौती नहीं किए जाने की बात भी जांच में सामने आई।
विभाग के मुताबिक, कई खरीदारी बिना तीन सदस्यीय खरीद समिति गठित किए की गई। बाजार से न्यूनतम तीन फर्मों से कोटेशन लेने की प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया।
ऐसे में लाखों रुपये की सामग्री खरीदने में निर्धारित वित्तीय प्रक्रिया की अनदेखी किए जाने का आरोप लगा है।
बचाव में शिक्षक ने क्या कहा?
शिक्षा विभाग की ओर से स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद जगन्नाथ महतो ने अपना लिखित बचाव प्रस्तुत किया था। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करने का प्रयास किया।
हालांकि, विभागीय समीक्षा में उनका बचाव संतोषजनक नहीं पाया गया। आदेश के अनुसार, वह वित्तीय लेन-देन और खरीद प्रक्रिया से जुड़े जरूरी दस्तावेजों के आधार पर अपने पक्ष को पर्याप्त रूप से साबित नहीं कर सके।
विभाग ने उपलब्ध रिकॉर्ड और रिपोर्ट के आधार पर माना कि इतनी बड़ी मात्रा में नकद लेन-देन गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
बिहार सरकारी सेवक नियमावली के तहत निलंबन
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने बिहार सरकारी सेवक नियमावली, 2005 के तहत जगन्नाथ महतो को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जिला शिक्षा पदाधिकारी, समस्तीपुर का कार्यालय निर्धारित किया गया है। आदेश के मुताबिक, इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
इस कार्रवाई के बाद अब विभागीय जांच के जरिए आरोपों से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जाएगी।
जांच के लिए दो अधिकारियों की नियुक्ति
मामले की विस्तृत विभागीय जांच के लिए तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक को जांच पदाधिकारी नियुक्त किया गया है।
वहीं, वैशाली के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। जांच के दौरान आरोपों से जुड़े दस्तावेज और संबंधित पक्षों के बयान रिकॉर्ड किए जा सकते हैं।
विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी वित्तीय अनियमितता साबित होती है और आगे किस स्तर की कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग की कार्रवाई से बढ़ी हलचल
एक करोड़ रुपये से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़े इस मामले में निलंबन की कार्रवाई ने शिक्षा विभाग में हलचल बढ़ा दी है।
विद्यालयों में सरकारी राशि के इस्तेमाल, खरीद प्रक्रिया और वित्तीय रिकॉर्ड को लेकर नियम पहले से निर्धारित हैं। ऐसे मामलों में विभागीय अधिकारी कैशबुक, बैंक रिकॉर्ड, बिल-वाउचर और खरीद से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर जांच करते हैं।
ताजा मामले में भी इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ रही है। विभाग का रुख यह संकेत देता है कि सरकारी विद्यालयों में वित्तीय नियमों के पालन को लेकर लापरवाही मिलने पर प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले में विभागीय जांच सबसे महत्वपूर्ण चरण होगा। जांच पदाधिकारी उपलब्ध दस्तावेजों, बैंक लेन-देन, खरीद प्रक्रिया और संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा करेंगे।
इसके बाद आरोपों की पुष्टि और जिम्मेदारी तय करने को लेकर विभाग आगे निर्णय ले सकता है। फिलहाल निलंबन विभागीय प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
इस मामले में आगे आने वाली जांच रिपोर्ट यह तय करने में अहम होगी कि कथित वित्तीय अनियमितता किस स्तर तक हुई और सरकारी धन के इस्तेमाल में किन नियमों का उल्लंघन हुआ।
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