इंदिरा गांधी को 55 हजार वोटों से हराने वाला नेता कौन था? जानें पूरी कहानी

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राज नारायण का नाम भारतीय राजनीति के इतिहास में उस नेता के तौर पर दर्ज है, जिसने 1977 के लोकसभा चुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को रायबरेली से हराया था। राज नारायण ने इंदिरा गांधी को 55,202 वोटों के अंतर से मात दी थी। यह चुनाव सिर्फ एक सीट का मुकाबला नहीं था, बल्कि आपातकाल के बाद देश में बदलते राजनीतिक माहौल का बड़ा संकेत भी माना गया।

इंदिरा गांधी ने 1977 में अपनी पारंपरिक रायबरेली सीट से चुनाव लड़ा था। दूसरी तरफ समाजवादी नेता राज नारायण उनके सामने उम्मीदवार बने। नतीजे आए तो राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए और इंदिरा गांधी को करारी हार का सामना करना पड़ा।

1977 में रायबरेली में क्या हुआ था?

1977 का लोकसभा चुनाव आपातकाल के बाद हुआ था। जून 1975 में आपातकाल लागू होने के बाद देश में राजनीतिक माहौल काफी बदल चुका था। विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियों और नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े सवालों के बीच जनवरी 1977 में लोकसभा चुनाव की घोषणा हुई।

इंदिरा गांधी ने रायबरेली से फिर चुनाव लड़ने का फैसला किया। यह वही सीट थी, जहां से वह पहले भी लोकसभा पहुंचती रही थीं। लेकिन इस बार उनके सामने राज नारायण थे, जिनके साथ उनका राजनीतिक संघर्ष पहले से चला आ रहा था।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, राज नारायण को 1,77,719 वोट मिले, जबकि इंदिरा गांधी को 1,22,517 वोट हासिल हुए। इस तरह राज नारायण ने 55,202 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।

वोट प्रतिशत की बात करें तो राज नारायण को करीब 53.51 प्रतिशत और इंदिरा गांधी को 36.89 प्रतिशत वोट मिले। यह परिणाम उस समय की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण माना गया।

कौन थे राज नारायण?

राज नारायण समाजवादी विचारधारा से जुड़े प्रमुख नेता और स्वतंत्रता आंदोलन के कार्यकर्ता थे। उनका जन्म 23 नवंबर 1917 को हुआ था। उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।

राज नारायण उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। 1952 से 1962 के बीच उन्होंने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभाई। बाद में वह राज्यसभा के सदस्य बने और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे।

उनकी पहचान सत्ता के खिलाफ मुखर राजनीतिक संघर्ष करने वाले नेता की रही। इंदिरा गांधी के खिलाफ उनका संघर्ष भी इसी राजनीतिक तेवर का हिस्सा था।

1971 में भी इंदिरा गांधी के सामने थे राज नारायण

राज नारायण और इंदिरा गांधी की चुनावी टक्कर पहली बार 1977 में नहीं हुई थी। दोनों नेता 1971 के लोकसभा चुनाव में भी रायबरेली से आमने-सामने थे।

उस चुनाव में इंदिरा गांधी ने राज नारायण को बड़े अंतर से हराया था। हालांकि, चुनाव परिणाम स्वीकार करने के बजाय राज नारायण ने इंदिरा गांधी के चुनाव को अदालत में चुनौती दी।

यही चुनाव याचिका आगे चलकर भारतीय राजनीति के सबसे बड़े संवैधानिक और राजनीतिक घटनाक्रमों में से एक की वजह बनी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले ने बदली राजनीति

राज नारायण की चुनाव याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जून 1975 में फैसला सुनाया। अदालत ने इंदिरा गांधी के 1971 के चुनाव को चुनावी कानून से जुड़े कुछ उल्लंघनों के आधार पर अमान्य घोषित किया था।

इस फैसले के बाद देश की राजनीति में जबरदस्त उथल-पुथल मची। इसके कुछ ही दिनों बाद 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू कर दिया गया।

आपातकाल के दौरान राज नारायण समेत कई विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया। यह दौर करीब 21 महीने तक चला। इसके बाद जनवरी 1977 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल हटाने और लोकसभा चुनाव कराने का फैसला किया।

फिर चुनाव में आमना-सामना और पलट गया परिणाम

1977 के चुनाव में राज नारायण और इंदिरा गांधी एक बार फिर रायबरेली में आमने-सामने थे। इस बार मुकाबले का राजनीतिक संदर्भ पूरी तरह बदल चुका था।

जनता पार्टी के नेतृत्व में विपक्ष ने आपातकाल और सरकार की नीतियों को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया। नतीजों में राज नारायण ने इंदिरा गांधी को 55,202 वोटों से हरा दिया।

यह हार इंदिरा गांधी के राजनीतिक जीवन की सबसे चर्चित चुनावी हारों में शामिल हो गई। इससे केंद्र में सत्ता परिवर्तन का रास्ता भी साफ हुआ और जनता पार्टी के नेतृत्व में नई सरकार बनी।

राज नारायण आज भी क्यों याद किए जाते हैं?

राज नारायण का राजनीतिक जीवन सत्ता के खिलाफ संघर्ष, समाजवादी राजनीति और चुनावी चुनौती के लिए जाना जाता है। 1977 की रायबरेली जीत ने उन्हें भारतीय चुनावी इतिहास में खास स्थान दिलाया।

इंदिरा गांधी जैसी ताकतवर प्रधानमंत्री को उनके ही गढ़ में हराना उस समय असाधारण राजनीतिक घटना थी। हालांकि, समय के साथ राज नारायण का नाम आम राजनीतिक चर्चा से काफी पीछे चला गया, लेकिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में उनका योगदान आज भी महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में सामने आता है।

1977 का रायबरेली चुनाव यह याद दिलाता है कि लोकतांत्रिक राजनीति में बड़े से बड़े राजनीतिक कद वाले नेता को भी मतदाता के फैसले का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि इंदिरा गांधी और राज नारायण की यह चुनावी भिड़ंत भारतीय राजनीति के सबसे यादगार मुकाबलों में गिनी जाती है।

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