गया में साइबर ठगों पर बड़ा प्रहार, 9 आरोपी गिरफ्तार, करोड़ों की ठगी का खुलासा

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गया साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। गया साइबर अपराध मामले में पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर पश्चिम बंगाल के नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह खुद को फ्लिपकार्ट और अमेज़न जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों का फर्जी कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताकर विदेशी नागरिकों से ऑनलाइन ठगी करता था। पुलिस के अनुसार अब तक करीब एक करोड़ रुपये की साइबर ठगी के संकेत मिले हैं, जबकि विस्तृत जांच के बाद यह रकम और बढ़ सकती है।

गुप्त सूचना पर गया पुलिस की बड़ी कार्रवाई

गया पुलिस ने रामपुर थाना क्षेत्र के व्हाइट हाउस रोड स्थित मोती मानी अपार्टमेंट में छापेमारी की। कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई।

छापेमारी के दौरान नौ लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार सभी आरोपी पश्चिम बंगाल के कोलकाता के विभिन्न थाना क्षेत्रों के रहने वाले हैं।

प्रारंभिक जांच में पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपी एक संगठित साइबर गिरोह के रूप में काम कर रहे थे।

विदेशी नागरिकों को बनाते थे निशाना

पुलिस जांच के मुताबिक यह गिरोह मुख्य रूप से अमेरिका में रहने वाले लोगों को अपना शिकार बनाता था।

आरोपी खुद को फ्लिपकार्ट और अमेज़न जैसी प्रसिद्ध ई-कॉमर्स कंपनियों के कस्टमर केयर अधिकारी बताकर लोगों का विश्वास जीतते थे।

इसके बाद तकनीकी सहायता, ऑर्डर रद्द कराने, रिफंड दिलाने या अकाउंट अपडेट करने के बहाने लोगों से बैंकिंग और डिजिटल जानकारी हासिल कर ठगी को अंजाम देते थे।

छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से कई डिजिटल उपकरण और बैंकिंग से जुड़े दस्तावेज जब्त किए।

बरामद सामान में शामिल हैं:

  • 15 मोबाइल फोन
  • 6 लैपटॉप
  • 22 एटीएम कार्ड
  • अन्य डिजिटल और आपत्तिजनक सामग्री

पुलिस अब इन सभी उपकरणों की फोरेंसिक जांच करा रही है ताकि गिरोह के नेटवर्क, बैंक खातों और लेनदेन की पूरी जानकारी जुटाई जा सके।

शुरुआती जांच में करोड़ों की ठगी का खुलासा

गया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने बताया कि शुरुआती जांच में इस गिरोह द्वारा करीब एक करोड़ रुपये की साइबर ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ प्रारंभिक अनुमान है। जब्त किए गए डिजिटल डेटा और बैंक रिकॉर्ड की जांच पूरी होने के बाद ठगी की वास्तविक राशि इससे अधिक भी हो सकती है।

इसी वजह से मामले की तकनीकी जांच को प्राथमिकता दी जा रही है।

अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच

पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह केवल बिहार या पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं था।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं तथा देश और विदेश में इसका दायरा कितना बड़ा है।

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास भी तेज कर दिए गए हैं।

साइबर अपराध से कैसे बचें?

इस घटना के बाद पुलिस ने लोगों को ऑनलाइन ठगी से बचने की सलाह भी दी है।

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • किसी भी अनजान कॉलर को बैंकिंग जानकारी न दें।
  • कस्टमर केयर का नंबर हमेशा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से ही लें।
  • स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप किसी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर इंस्टॉल न करें।
  • ओटीपी, यूपीआई पिन और पासवर्ड किसी से साझा न करें।
  • ठगी होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।

क्यों अहम है यह कार्रवाई?

डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ साइबर अपराध के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में संगठित साइबर गिरोहों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लोगों का भरोसा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

गया पुलिस का कहना है कि जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच और आरोपियों से पूछताछ के बाद इस पूरे नेटवर्क के बारे में और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता मिलती है, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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