बिहार में EOU का बड़ा एक्शन! DPO के 4 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी
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👉 WhatsApp से जुड़ेंEOU Raid Bihar एक बार फिर चर्चा में है। EOU Raid Bihar के तहत आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बिहार के सहरसा जिले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) अजीत अमर के चार अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की है। कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में की जा रही है। जांच टीम फिलहाल दस्तावेज, बैंक खातों, निवेश, अचल संपत्तियों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि छापेमारी पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
आय से अधिक संपत्ति के आरोप में दर्ज हुआ मामला
आर्थिक अपराध इकाई के अनुसार, सहरसा के DPO अजीत अमर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया गया है।
सूचना मिलने के बाद EOU ने पहले पूरे मामले का सत्यापन कराया। प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर EOU थाना कांड संख्या 17/26, दिनांक 6 अगस्त 2026 दर्ज किया गया।
इसके बाद मुजफ्फरपुर स्थित विशेष निगरानी अदालत से तलाशी वारंट प्राप्त किया गया और शुक्रवार सुबह एक साथ कई स्थानों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई।
प्रारंभिक जांच में सामने आई 62.20 लाख रुपये की अतिरिक्त संपत्ति
EOU की शुरुआती जांच में करीब 62,20,550 रुपये की आय से अधिक संपत्ति मिलने की बात सामने आई है।
अधिकारियों के अनुसार यह राशि अधिकारी की ज्ञात आय की तुलना में लगभग 2.35 प्रतिशत अधिक बताई गई है। हालांकि अंतिम आंकड़े छापेमारी और दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
जांच एजेंसी का कहना है कि सभी वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है ताकि वास्तविक संपत्ति और आय का सही आकलन किया जा सके।
इन चार ठिकानों पर एक साथ पहुंची EOU की टीम
डीएसपी स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में EOU की अलग-अलग टीमों ने एक साथ चार स्थानों पर छापेमारी शुरू की।
जिन स्थानों पर कार्रवाई की जा रही है, उनमें शामिल हैं—
- सहरसा के बरियाही थाना क्षेत्र स्थित पैतृक एवं निजी मकान।
- सहरसा के नया बाजार स्थित किराये का आवास।
- सहरसा स्थित सरकारी कार्यालय।
- छपरा के गंडक कॉलोनी स्थित सरकारी आवास।
चारों स्थानों से दस्तावेज, संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
बैंक खाते, निवेश और संपत्ति के दस्तावेजों की हो रही जांच
EOU की टीम केवल नकदी या संपत्ति की ही नहीं, बल्कि बैंक खातों, निवेश, बीमा, जमीन, भवन और अन्य वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।
जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि अधिकारी की घोषित आय और वास्तविक संपत्ति में कितना अंतर है।
यदि जांच के दौरान नए दस्तावेज या वित्तीय लेनदेन सामने आते हैं तो उन्हें भी केस रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाएगा।
छापेमारी पूरी होने के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
छापेमारी पूरी होने के बाद जब्त दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि कुल कितनी संपत्ति मिली है और क्या आय से अधिक संपत्ति के अलावा अन्य वित्तीय अनियमितताओं के भी प्रमाण मौजूद हैं।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
भ्रष्टाचार के मामलों में लगातार सक्रिय है EOU
बिहार में पिछले कुछ समय से आर्थिक अपराध इकाई भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में लगातार कार्रवाई कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी जांच से सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ती है और जवाबदेही मजबूत होती है। साथ ही सरकारी अधिकारियों के लिए यह स्पष्ट संदेश भी जाता है कि वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में जांच एजेंसियां लगातार निगरानी रख रही हैं।
हालांकि, किसी भी मामले में अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल EOU की टीम चारों ठिकानों से जुटाए गए दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान कर रही है।
यदि जांच में अतिरिक्त संपत्ति या अन्य वित्तीय गड़बड़ियों के प्रमाण मिलते हैं, तो एजेंसी संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई करेगी। वहीं, छापेमारी की पूरी रिपोर्ट आने के बाद मामले की वास्तविक स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी।
