बिहार में रिश्वतखोरों पर बड़ा वार! 10 हजार लेते JE समेत 3 रंगे हाथ गिरफ्तार
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बिहार रिश्वतखोरी के खिलाफ कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। बिहार रिश्वतखोरी के एक ताजा मामले में पूर्णिया जिले के केनगर प्रखंड स्थित उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) कार्यालय में स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने कनीय अभियंता (JE) भरत मलिक और दो टेक्निकल सहायकों आशुतोष पांडेय तथा पंकज कुमार को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद बिजली विभाग में हड़कंप मच गया और पूरे इलाके में घटना चर्चा का विषय बन गई।
घरेलू बिजली कनेक्शन के लिए मांगी गई थी 15 हजार रुपये की रिश्वत
जानकारी के अनुसार, पूर्णिया जिले के मजरा पंचायत के बखरीकोल गांव निवासी राजेश कुमार साह ने घरेलू बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था।
आरोप है कि आवेदन को मंजूरी देने के बदले संबंधित कनीय अभियंता ने 15 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता के अनुसार, सत्यापन के दौरान पहले ही 5 हजार रुपये ले लिए गए थे, जबकि बाकी 10 हजार रुपये बाद में देने को कहा गया।
रिश्वत की लगातार मांग से परेशान होकर पीड़ित ने स्पेशल विजिलेंस यूनिट, पटना से संपर्क किया और पूरी घटना की लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत सही मिली तो विजिलेंस ने बिछाया जाल
स्पेशल विजिलेंस यूनिट के इंस्पेक्टर अविनाश कुमार झा ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पहले मामले का सत्यापन कराया गया।
जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद एसवीयू ने एक विशेष धावा दल का गठन किया और पूरी योजना तैयार की।
गुरुवार को शिकायतकर्ता को तय योजना के अनुसार केनगर स्थित बिजली कार्यालय भेजा गया। विजिलेंस की टीम पहले से आसपास तैनात थी और पूरी कार्रवाई पर नजर रख रही थी।
10 हजार रुपये लेते ही दबोचे गए तीनों कर्मचारी
योजना के मुताबिक शिकायतकर्ता जेई के कार्यालय पहुंचे, जहां दोनों टेक्निकल सहायक भी मौजूद थे।
जैसे ही कनीय अभियंता भरत मलिक ने कार्यालय में 10 हजार रुपये रिश्वत के रूप में स्वीकार किए, पहले से तैयार विजिलेंस टीम ने तुरंत छापेमारी कर दी।
कार्रवाई के दौरान जेई समेत तीनों कर्मचारियों को मौके पर ही रंगे हाथ पकड़ लिया गया। अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तारी के समय आरोपियों ने बचने और भागने की कोशिश भी की, लेकिन टीम ने उन्हें सफलतापूर्वक काबू कर लिया।
बिजली विभाग में मचा हड़कंप, पूछताछ जारी
तीनों कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
विजिलेंस टीम सभी आरोपियों को अपने साथ लेकर चली गई। फिलहाल उनसे पूछताछ की जा रही है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
इस कार्रवाई के बाद बिजली विभाग के कर्मचारियों में भी हलचल देखी गई। स्थानीय लोगों के बीच पूरे दिन इस घटना की चर्चा होती रही।
पीड़ित बोला- पैसे देने के बाद भी नहीं हुआ काम
शिकायतकर्ता राजेश कुमार साह ने बताया कि घरेलू बिजली कनेक्शन के लिए उन्होंने सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की थीं।
उनका आरोप है कि रिश्वत दिए बिना फाइल आगे नहीं बढ़ाई जा रही थी। 5 हजार रुपये देने के बाद भी काम नहीं हुआ। उन्होंने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से भी शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला।
आखिरकार उन्होंने निगरानी विभाग की मदद लेने का फैसला किया, जिसके बाद पूरी कार्रवाई संभव हो सकी।
स्थानीय लोगों ने लगाए गंभीर आरोप
घटना के बाद मौके पर मौजूद कई लोगों ने दावा किया कि बिजली विभाग में छोटे-छोटे कामों के लिए भी लोगों को अनावश्यक परेशान किया जाता है।
कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि बिना रिश्वत दिए कई मामलों में काम समय पर नहीं होता। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं, विजिलेंस की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार सख्ती
हाल के दिनों में बिहार में भ्रष्टाचार के मामलों पर निगरानी एजेंसियों की कार्रवाई लगातार बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैप कार्रवाई से सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता बढ़ाने और रिश्वतखोरी पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। वहीं, नागरिकों को भी रिश्वत मांगने की स्थिति में संबंधित एजेंसियों से शिकायत करने की सलाह दी जाती है।
इस ताजा कार्रवाई ने यह भी संकेत दिया है कि सत्यापन के बाद शिकायत सही मिलने पर निगरानी एजेंसियां त्वरित कार्रवाई कर रही हैं।
