Delimitation Bill पर DMK क्यों बनी 'किंगमेकर'? समझिए पूरा गणित

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Delimitation Bill को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। Delimitation Bill पर केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक संविधान संशोधन विधेयक पेश नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक दलों के बीच संभावित समर्थन और विरोध को लेकर चर्चाएं तेज हैं। यदि भविष्य में यह संविधान संशोधन विधेयक संसद में आता है, तो इसे पारित कराने के लिए दोनों सदनों में विशेष बहुमत यानी दो-तिहाई (2/3) बहुमत की आवश्यकता होगी। ऐसे में तमिलनाडु की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा और राज्यसभा में DMK के सांसदों की संख्या भविष्य के किसी भी संभावित मतदान में अहम असर डाल सकती है। हालांकि फिलहाल पार्टी ने स्पष्ट किया है कि विधेयक का मसौदा सामने आने के बाद ही वह अपना अंतिम रुख तय करेगी।

Delimitation Bill क्या है और क्यों है चर्चा में?

परिसीमन (Delimitation) का अर्थ लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करना होता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण से जुड़ी होती है।

हाल के दिनों में इस विषय पर राजनीतिक चर्चाएं इसलिए तेज हुई हैं क्योंकि भविष्य में यदि संविधान संशोधन से जुड़ा कोई नया परिसीमन विधेयक लाया जाता है, तो उसके लिए संसद में विशेष बहुमत की जरूरत होगी।

फिलहाल सरकार ने इस संबंध में कोई आधिकारिक विधेयक पेश नहीं किया है।

DMK की भूमिका क्यों मानी जा रही है अहम?

DMK के पास वर्तमान में लोकसभा में 22 सांसद और राज्यसभा में 8 सांसद हैं।

इसी वजह से पार्टी का रुख संसद के संभावित नंबर गेम में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि DMK ने साफ कहा है कि वह किसी भी प्रस्तावित विधेयक का समर्थन या विरोध उसके अंतिम मसौदे को देखने के बाद ही तय करेगी।

पार्टी का कहना है कि कांग्रेस के साथ मतभेद होने का अर्थ यह नहीं है कि वह हर मुद्दे पर सरकार का समर्थन करेगी।

क्या कांग्रेस से दूरी का मतलब NDA का समर्थन?

राजनीतिक गलियारों में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि कांग्रेस से मतभेद के बाद क्या DMK केंद्र सरकार का साथ दे सकती है।

हालांकि पार्टी नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल के कुछ विधेयकों पर पार्टी ने सरकार का विरोध किया और संशोधन भी पेश किए थे।

यानी फिलहाल DMK ने अपने सभी विकल्प खुले रखे हैं।

लोकसभा में क्या है दो-तिहाई बहुमत का गणित?

यदि लोकसभा में सभी उपलब्ध सदस्य मतदान करते हैं, तो संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होगी।

राजनीतिक चर्चाओं में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यदि NDA को कुछ अन्य दलों का समर्थन मिलता है, तो उसकी संख्या बढ़ सकती है।

विश्लेषकों के अनुसार दो संभावित स्थिति बन सकती हैं—

1. यदि DMK समर्थन करती है

  • NDA का आंकड़ा बढ़ सकता है।
  • विशेष बहुमत तक पहुंचने के लिए अपेक्षाकृत कम अतिरिक्त सांसदों की आवश्यकता होगी।

2. यदि DMK वॉकआउट करती है

यदि पार्टी मतदान में हिस्सा नहीं लेती, तो कुल मतदान करने वाले सदस्यों की संख्या कम हो जाएगी। इससे दो-तिहाई बहुमत का आवश्यक आंकड़ा भी बदल सकता है।

हालांकि दोनों ही परिस्थितियों में सरकार को अन्य दलों का समर्थन जुटाने की आवश्यकता पड़ सकती है।

राहुल गांधी की टिप्पणी क्यों चर्चा में आई?

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने परिसीमन के मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जो भी इस विधेयक का समर्थन करेगा, उसे "21वीं सदी का एट्टप्पन" कहा जाएगा।

यह टिप्पणी तमिल इतिहास के एक चर्चित पात्र के संदर्भ में की गई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान के जरिए DMK पर राजनीतिक और नैतिक दबाव बनाने की कोशिश की गई।

हालांकि इस टिप्पणी पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी राय है।

राज्यसभा में क्या है स्थिति?

राज्यसभा में सत्तापक्ष की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत मानी जा रही है।

राजनीतिक समीकरणों के अनुसार यदि कुछ क्षेत्रीय दल समर्थन देते हैं, तो विशेष बहुमत का आंकड़ा हासिल करना लोकसभा की तुलना में अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।

यही कारण है कि राजनीतिक विश्लेषक लोकसभा के गणित को इस पूरे मुद्दे में अधिक चुनौतीपूर्ण मान रहे हैं।

आगे क्या होगा?

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार की ओर से परिसीमन से जुड़ा कोई आधिकारिक संविधान संशोधन विधेयक अभी पेश नहीं किया गया है।

यदि भविष्य में ऐसा विधेयक संसद में आता है, तो उसके प्रावधान, राजनीतिक दलों का रुख और संसद में समर्थन का वास्तविक गणित ही आगे की दिशा तय करेगा।

तब तक इस मुद्दे पर जारी सभी चर्चाएं संभावित राजनीतिक समीकरणों और सार्वजनिक बयानों पर आधारित हैं।

एक नजर में पूरी खबर 

  • परिसीमन (Delimitation) को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज।
  • केंद्र सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक संविधान संशोधन विधेयक पेश नहीं किया है।
  • DMK ने कहा है कि विधेयक का मसौदा देखने के बाद ही फैसला करेगी।
  • संविधान संशोधन के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा।
  • लोकसभा में संभावित नंबर गेम को लेकर राजनीतिक दलों की नजर DMK के रुख पर बनी हुई है।
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