बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत, यौन उत्पीड़न केस में कोर्ट ने किया बरी

 


नई दिल्ली: बृजभूषण शरण सिंह केस में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। बृजभूषण शरण सिंह केस में पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) अध्यक्ष को महिला पहलवानों से जुड़े यौन उत्पीड़न आरोपों में अदालत ने बरी कर दिया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार की अदालत ने यह फैसला सुनाया। हालांकि, फैसले का विस्तृत आदेश अभी जारी होना बाकी है।

अदालत में बृजभूषण शरण सिंह मौजूद रहे। उनकी ओर से वकील राजीव मोहन, ऋषभ भाटी और रेहान खान ने पक्ष रखा, जबकि शिकायतकर्ता महिला पहलवानों की ओर से वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन पेश हुईं।

किन आरोपों में दर्ज हुआ था मामला?

यह मामला महिला पहलवानों की शिकायतों के आधार पर दर्ज किया गया था। दिल्ली पुलिस ने एफआईआर में बृजभूषण शरण सिंह और WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को आरोपी बनाया था।

एफआईआर में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354, 354A, 354D और 34 के तहत आरोप लगाए गए थे।

इन धाराओं में महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से हमला, यौन उत्पीड़न, पीछा करना और साझा आपराधिक इरादे जैसे आरोप शामिल थे।

मई 2024 में ट्रायल कोर्ट ने पांच शिकायतकर्ताओं से जुड़े मामलों में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आरोप तय किए थे। वहीं, एक शिकायतकर्ता से जुड़े मामले में उन्हें आरोपों से राहत मिली थी।

विनोद तोमर के खिलाफ एक मामले में आपराधिक धमकी देने का आरोप तय किया गया था।

कैसे शुरू हुआ था पहलवानों का विरोध?

इस मामले की शुरुआत जनवरी 2023 में हुई थी, जब ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक, बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट सहित कई पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे।

पहलवानों ने उन पर यौन उत्पीड़न और पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया था।

सरकार की ओर से जांच समिति बनाने के आश्वासन के बाद उस समय प्रदर्शन समाप्त हो गया था। लेकिन अप्रैल 2023 में पहलवानों ने दोबारा आंदोलन शुरू किया और एफआईआर दर्ज कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद दिल्ली पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की थीं। इनमें सात शिकायतकर्ताओं की शिकायतें शामिल थीं, जिनमें एक नाबालिग शिकायतकर्ता भी शामिल थी।

POCSO मामले में पहले ही मिली थी राहत

बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ एक नाबालिग पहलवान से जुड़े POCSO मामले में भी कार्रवाई हुई थी।

मई 2025 में पटियाला हाउस कोर्ट ने इस मामले को बंद कर दिया था। यह कार्रवाई नाबालिग शिकायतकर्ता के पिता की ओर से मामला वापस लेने की मांग के बाद हुई।

इसके बाद मुख्य यौन उत्पीड़न मामले की सुनवाई जारी रही।

बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?

अदालत में अंतिम बहस के दौरान बृजभूषण शरण सिंह के वकीलों ने शिकायतकर्ताओं के बयानों में अंतर होने का दावा किया।

बचाव पक्ष ने कहा कि कुछ मामलों में घटना की तारीख और स्थान को लेकर बदलाव दिखाई दिए। वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि कुछ आरोपों के समय बृजभूषण शरण सिंह की मौजूदगी साबित नहीं हुई।

बचाव पक्ष ने अलीबाई की दलील भी पेश की। उनका कहना था कि अभियोजन पक्ष को पहले यह साबित करना होगा कि आरोपी घटनास्थल पर मौजूद थे।

इसके अलावा वकीलों ने शिकायत दर्ज कराने में हुई देरी और शिकायतकर्ताओं के सार्वजनिक व्यवहार का भी हवाला दिया।

महिला पहलवानों ने लगाए थे गंभीर आरोप

शिकायतकर्ताओं ने अदालत में कई गंभीर आरोप लगाए थे।

एक महिला पहलवान ने आरोप लगाया था कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान उसके साथ गलत व्यवहार किया गया। उसने कहा था कि आरोपी ने पद और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए उसका शोषण किया।

एक अन्य शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि कथित घटनाओं के कारण वह मानसिक तनाव से गुजरी और खेल प्रदर्शन पर भी असर पड़ा।

हालांकि, अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद बृजभूषण शरण सिंह को आरोपों से बरी कर दिया।

फैसले के बाद राजनीतिक और खेल जगत में चर्चा

बृजभूषण शरण सिंह लंबे समय तक भारतीय कुश्ती महासंघ से जुड़े रहे हैं। आरोपों के बाद यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना था।

भारतीय जनता पार्टी ने 2024 लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया था। इसके बजाय उनके बेटे करण भूषण सिंह को कैसरगंज सीट से उम्मीदवार बनाया गया था, जिन्होंने चुनाव जीत लिया।

फिलहाल अदालत के फैसले के बाद इस मामले पर राजनीतिक और खेल जगत में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो सकता है।

विस्तृत न्यायिक आदेश आने के बाद ही यह साफ होगा कि अदालत ने किन आधारों पर यह फैसला दिया।

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