लता की आवाज में अमर हुआ ये गाना, पहले किसी और सिंगर के लिए था
‘मेरे नसीब में तू है कि नहीं’ की अनसुनी कहानी, जानें बड़ा राज
नई दिल्ली: मेरे नसीब में तू है कि नहीं बॉलीवुड के उन सदाबहार गानों में शामिल है, जिसने कई दशक बाद भी लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए रखी है। मेरे नसीब में तू है कि नहीं गाने को आज भी लोग उतनी ही भावनाओं के साथ सुनते हैं, जितना इसकी रिलीज के समय सुनते थे। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि यह लोकप्रिय गीत शुरुआत में किसी और मशहूर गायिका की आवाज में रिकॉर्ड होने वाला था।
1981 में रिलीज हुई फिल्म ‘नसीब’ का यह गाना बाद में लता मंगेशकर की आवाज से अमर हो गया। इसकी मधुर धुन, खूबसूरत बोल और हेमा मालिनी का शानदार प्रदर्शन इसे यादगार बनाने में कामयाब रहे।
उषा उत्थुप के लिए तैयार किया गया था गाना
बॉलीवुड में कई बार ऐसा हुआ है कि कोई गाना किसी खास सिंगर को ध्यान में रखकर बनाया गया, लेकिन अंतिम समय में उसे किसी और कलाकार ने गाया और वही आवाज इतिहास बन गई।
‘मेरे नसीब में तू है कि नहीं’ भी ऐसी ही कहानी से जुड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआत में इस गाने को मशहूर गायिका उषा उत्थुप गाने वाली थीं।
उन्होंने इस गाने की रिहर्सल भी कर ली थी। लेकिन बाद में गाना लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड किया गया।
लता मंगेशकर की भावपूर्ण आवाज ने इस गीत को ऐसी पहचान दी कि यह हिंदी सिनेमा के यादगार रोमांटिक गानों में शामिल हो गया।
लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और आनंद बख्शी की जोड़ी ने रचा जादू
इस गाने की सफलता के पीछे शानदार संगीत टीम का बड़ा योगदान रहा।
फिल्म ‘नसीब’ के इस गीत का संगीत मशहूर संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था। वहीं, इसके बोल दिग्गज गीतकार आनंद बख्शी ने लिखे थे।
गीत में प्यार, इंतजार और भावनाओं को बेहद खूबसूरती से पेश किया गया है। यही वजह है कि यह गाना सिर्फ एक फिल्मी गीत नहीं रहा, बल्कि लोगों की यादों का हिस्सा बन गया।
हेमा मालिनी पर फिल्माए गए इस गाने में उनका शानदार डांस और स्क्रीन प्रेजेंस भी दर्शकों को काफी पसंद आया।
फिल्म ‘नसीब’ ने बॉक्स ऑफिस पर मचाई थी धूम
‘मेरे नसीब में तू है कि नहीं’ साल 1981 में रिलीज हुई फिल्म ‘नसीब’ का हिस्सा था।
इस फिल्म का निर्माण और निर्देशन मनमोहन देसाई ने किया था। फिल्म में अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा, ऋषि कपूर, हेमा मालिनी और रीना रॉय जैसे बड़े कलाकारों ने काम किया था।
‘नसीब’ एक कॉमेडी एक्शन फिल्म थी, जिसमें किस्मत, दोस्ती, प्यार और बदले की कहानी दिखाई गई थी।
फिल्म की कहानी एक लॉटरी टिकट से शुरू होती है, जो कई लोगों की जिंदगी बदल देती है। यही टिकट आगे चलकर धोखे, संघर्ष और बदले की वजह बन जाता है।
क्या थी फिल्म ‘नसीब’ की कहानी?
फिल्म में नामदेव नाम का एक वेटर अपने दोस्तों दमू, रघु और जग्गी के साथ मिलकर लॉटरी टिकट खरीदता है।
ताश के खेल में जग्गी टिकट जीत जाता है। लेकिन जब टिकट पर बड़ी रकम निकलती है तो लालच में आकर दमू और रघु उसकी हत्या कर देते हैं।
वे इस हत्या का आरोप नामदेव पर लगा देते हैं। नामदेव अपनी जान बचाने के लिए भागता है, लेकिन उसे नदी में फेंक दिया जाता है।
बाद में डॉन अमरीश पुरी उसे बचा लेता है और दुनिया को लगता है कि नामदेव मर चुका है।
20 साल बाद कहानी एक नए मोड़ पर पहुंचती है। दमू और रघु चोरी के पैसों से बड़े कारोबारी बन जाते हैं।
वहीं नामदेव का बेटा जॉनी होटल में वेटर का काम करता है। जॉनी और विक्की दोनों हेमा मालिनी के किरदार आशा से प्यार करने लगते हैं।
इसके बाद कहानी में प्यार, दोस्ती, त्याग और बदले का सिलसिला शुरू होता है।
आज भी क्यों खास है यह गाना?
‘मेरे नसीब में तू है कि नहीं’ की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण इसकी भावनात्मक गहराई है।
लता मंगेशकर की आवाज ने इस गीत में दर्द और प्यार दोनों को खूबसूरती से महसूस कराया।
आज भी यह गाना पुराने हिंदी संगीत प्रेमियों की पसंदीदा सूची में शामिल है। नई पीढ़ी के लोग भी इसे सुनना पसंद करते हैं क्योंकि इसकी धुन और बोल समय के साथ पुराने नहीं हुए।
यह गीत साबित करता है कि अच्छे संगीत की उम्र कभी खत्म नहीं होती।
