BPSC पेपर लीक में बड़ा खुलासा, BARC कर्मचारी ने कई परीक्षाओं में कराई सेटिंग

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बिहार में BPSC पेपर लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे परीक्षा माफिया के नेटवर्क को लेकर नए खुलासे हो रहे हैं। BPSC पेपर लीक मामले में मुंबई के भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) से गिरफ्तार तकनीकी सहायक रौशन कुमार से पूछताछ में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली की जानकारी सामने आई है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के अनुसार, रौशन ने AEdo परीक्षा के अलावा NEET-UG 2023 समेत करीब आधा दर्जन परीक्षाओं में सेटिंग कराने की बात स्वीकार की है।

जांच एजेंसी के मुताबिक, नालंदा के नूरसराय निवासी रौशन कुमार खुद भी सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा का अभ्यर्थी था। उसका परीक्षा केंद्र मोतिहारी में था और आरोप है कि उसने परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक स्तर पर भी सेटिंग कराने की कोशिश की थी।

NEET समेत कई परीक्षाओं में धांधली का दावा

EOU के अनुसार, पूछताछ में रौशन कुमार ने जिन परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की बात बताई है, उनमें NEET-UG 2023, केंद्रीय चयन पर्षद की रेडियो ऑपरेटर परीक्षा, मद्य निषेध परीक्षा, बिहार तकनीकी सेवा आयोग की अमीन बहाली परीक्षा और झारखंड CGL परीक्षा शामिल हैं।

जांच एजेंसी का दावा है कि रौशन करीब चार से पांच वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को कथित तौर पर पास कराने के नेटवर्क से जुड़ा था। जांच के दौरान कई ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों से जुड़े साक्ष्य भी मिलने की बात कही गई है।

NEET-UG 2023 को लेकर भी जांच में गंभीर आरोप सामने आए हैं। EOU के मुताबिक, रौशन ने अपने सहयोगी आकाश कुमार के साथ मिलकर एक अभ्यर्थी को पास कराने के लिए कथित तौर पर स्कॉलर बैठाया था। संबंधित अभ्यर्थी की पहचान अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।

AEDO परीक्षा में 25 लाख रुपये की कथित डील

AEDO परीक्षा मामले में जांच एजेंसी ने रौशन और उसके सहयोगियों पर एक अभ्यर्थी को पास कराने के लिए 25 लाख रुपये में सौदा करने का आरोप लगाया है।

EOU के अनुसार, अभ्यर्थी श्वेता कुमारी को परीक्षा में मदद पहुंचाने के लिए फर्जी बायोमेट्रिक आईडी तैयार की गई थी। गिरोह के कथित सदस्य चंदन और राहुल के जरिए नालंदा स्थित परीक्षा केंद्र में प्रवेश की व्यवस्था की गई।

जांच एजेंसी का कहना है कि परीक्षा के दौरान कमरे में मौजूद अभ्यर्थी तक कथित तौर पर आंसर-की पहुंचाने की कोशिश की गई। इसके लिए होलोग्राम वाली पर्ची के बीच आंसर-की छिपाने का आरोप है।

बताया गया है कि यह व्यवस्था परीक्षा केंद्र के कमरा नंबर 25 में बैठी अभ्यर्थी तक पहुंचाई गई थी। मामले में EOU तकनीकी साक्ष्यों और आरोपितों के बीच संपर्क की भी जांच कर रही है।

मोतिहारी से भागलपुर तक नेटवर्क की तलाश

रौशन कुमार खुद AEDO परीक्षा में शामिल होने वाला था। EOU के मुताबिक, उसने अपने परीक्षा केंद्र को प्रभावित करने के लिए बायोमेट्रिक स्टाफ के जरिए कथित सेटिंग की थी।

जांच में यह भी सामने आया कि रौशन अपने गिरोह के साथ भागलपुर पहुंचा था। वहां परीक्षा केंद्र के अंदर ब्लूटूथ तकनीक के माध्यम से अभ्यर्थियों को उत्तर उपलब्ध कराने का कथित प्रयास किया गया।

इससे जांच एजेंसी को आशंका है कि गिरोह सिर्फ एक परीक्षा केंद्र तक सीमित नहीं था। अलग-अलग शहरों और ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों में नेटवर्क के संभावित संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है।

बकाया पैसे को लेकर अपहरण की साजिश का आरोप

मामले में गिरफ्तार रौशन के सहयोगी आकाश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। EOU के अनुसार, आकाश ने AEDO परीक्षा में चार से अधिक अभ्यर्थियों की कथित सेटिंग की थी।

अमीन बहाली परीक्षा में भी दोनों आरोपितों पर दो अभ्यर्थियों को कथित तौर पर परीक्षा पास कराने की व्यवस्था करने का आरोप है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में दोनों अभ्यर्थियों से 3.5-3.5 लाख रुपये का भुगतान बकाया था।

बताया गया है कि कथित बकाया रकम वसूलने के लिए रौशन और आकाश ने गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर दोनों अभ्यर्थियों के अपहरण की साजिश रची थी। इस आरोप की भी जांच जारी है।

आकाश कुमार भी गिरफ्तार, दोनों जेल भेजे गए

EOU ने इस मामले में रौशन कुमार के कथित सहयोगी आकाश कुमार को भी गिरफ्तार किया है। 25 वर्षीय आकाश नालंदा के सोहसराय का रहने वाला बताया गया है।

पूछताछ के बाद दोनों आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जांच एजेंसी अब दोनों से मिले इनपुट के आधार पर नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका खंगाल रही है।

जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि परीक्षा केंद्रों में कथित सेटिंग के लिए किस स्तर पर मदद मिली और इसमें कितने लोग शामिल थे।

दिसंबर 2024 में BARC में हुई थी नियुक्ति

रौशन कुमार की दिसंबर 2024 में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में तकनीकी सहायक के पद पर नियुक्ति हुई थी। गिरफ्तारी के समय वह प्रशिक्षण ले रहा था।

EOU अब यह भी जांच कर रही है कि सरकारी वैज्ञानिक संस्थान में नौकरी मिलने के बाद भी उसका कथित परीक्षा नेटवर्क से संपर्क किस तरह बना रहा। जांच एजेंसी के अनुसार, उसके नेटवर्क के तार बिहार के अलावा दूसरे राज्यों तक भी जुड़े होने के संकेत मिले हैं।

फिलहाल मामले में सामने आए आरोप जांच का हिस्सा हैं। EOU बरामद साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और आरोपितों के बयानों का मिलान कर रही है। आगे की जांच में परीक्षा माफिया के नेटवर्क से जुड़े अन्य नाम सामने आने की संभावना है।

परीक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

AEDO और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली के खुलासे ने परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा और बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।

यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो इससे यह पता चलेगा कि परीक्षा माफिया किस तरह तकनीक, फर्जी पहचान और कथित अंदरूनी सेटिंग का इस्तेमाल कर अभ्यर्थियों तक मदद पहुंचाने की कोशिश कर रहा था।

EOU की जांच आगे बढ़ने के साथ यह साफ होने की उम्मीद है कि इस पूरे नेटवर्क में कितने अभ्यर्थी, बिचौलिए और परीक्षा केंद्र से जुड़े लोग शामिल थे। फिलहाल रौशन कुमार और आकाश कुमार न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है।

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