4 साल की नौकरी में 6 बीघा जमीन और 40 लाख के जेवर, DPO की काली कमाई का खुलासा
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ें
सहरसा के शिक्षा विभाग में तैनात जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) अजीत अमर पर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी कार्रवाई की है। सहरसा डीपीओ अजीत अमर के सारण, सहरसा और सीवान स्थित चार ठिकानों पर हुई तलाशी में जमीन, जेवर, मकान और वाहनों से जुड़ी संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। EOU के मुताबिक, अधिकारी के खिलाफ आय से करीब 72.35 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
जांच एजेंसी के अनुसार, अजीत अमर फरवरी 2022 में सरकारी सेवा में आए थे। करीब साढ़े चार साल के सेवाकाल में उन्हें वेतन के रूप में लगभग 38 लाख रुपये मिले, जबकि जांच में उनकी घोषित आय के मुकाबले काफी अधिक संपत्ति सामने आने का दावा किया गया है।
पत्नी के नाम खरीदी गई साढ़े छह बीघा से अधिक जमीन
EOU की जांच में सबसे अहम जानकारी सारण जिले के एकमा से जुड़ी सामने आई है। एजेंसी के अनुसार, अजीत अमर ने अपनी पत्नी पूजा कुमारी के नाम पर छह बीघा नौ कट्ठा आठ धूर, यानी करीब 481.36 डिसमिल जमीन खरीदी।
दस्तावेजों के मुताबिक, इस जमीन की खरीद पर 41.50 लाख रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है। हालांकि, जांच एजेंसी को ऐसे कागजात भी मिले हैं, जिनसे जमीन के लिए इससे अधिक रकम के भुगतान की बात सामने आने का दावा किया गया है।
जांच टीम अब जमीन खरीद से जुड़े दस्तावेजों, भुगतान के स्रोत और संपत्ति की वास्तविक कीमत की पड़ताल कर रही है। EOU की विस्तृत जांच के बाद ही संपत्ति के पूरे मूल्य और आय के स्रोत को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
घर से 40 लाख रुपये से अधिक के जेवर मिले
तलाशी के दौरान अजीत अमर के निजी आवास से करीब 40.05 लाख रुपये मूल्य के आभूषण मिलने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा 2023 से 2025 के बीच करीब 27 लाख रुपये के जेवर खरीदे जाने से जुड़े दस्तावेज भी जांच टीम के हाथ लगे हैं।
जांच एजेंसी अब इन आभूषणों की खरीद में इस्तेमाल रकम और उसके स्रोत की जांच कर रही है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में ऐसे खर्च और निवेश जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।
EOU के मुताबिक, अधिकारी ने सीवान में अपनी पैतृक जमीन पर 50 लाख रुपये से अधिक की लागत से मकान भी बनवाया। इसके अलावा एक महिंद्रा स्कॉर्पियो और यामाहा एफएच बाइक खरीदे जाने की जानकारी भी सामने आई है।
चार ठिकानों पर एक साथ हुई छापेमारी
आर्थिक अपराध इकाई ने शुक्रवार को अजीत अमर से जुड़े चार ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इनमें सीवान के दारौंदा थाना क्षेत्र के रैनी गांव स्थित पैतृक एवं निजी आवास, सहरसा के नया बाजार स्थित किराये का आवास, सहरसा स्थित सरकारी कार्यालय और छपरा के गंडक कॉलोनी स्थित सरकारी आवास शामिल हैं।
EOU के अनुसार, विशेष न्यायालय निगरानी उत्तर बिहार, मुजफ्फरपुर से निगरानी पत्र प्राप्त होने के बाद पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में तलाशी की कार्रवाई की गई।
रैनी गांव में कार्रवाई के दौरान नौ सदस्यीय टीम सुबह करीब आठ बजे पहुंची। उस समय घर पर ताला लगा था। टीम ने स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में ताला खुलवाकर तलाशी शुरू की।
साढ़े चार घंटे तक चली पैतृक आवास की तलाशी
रैनी गांव स्थित मकान में EOU की तलाशी करीब साढ़े चार घंटे तक चली। टीम ने घर के अलग-अलग हिस्सों की जांच की और कई दस्तावेज अपने कब्जे में लिए।
तलाशी के दौरान स्थानीय पुलिस और जिला पुलिस के जवान घर के बाहर तैनात रहे। कार्रवाई की जानकारी आसपास के इलाके में तेजी से फैल गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुटने लगे।
EOU अधिकारियों ने बताया कि तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण कागजात बरामद हुए हैं। इन दस्तावेजों की विस्तृत जांच के बाद संपत्ति, लेनदेन और संभावित आय के स्रोत से जुड़े और सुराग मिलने की उम्मीद है।
छपरा में प्रतिनियुक्ति के दौरान लगे थे आरोप
अजीत अमर ने सरकारी सेवा में आने के बाद सहरसा में योगदान दिया था। बाद में उन्हें सारण यानी छपरा में डीपीओ योजना एवं लेखा के पद पर प्रतिनियुक्त किया गया।
इसी दौरान उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के माध्यम से अवैध धन अर्जित करने के आरोप सामने आए थे। स्थानीय प्रशासन की ओर से कराई गई जांच के बाद उन्हें वापस उनके मूल पदस्थापन स्थान सहरसा भेज दिया गया था।
अब EOU ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच तेज कर दी है। एजेंसी का दावा है कि उपलब्ध आय और सामने आई संपत्तियों के बीच महत्वपूर्ण अंतर मिला है।
वेतन और संपत्ति के बीच अंतर पर जांच
EOU की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, करीब साढ़े चार साल के सेवाकाल में अजीत अमर को वेतन से लगभग 38 लाख रुपये प्राप्त हुए। इसके मुकाबले जांच में जमीन, मकान, आभूषण और वाहनों सहित कई संपत्तियों का पता चला है।
हालांकि, किसी भी संपत्ति को अवैध या आय से अधिक मानने का अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल EOU दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित संपत्तियों की खरीद और निर्माण में इस्तेमाल रकम का वास्तविक स्रोत क्या था। बरामद दस्तावेज इस जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
आय से अधिक संपत्ति के मामले में EOU अब बरामद दस्तावेजों और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान करेगी। बैंक खातों, जमीन के कागजात, खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है।
यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो मामले में आगे कानूनी कार्रवाई बढ़ेगी। फिलहाल छापेमारी में सामने आए दस्तावेजों की जांच जारी है और एजेंसी की विस्तृत रिपोर्ट के बाद तस्वीर और साफ होने की संभावना है।
