पटना में कॉलेज हॉस्टल के पास शराब की बड़ी खेप, 1786 बोतल बरामद
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👉 WhatsApp से जुड़ेंपटना के प्रतिष्ठित बीएन कॉलेज हॉस्टल के पास शराब की बड़ी खेप मिलने से हड़कंप मच गया। मद्य निषेध विभाग ने जर्जर और खाली पड़े भवन में छिपाकर रखी गई शराब की बड़ी खेप बरामद की है। कार्रवाई के दौरान कुल 1786 बोतलें मिलीं, जिनमें करीब 354 लीटर शराब थी। जब्त शराब की अनुमानित कीमत 4.30 लाख रुपये बताई जा रही है। हालांकि छापेमारी की भनक लगते ही तस्कर मौके से फरार हो गए।
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद भी तस्करी के मामले लगातार जांच एजेंसियों के सामने चुनौती बने हुए हैं। बीएन कॉलेज के हॉस्टल के पास इतनी बड़ी मात्रा में शराब मिलने के बाद अब विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि खेप कहां से आई और इसे यहां किसने छिपाया था।
जर्जर भवन में छिपाकर रखी थी शराब
मद्य निषेध विभाग के अधिकारियों को सूचना मिली थी कि बीएन कॉलेज हॉस्टल के आसपास शराब की एक बड़ी खेप छिपाकर रखी गई है। सूचना मिलने के बाद शुक्रवार शाम इंस्पेक्टर नरेंद्र कुमार के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई शुरू की।
टीम ने हॉस्टल के समीप खाली पड़े एक जर्जर भवन की तलाशी ली। तलाशी के दौरान वहां अलग-अलग जगहों पर रखी 1786 शराब की बोतलें बरामद हुईं।
अधिकारियों के अनुसार, बरामद शराब की कुल मात्रा करीब 354 लीटर है। इसकी बाजार कीमत लगभग 4.30 लाख रुपये आंकी गई है। इतनी बड़ी खेप मिलने के बाद विभाग ने आसपास के इलाके में भी जांच की।
छापेमारी से पहले फरार हुए तस्कर
मद्य निषेध विभाग की टीम जब मौके पर पहुंची, उससे पहले ही शराब तस्करों को कार्रवाई की भनक लग गई। इसके बाद आरोपी वहां से भागने में सफल रहे।
फिलहाल इस मामले में किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हुई है। विभाग की टीम अब शराब की खेप से जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी है।
अधिकारियों को आशंका है कि तस्करों ने जानबूझकर हॉस्टल के समीप खाली और जर्जर भवन को शराब छिपाने के लिए चुना, ताकि किसी को आसानी से संदेह न हो।
कहां से आई शराब, किसका है नेटवर्क?
बरामदगी के बाद जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब पटना के बीएन कॉलेज हॉस्टल के पास कैसे पहुंची।
मद्य निषेध विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि शराब कहां से लाई गई थी, इसे हॉस्टल के पास किसने पहुंचाया और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
जांच टीम आसपास के इलाकों में मौजूद लोगों से भी जानकारी जुटा सकती है। इसके साथ ही शराब की खेप से जुड़े संभावित सप्लायर और स्थानीय नेटवर्क की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ बिहार उत्पाद अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
2016 से बिहार में लागू है पूर्ण शराबबंदी
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने अप्रैल 2016 में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी। इसके बाद राज्य में शराब की बिक्री, भंडारण और सेवन पर कानूनी प्रतिबंध लगाया गया।
इसके बावजूद समय-समय पर अलग-अलग जिलों में शराब की अवैध खेप बरामद होती रही है। बीएन कॉलेज हॉस्टल के पास हुई यह बरामदगी भी इसी तरह की कार्रवाई का हिस्सा है।
मद्य निषेध विभाग के लिए अब चुनौती सिर्फ शराब बरामद करना नहीं, बल्कि इसके पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क तक पहुंचना है।
पटना में 22 किलो गांजे के साथ दो गिरफ्तार
इधर पटना में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक अन्य कार्रवाई में एसटीएफ और पुलिस को सफलता मिली है। रामकृष्णानगर इलाके में 22 किलोग्राम गांजे के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी नेपाल बॉर्डर से बस के जरिए गांजे की खेप लेकर पटना आ रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अररिया जिले के फारबिसगंज निवासी सोनू कुमार और फलका बाजार निवासी रूपेश कुमार के रूप में हुई है।
एसटीएफ को पहले सूचना मिली थी कि नेपाल सीमा से भारी मात्रा में गांजा पटना पहुंचाया जा रहा है। इसके बाद एसटीएफ ने रामकृष्णानगर थाने की पुलिस को जानकारी दी।
बस की डिक्की से बरामद हुआ गांजा
सूचना मिलने के बाद रामकृष्णानगर थाना पुलिस ने नेपाल बॉर्डर से पटना की ओर आने वाली बसों की जांच शुरू की। गुरुवार देर शाम एक बस को रोककर उसकी तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान बस की डिक्की से 22 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने बस में मौजूद यात्रियों से पूछताछ की, जिसके बाद दो संदिग्धों की पहचान की गई।
दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उनके पास से दो मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। बरामद गांजे की अनुमानित कीमत करीब 12 लाख रुपये बताई गई है।
शराब और गांजा तस्करी पर जांच तेज
पटना में एक ही समय में शराब और गांजा तस्करी के खिलाफ हुई कार्रवाई ने नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर फिर सवाल खड़े किए हैं।
एक तरफ बीएन कॉलेज हॉस्टल के पास से 1786 शराब की बोतलें बरामद हुईं, तो दूसरी ओर रामकृष्णानगर में 22 किलो गांजे की खेप पकड़ी गई। दोनों मामलों में जांच एजेंसियां अलग-अलग नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं।
बीएन कॉलेज मामले में अभी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। वहीं गांजा बरामदगी के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अब पुलिस और मद्य निषेध विभाग की जांच से यह स्पष्ट होगा कि इन मामलों के पीछे कौन लोग सक्रिय थे और नशीले पदार्थों की सप्लाई का नेटवर्क कितना बड़ा है।
