BJP MLC देवेश कुमार का अचानक इस्तीफा, क्या दीपक प्रकाश के लिए खाली हुई सीट?
BJP MLC देवेश कुमार का अचानक इस्तीफा बिहार की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है। BJP MLC देवेश कुमार का कार्यकाल मार्च 2027 तक बाकी था, लेकिन उन्होंने समय से पहले ही विधान परिषद की सदस्यता छोड़ दी। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या यह सीट राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और वर्तमान पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के लिए खाली की गई है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की नजरें आगामी राजनीतिक घटनाक्रम पर टिक गई हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे बिहार की बदलती रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं।
मार्च 2027 तक था कार्यकाल, फिर अचानक क्यों दिया इस्तीफा?
देवेश कुमार का विधान परिषद सदस्य के रूप में कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक निर्धारित था। ऐसे में तय समय से पहले इस्तीफा देना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं में यह संभावना जताई जा रही है कि यह सीट मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने के लिए खाली कराई गई हो। हालांकि, इस पर बीजेपी, एनडीए या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले पर तस्वीर और साफ हो सकती है।
दीपक प्रकाश के नाम की चर्चा क्यों तेज हुई?
दीपक प्रकाश वर्तमान में बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उन्हें तय समय सीमा के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना आवश्यक है।
इसी वजह से देवेश कुमार के इस्तीफे को इस संभावित राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि यह पूरी तरह राजनीतिक अटकलें हैं और अंतिम फैसला संबंधित दलों और चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
2022 के शराबबंदी विवाद में भी आए थे चर्चा में
देवेश कुमार इससे पहले जुलाई 2022 में शराबबंदी कानून से जुड़े एक मामले को लेकर सुर्खियों में रहे थे।
एक सड़क दुर्घटना के बाद पाटलिपुत्र थाना पहुंचने पर पुलिस को उन पर शराब सेवन का संदेह हुआ था। जांच के लिए लिए गए रक्त नमूने में शराब की पुष्टि होने की बात सामने आई थी।
हालांकि, देवेश कुमार ने उस समय सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया था। उनका कहना था कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाने की कोशिश की गई।
राबड़ी देवी के साथ सदन में हुई थी तीखी बहस
फरवरी 2026 में बिहार विधान परिषद के बजट सत्र के दौरान देवेश कुमार एक बार फिर चर्चा में आए।
एक आपराधिक घटना को लेकर विपक्ष के विरोध के बीच उनकी पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से तीखी बहस हुई थी। राबड़ी देवी ने उन पर अमर्यादित भाषा के प्रयोग का आरोप लगाया था।
वहीं देवेश कुमार ने कहा था कि विपक्षी सदस्यों का व्यवहार उनके प्रति आक्रामक था और उन्होंने केवल अपनी बात रखी थी।
पत्रकारिता से राजनीति तक का लंबा सफर
देवेश कुमार का राजनीतिक सफर काफी अलग रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की थी और बाद में सक्रिय राजनीति में आए।
उनका परिवार भी लंबे समय से सार्वजनिक जीवन से जुड़ा रहा है। उनके दादा स्वर्गीय यमुना कार्जी स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व कांग्रेस विधायक रहे थे।
उन्होंने एमए और एमफिल तक शिक्षा प्राप्त की तथा छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े। संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए वे बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष और बाद में मिजोरम प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे।
समर्थकों में बढ़ी उत्सुकता, गांव में भी चर्चा
इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद समस्तीपुर जिले के पूसा प्रखंड स्थित उनके पैतृक गांव महमदपुर देवपार समेत आसपास के क्षेत्रों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
स्थानीय समर्थकों का कहना है कि यह फैसला अचानक आया है, इसलिए इसके पीछे की वास्तविक वजह जानने की उत्सुकता बनी हुई है।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि मंत्री पद से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया हो सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या खाली हुई विधान परिषद सीट पर दीपक प्रकाश को उम्मीदवार बनाया जाएगा या एनडीए कोई दूसरा फैसला लेगा।
फिलहाल सभी की निगाहें बीजेपी नेतृत्व और एनडीए की अगली घोषणा पर टिकी हैं। यदि ऐसा होता है तो यह बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश माना जाएगा।
