दीपक प्रकाश का MLC बनना तय? देवेश के इस्तीफे से बदला बिहार का सियासी समीकरण

 


दीपक प्रकाश MLC बनाए जाने की चर्चा बिहार की राजनीति में तेजी से चल रही है। दीपक प्रकाश MLC बनने की संभावनाएं उस समय और मजबूत मानी जाने लगीं, जब बीजेपी के विधान पार्षद देवेश कुमार ने अपने कार्यकाल की समाप्ति से पहले ही इस्तीफा दे दिया। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा कि क्या यह फैसला पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद पहुंचाने की रणनीति का हिस्सा है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक बीजेपी, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले पर तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकती है। फिलहाल घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति को नई चर्चा दे दी है।

देवेश कुमार के इस्तीफे से क्यों बढ़ी चर्चाएं?

बीजेपी के विधान पार्षद देवेश कुमार ने शुक्रवार को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनका मनोनयन वर्ष 2021 में राज्यपाल कोटे से हुआ था और उनका कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक था।

उन्होंने अपना इस्तीफा विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा। उस दौरान प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी भी उनके साथ मौजूद थे।

इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई कि खाली होने वाली सीट पर दीपक प्रकाश को मनोनीत किया जा सकता है।

दीपक प्रकाश के लिए MLC बनना क्यों जरूरी माना जा रहा है?

दीपक प्रकाश वर्तमान में बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं, लेकिन वे अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।

संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति बिना विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने सीमित अवधि तक ही मंत्री रह सकता है। इसी संवैधानिक व्यवस्था को देखते हुए उनके विधान परिषद पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, सरकार या एनडीए की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बढ़ी हलचल

दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है।

याचिका में दावा किया गया है कि वे निर्धारित अवधि से अधिक समय तक बिना किसी सदन के सदस्य बने मंत्री पद पर हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 27 अगस्त को निर्धारित है।

इसी बीच देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद राजनीतिक चर्चाओं ने और गति पकड़ ली है। हालांकि, सरकार ने इस मामले पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

उपेंद्र कुशवाहा की भूमिका पर क्यों हो रही चर्चा?

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी चल रही है कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख और सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने इस पूरे घटनाक्रम में सक्रिय भूमिका निभाई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद दिल्ली और पटना स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई। हालांकि, इन बैठकों या चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

दिल्ली से लौटने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी मुलाकात की। इसके बाद देवेश कुमार के इस्तीफे की खबर सामने आई, जिससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गईं।

देवेश कुमार और दीपक प्रकाश ने क्या कहा?

इस पूरे घटनाक्रम पर देवेश कुमार ने मीडिया के सवालों का कोई सीधा जवाब नहीं दिया।

वहीं, दरभंगा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दीपक प्रकाश ने भी कहा कि उन्हें देवेश कुमार के इस्तीफे के कारणों की जानकारी नहीं है और वे इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।

दोनों नेताओं के बयान के बाद भी राजनीतिक चर्चाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।

क्या अब राज्यपाल कोटे से होगा मनोनयन?

राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार यदि देवेश कुमार का इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया जाता है तो विधान परिषद की सीट रिक्त घोषित की जाएगी।

इसके बाद राज्यपाल कोटे से नए सदस्य के मनोनयन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। राजनीतिक हलकों में दीपक प्रकाश का नाम सबसे आगे माना जा रहा है, लेकिन अंतिम फैसला संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

बिहार की राजनीति में क्या पड़ सकता है असर?

यदि दीपक प्रकाश विधान परिषद के सदस्य बनते हैं तो यह एनडीए के भीतर राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

दूसरी ओर, विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक दृष्टि से देख रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि देवेश कुमार का इस्तीफा कब स्वीकार होता है और रिक्त सीट पर किसे मनोनीत किया जाता है।

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