बिहार छात्र प्रदर्शन में AK-47 फायरिंग पर सरकार की बड़ी सफाई
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👉 WhatsApp से जुड़ेंबिहार में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और सीवान में AK-47 से फायरिंग का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। छात्र प्रदर्शन को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर पुलिस पर अनुचित बल प्रयोग के आरोपों से इनकार किया है। सरकार ने कहा कि कई जगह हालात बिगड़ने के बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आवश्यक कदम उठाए। सीवान में AK-47 से चली गोलियों को लेकर सरकार ने कहा कि कांस्टेबल ने भीड़ में फंसने के बाद हवा में चार राउंड फायर किए थे।
AK-47 फायरिंग पर बिहार सरकार ने क्या कहा?
राज्य सरकार के हलफनामे के मुताबिक, सीवान में तैनात एक कांस्टेबल ने AK-47 से चार गोलियां हवा में चलाई थीं। सरकार का कहना है कि फायरिंग उस समय हुई, जब पुलिसकर्मी भीड़ के बीच फंस गया था।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि AK-47 से चली गोलियों से किसी प्रदर्शनकारी के घायल होने की जानकारी नहीं है। साथ ही, इस हथियार के इस्तेमाल को लेकर पुलिस विभाग की ओर से निर्देश जारी किए जाने की बात भी हलफनामे में कही गई है।
घटना के बाद संबंधित कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई। सरकार के अनुसार, कानून-व्यवस्था संभालने के दौरान ऐसे हथियार का इस्तेमाल सामान्य भीड़ नियंत्रण की स्थिति में नहीं किया जाना चाहिए।
9 MM पिस्टल से फायरिंग में तीन प्रदर्शनकारी घायल
हलफनामे में सीवान की एक अन्य फायरिंग का भी उल्लेख किया गया है। सरकार के अनुसार, हाथी चौक के पास एक ASI ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अपनी 9 MM पिस्टल से दो राउंड फायर किए।
इस फायरिंग में तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आईं। हालांकि, सरकार ने कहा कि इन तीनों को AK-47 से गोली नहीं लगी थी और वे उस जगह मौजूद नहीं थे, जहां AK-47 से फायरिंग हुई थी।
मामले की बैलिस्टिक जांच भी जारी बताई गई है। जांच में गोली किस हथियार से चली, कितनी दूरी से फायरिंग हुई और फायरिंग का कोण क्या था, जैसे तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।
69 FIR और करीब 500 गिरफ्तारियों का जिक्र
बिहार सरकार ने अपने हलफनामे में 22 से 25 जुलाई के बीच हुई घटनाओं से जुड़ी कार्रवाई का भी विवरण दिया है। सरकार के अनुसार, इस अवधि में राज्यभर में 69 FIR दर्ज की गईं और करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बिना आपराधिक इतिहास वाले 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा किया गया। इसके अलावा 75 किशोरों को किशोर न्याय बोर्ड की प्रक्रिया के तहत छोड़े जाने की बात कही गई है।
सरकार ने कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र के ऐसे बच्चों, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, को साधारण बॉन्ड पर रिहा किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने भी बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले नाबालिग प्रदर्शनकारियों की रिहाई को लेकर निर्देश दिए थे।
कई जिलों में हिंसा और पथराव का दावा
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर स्थिति हिंसक हो गई थी। गांधी मैदान, पटना, जहानाबाद, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज और सीवान समेत कई इलाकों का हलफनामे में उल्लेख किया गया है।
छपरा में 25 जुलाई को प्रदर्शन शुरू में शांतिपूर्ण रहने के बाद भीड़ में असामाजिक तत्वों के शामिल होने और पथराव व तोड़फोड़ शुरू होने का सरकार ने दावा किया है।
सरकार के मुताबिक, इस दौरान दो BDO, तीन इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और 11 कांस्टेबल घायल हुए। एक BDO की आंख में गंभीर चोट आने और दूसरे BDO के सिर पर भारी वस्तु से चोट लगने की बात भी कही गई है।
पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का किया इस्तेमाल
हलफनामे में सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था। सरकार के अनुसार, इन कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को चोटें भी आईं।
राज्य सरकार ने पूरे प्रदर्शन के दौरान 157 पुलिसकर्मियों और सात सरकारी कर्मचारियों के घायल होने का दावा किया है।
सरकार ने प्रदर्शन के पीछे विभिन्न छात्र संगठनों के आह्वान का भी उल्लेख किया है। हालांकि, इन दावों और पुलिस कार्रवाई को लेकर याचिकाकर्ताओं की ओर से अलग पक्ष रखा गया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दोनों पक्षों की दलीलें महत्वपूर्ण होंगी।
वीडियो फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित
बिहार सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप प्रदर्शन से जुड़े वीडियो फुटेज और दूसरे रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार के अनुसार, प्रदर्शनकारियों से जुड़ी निजी जानकारी और डिजिटल डेटा को फिलहाल सार्वजनिक या सोशल मीडिया पर साझा नहीं किया जा रहा है। छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों की पहचान संबंधी जानकारी की सुरक्षा का भी दावा किया गया है।
इससे मामले की आगे होने वाली न्यायिक जांच में वीडियो और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में आगे क्या होगा?
बिहार में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई इस मामले का अगला महत्वपूर्ण चरण है। सरकार ने हलफनामे के जरिए अपने ऊपर लगे अनुचित बल प्रयोग के आरोपों का खंडन किया है।
वहीं, इससे पहले राज्य सरकार ने प्रदर्शन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई और कुछ मामलों को वापस लेने की घोषणा भी की थी।
अब अदालत के सामने पुलिस फायरिंग, प्रदर्शनकारियों की चोट, गिरफ्तारियां और कानून-व्यवस्था से जुड़े पूरे घटनाक्रम का पक्ष रखा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई से इस मामले में कानूनी स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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