अशोक धाम भगदड़: प्रशांत किशोर बोले- 4 लाख मुआवजा काफी नहीं, तय हो जवाबदेही
📌 पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ताज़ा ख़बरें सीधे अपने मोबाइल पर पाएं!
👉 WhatsApp से जुड़ें
लखीसराय अशोक धाम भगदड़ के बाद मंगलवार को जन सुराज पार्टी के संयोजक और बांकीपुर के नवनिर्वाचित सह प्रशांत किशोर उर्फ PK लखीसराय पहुंचे। लखीसराय अशोक धाम भगदड़ में घायल शिवभक्तों का हाल जानने के लिए उन्होंने सदर अस्पताल का दौरा किया। इसके बाद प्रशांत किशोर मृतकों के परिजनों से मिलने उनके घर पहुंचे और घटना को लेकर प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की मांग की। प्रशांत किशोर ने कहा कि मृतकों के परिवारों को चार-चार लाख रुपये की सहायता देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद अब तक किसी अधिकारी या कर्मचारी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
सदर अस्पताल पहुंचकर घायलों से मिले प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर ने लखीसराय सदर अस्पताल पहुंचकर भगदड़ में घायल हुए लोगों से मुलाकात की। उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत कर इलाज की स्थिति के बारे में जानकारी ली। घायलों से मिलने के बाद PK ने मृतकों के परिजनों से भी मुलाकात की। उन्होंने परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिनकी जिम्मेदारी बनती है, उनके खिलाफ कार्रवाई भी जरूरी है। प्रशांत किशोर ने मुआवजे के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि सिर्फ आर्थिक सहायता देकर मामले की खानापूर्ति नहीं की जा सकती। उनके मुताबिक, हादसे की परिस्थितियों और प्रशासनिक तैयारियों की भी जांच होनी चाहिए।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
लखीसराय स्थित अशोक धाम शिव मंदिर में तीसरी सोमवारी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचे थे। भारी भीड़ के कारण मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में दबाव बढ़ गया। इसी दौरान बिजली का एक पोल गिरने के बाद करंट फैलने की अफवाह फैल गई। अफवाह के बीच लोगों में अचानक भगदड़ मच गई। जान बचाने के लिए श्रद्धालु तेजी से भागने लगे। इस दौरान कई लोग जमीन पर गिर गए। भीड़ के दबाव और अफरा-तफरी के बीच लोग एक-दूसरे को कुचलते हुए आगे बढ़ते रहे। हादसे में सात महिला शिवभक्तों की मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक लोग घायल बताए गए। घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार और पुलिस अधीक्षक प्रेरणा कुमार मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर स्थिति को नियंत्रित किया।
विजय कुमार सिन्हा ने भी मानी प्रशासनिक लापरवाही
हादसे के बाद स्थानीय विधायक और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा लखीसराय पहुंचे। उन्होंने सदर अस्पताल में भर्ती घायलों से मुलाकात की और उनके इलाज की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। मीडिया से बातचीत में विजय सिन्हा ने प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा कि तीसरी सोमवारी के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना थी, लेकिन भीड़ और दबाव का सही अनुमान लगाने में प्रशासन विफल रहा। विजय सिन्हा ने यह भी कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच के आधार पर जिम्मेदार लोगों को चिन्हित कर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
PK ने विजय सिन्हा और ललन सिंह पर भी साधा निशाना
प्रशांत किशोर ने घटना को लेकर स्थानीय विधायक विजय कुमार सिन्हा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि इतनी बड़ी घटना के बाद केवल मुआवजे की घोषणा से जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। PK ने प्रशासनिक व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन को लेकर ठोस व्यवस्था करनी होगी। उनका जोर इस बात पर रहा कि हादसे के लिए जिम्मेदारी तय किए बिना ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना मुश्किल होगा।
मुख्यमंत्री ने किया चार-चार लाख रुपये की सहायता का ऐलान
हादसे पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी दुख जताया। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनके आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। सरकार की ओर से सहायता राशि की घोषणा के बीच अब हादसे की प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मृतकों के परिवार और स्थानीय लोगों की नजर जांच की कार्रवाई पर है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जताया दुख
लखीसराय में हुए हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक व्यक्त किया। उन्होंने घटना को बेहद दुखद बताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया के बाद हादसा राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच में किन कारणों को जिम्मेदार माना जाता है और प्रशासनिक स्तर पर क्या कार्रवाई होती है।
सदर अस्पताल रोड पर लोगों का फूटा गुस्सा
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी भी देखने को मिली। सदर अस्पताल के पास लोगों ने करीब 30 मिनट तक सड़क जाम कर विरोध जताया। स्थानीय लोगों का आरोप था कि मंदिर परिसर और आसपास पर्याप्त सुरक्षा एवं भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था नहीं थी। लोगों ने प्रशासनिक दावों पर भी सवाल उठाए। अब हादसे के बाद सरकार और प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ घायलों का बेहतर इलाज और मृतकों के परिवारों को सहायता पहुंचाना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ घटना की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी तय करना भी अहम है।