बिहार में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना होगा आसान, अब नहीं चलेगी मनमानी

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बिहार में जन्म, मृत्यु और वंशावली प्रमाण पत्र बनवाने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। बिहार सरकार ने अंचल कार्यालयों में नोटरी पब्लिक से तैयार किए गए शपथपत्र को मान्यता देने के लिए जरूरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। बिहार सरकार के इस आदेश के बाद नोटरी से बने वैध शपथपत्र को लेकर लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों के निपटारे में भी तेजी आने की उम्मीद है।

सरकार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि नियम के अनुसार तैयार नोटरी शपथपत्र को स्वीकार करने में अनावश्यक आपत्ति नहीं की जाए। इससे लोगों को एक ही काम के लिए बार-बार अंचल कार्यालय के चक्कर लगाने से राहत मिल सकती है।

जन्म-मृत्यु और वंशावली प्रमाण पत्र में लागू होगा निर्देश

नए निर्देश का सीधा संबंध जन्म, मृत्यु और वंशावली प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों से है। ऐसे मामलों में कई बार आवेदकों को शपथपत्र प्रस्तुत करना पड़ता है।

अब नोटरी पब्लिक के सामने विधिवत तैयार और दर्ज किए गए शपथपत्र को स्वीकार करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है। संबंधित कार्यालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वैध दस्तावेज को केवल नोटरी से बनाए जाने के आधार पर अस्वीकार न किया जाए।

इससे प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में अनावश्यक अड़चन कम होने की संभावना है।

सरकार ने अधिकारियों को क्या निर्देश दिया?

बिहार सरकार के संयुक्त सचिव नीतीश कुमार की ओर से इस संबंध में योजना एवं विकास विभाग, पटना के सचिव और लखीसराय के जिलाधिकारी को आदेश भेजा गया है।

निर्देश में जन्म, मृत्यु और वंशावली प्रमाण पत्र से जुड़े काम में नोटरी पब्लिक द्वारा बनाए गए शपथपत्र को मान्यता देने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नियमों के तहत तैयार दस्तावेज को स्वीकार करने में स्थानीय स्तर पर बेवजह की परेशानी न हो। यदि किसी आवेदन में अन्य कानूनी या दस्तावेजी कमी है तो उसका परीक्षण अलग आधार पर किया जा सकता है।

आरा के अधिवक्ता के आवेदन से शुरू हुआ मामला

इस पूरे मामले की शुरुआत आरा के अधिवक्ता प्रमोद कुमार राय की ओर से किए गए आवेदन से हुई। उन्होंने नोटरी पब्लिक से तैयार किए गए शपथपत्र को मान्यता देने के संबंध में राष्ट्रपति सचिवालय, नई दिल्ली में आवेदन भेजा था।

आवेदन सामने आने के बाद मामले पर राज्य स्तर पर विचार किया गया। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए।

इस घटनाक्रम के बाद जन्म, मृत्यु और वंशावली प्रमाण पत्र बनवाने के दौरान नोटरी शपथपत्र को लेकर आने वाली शिकायतों पर ध्यान देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

नोटरी से बने शपथपत्र को क्यों मानना होगा?

सरकारी आदेश में मुख्य सचिव की ओर से पहले जारी किए गए निर्देश का भी उल्लेख किया गया है। इसमें नोटरी पब्लिक द्वारा बनाए और दर्ज किए गए शपथपत्र की कानूनी स्थिति का हवाला दिया गया है।

सरकार के निर्देश का मतलब है कि अधिकृत नोटरी के समक्ष विधिवत तैयार किए गए शपथपत्र को निर्धारित नियमों के अनुसार स्वीकार किया जाना चाहिए।

किसी दस्तावेज को सिर्फ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता कि उसे नोटरी पब्लिक के समक्ष तैयार कराया गया है। हालांकि, शपथपत्र की वैधता और उसमें दी गई जानकारी की जांच संबंधित नियमों के अनुसार की जा सकती है।

अंचल कार्यालयों में लोगों को मिलेगी राहत

जन्म, मृत्यु या वंशावली प्रमाण पत्र के लिए अंचल कार्यालय जाने वाले लोगों के लिए यह बदलाव उपयोगी हो सकता है। खासकर उन मामलों में जहां शपथपत्र को लेकर कर्मचारी और आवेदक के बीच भ्रम की स्थिति बनती है।

अगर नोटरी से तैयार वैध शपथपत्र को स्वीकार करने में अनावश्यक आपत्ति नहीं की जाती है तो आवेदन की प्रक्रिया ज्यादा आसान हो सकती है।

इससे लोगों का समय बचने के साथ-साथ कार्यालयों में अनावश्यक भीड़ और बार-बार दस्तावेज जमा करने की समस्या भी कम होने की उम्मीद है।

बेवजह परेशानी हुई तो अधिकारी करेंगे समाधान

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नोटरी पब्लिक के शपथपत्र को लेकर यदि किसी स्तर पर अनावश्यक समस्या उत्पन्न होती है तो उसे दूर किया जाना चाहिए।

अधिकारियों को नियमों के अनुरूप तैयार शपथपत्र स्वीकार करने की दिशा में जरूरी कदम उठाने होंगे। इसका उद्देश्य आवेदकों को प्रक्रिया संबंधी परेशानियों से बचाना है।

हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि हर शपथपत्र बिना जांच के स्वीकार होगा। दस्तावेज में तथ्यात्मक कमी, गलत जानकारी या अन्य कानूनी समस्या होने पर संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

प्रमाण पत्र बनने में देरी कम होने की उम्मीद

जन्म, मृत्यु और वंशावली प्रमाण पत्र कई सरकारी और निजी कामों के लिए जरूरी दस्तावेज होते हैं। इन प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन करने वाले लोगों को समय पर दस्तावेज मिलना महत्वपूर्ण है।

नोटरी शपथपत्र को लेकर स्पष्ट निर्देश आने से प्रक्रिया में एकरूपता आने की उम्मीद है। इससे स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और आवेदकों के बीच होने वाले विवाद या भ्रम को कम किया जा सकता है।

अब संबंधित कार्यालयों में इस निर्देश का पालन किस तरह होता है, यह महत्वपूर्ण रहेगा। अगर नियमों को सही तरीके से लागू किया जाता है तो बिहार के लोगों को प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में व्यावहारिक राहत मिल सकती है।

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