NEET मुद्दे पर संसद में टकराव, इस्तीफे की मांग पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने


 

NEET पेपर लीक का मुद्दा बुधवार को संसद के मानसून सत्र में फिर से केंद्र में रहा। NEET पेपर लीक और छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। एक ओर केंद्र सरकार ने कहा कि वह इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है, वहीं विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि इसके बिना निष्पक्ष चर्चा संभव नहीं होगी।

राज्यसभा और संसद परिसर में इस मुद्दे को लेकर दिनभर राजनीतिक बयानबाजी जारी रही। सरकार ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया।

सरकार ने क्या कहा?

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि सरकार शुरू से ही नीट परीक्षा और उससे जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार रही है। उन्होंने कहा कि चर्चा किस प्रारूप में होगी, इसका निर्णय सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद सभापति के नेतृत्व में लिया जाएगा।

रिजिजू ने कहा कि किसी भी चर्चा के लिए पहले से शर्तें रखना संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, सरकार युवाओं और छात्रों से जुड़े हर सवाल का जवाब देने और उठाए गए कदमों की जानकारी सदन के माध्यम से देने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चर्चा की मांग करने के साथ-साथ नारेबाजी कर सदन की कार्यवाही भी बाधित की जा रही है, जिससे संसद का कामकाज प्रभावित होता है।

जेपी नड्डा ने विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप

राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने भी विपक्ष के रवैये की आलोचना की। उन्होंने कहा कि संसद लोकतांत्रिक संवाद का मंच है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी दलों की जिम्मेदारी है।

नड्डा के अनुसार, सरकार किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा से पीछे नहीं हट रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांत पर काम कर रही है तथा NEET से जुड़े सभी पहलुओं पर चर्चा के लिए तैयार है।

उन्होंने विपक्ष पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि संसद की कार्यवाही बाधित करना उचित तरीका नहीं है।

विपक्ष ने क्यों दोहराई इस्तीफे की मांग?

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में निष्पक्ष चर्चा चाहती है तो पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना चाहिए।

खरगे का कहना था कि मंत्री के पद पर बने रहने की स्थिति में निष्पक्ष बहस संभव नहीं होगी। उन्होंने राज्यसभा के नियम 267 का भी उल्लेख किया, जिसके तहत विशेष परिस्थितियों में सूचीबद्ध कार्यवाही रोककर किसी महत्वपूर्ण विषय पर तत्काल चर्चा कराई जा सकती है।

बाद में डीएमके नेता तिरुची शिवा ने भी इस मुद्दे को "असाधारण परिस्थिति" बताते हुए नियम 267 के तहत चर्चा कराने की मांग का समर्थन किया।

नियम 267 को लेकर भी हुई बहस

विपक्ष की मांग पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने पूर्व में दिए गए सभापति के निर्णय का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नियम 267 का उपयोग केवल अत्यंत दुर्लभ परिस्थितियों में किया जाता रहा है और इसका प्रयोग सामान्य प्रक्रिया के स्थान पर नहीं किया जाता।

हालांकि विपक्ष का तर्क था कि NEET पेपर लीक और इससे जुड़े छात्रों के मुद्दे इतने महत्वपूर्ण हैं कि इस मामले को भी विशेष परिस्थिति के रूप में देखा जाना चाहिए।

फिलहाल सरकार और विपक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मुद्दे पर संसद में औपचारिक चर्चा किस रूप में आगे बढ़ती है और क्या दोनों पक्ष किसी सहमति पर पहुंच पाते हैं।

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