राहुल गांधी की सरकार से 3 बड़ी मांगें, NEET विवाद पर बढ़ा सियासी घमासान


 

राहुल गांधी ने संसद के मानसून सत्र के दौरान राहुल गांधी ने NEET पेपर लीक, छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तीन प्रमुख मांगें सामने रखीं। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की जांच और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक माफी की मांग शामिल है। इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

इससे एक दिन पहले संसद परिसर के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन अगले दिन कांग्रेस ने इस मुद्दे को और आक्रामक तरीके से उठाया।

राहुल गांधी ने रखीं कौन-सी तीन प्रमुख मांगें?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने सबसे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। उनका आरोप था कि लगातार सामने आए परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के मामलों ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

दूसरी मांग छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़ी थी। राहुल गांधी ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान जिन पुलिसकर्मियों या अन्य अधिकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

तीसरी मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी थी। राहुल गांधी ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था को लेकर पैदा हुई स्थिति से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों के प्रति सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी की।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर क्या बोले राहुल गांधी?

राहुल गांधी ने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कई बार प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं का असर बड़ी संख्या में छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ा है।

उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में खर्च किए जाने वाले बजट का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इतने बड़े निवेश के बावजूद यदि परीक्षा प्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं तो व्यापक सुधार की आवश्यकता है।

राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। हालांकि सरकार की ओर से इन आरोपों पर अलग रुख सामने आया है और उसने परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाने का दावा किया है।

छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई पर बढ़ा विवाद

राहुल गांधी ने 21 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ पुलिस का व्यवहार गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कुछ तस्वीरें भी दिखाईं और पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग दोहराई।

वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भी प्रदर्शन के दौरान कथित बल प्रयोग को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती बरती गई।

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि उसने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की और किसी प्रकार की अनुचित कार्रवाई नहीं की गई।

संसद में क्यों बना राजनीतिक टकराव का मुद्दा?

NEET पेपर लीक और छात्र आंदोलन का मुद्दा मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच प्रमुख विवाद का विषय बना हुआ है। विपक्ष लगातार इस मामले पर विस्तृत चर्चा और जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह संसद में चर्चा के लिए तैयार है।

इस बीच समाजवादी पार्टी सहित कई विपक्षी दल भी छात्रों के मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं। संसद के भीतर और बाहर इस विषय पर लगातार बयानबाजी जारी है।

आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद की कार्यवाही और राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण बना रह सकता है। यदि इस पर विस्तृत चर्चा होती है, तो सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने पक्ष को विस्तार से सदन के सामने रख सकते हैं।

नोट: इस समाचार में विभिन्न राजनीतिक नेताओं द्वारा दिए गए सार्वजनिक बयानों और आरोपों का उल्लेख किया गया है। संबंधित आरोपों पर सभी पक्षों के आधिकारिक रुख को भी शामिल किया गया है। मामले से जुड़े कुछ आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

Next Post Previous Post
हमसे जुड़ें
1