Sonam Wangchuk Hunger Strike: अभिजीत दीपके ने क्यों की अनशन खत्म करने की अपील?
Sonam Wangchuk Hunger Strike एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। Sonam Wangchuk Hunger Strike के 25वें दिन विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की ओर से उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई जा रही है। इसी क्रम में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दीपके ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की है। उनका कहना है कि देश को वांगचुक की आवश्यकता है और उनकी जान किसी भी कीमत पर जोखिम में नहीं पड़नी चाहिए।
इस बीच, जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में भी एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई प्रस्तावित है। याचिका में प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की सुरक्षा की मांग की गई है।
अभिजीत दीपके ने क्यों की अनशन खत्म करने की अपील?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए सोनम वांगचुक से अपना अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया।
उन्होंने कहा कि देश को वांगचुक जैसे सामाजिक कार्यकर्ता की जरूरत है और उनका जीवन बेहद महत्वपूर्ण है। दीपके के अनुसार, यदि वांगचुक अनशन समाप्त भी कर देते हैं, तब भी आंदोलन जारी रहेगा और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन चलता रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन की मांगें पूरी होने तक पीछे हटने का सवाल नहीं है। साथ ही उन्होंने समर्थकों से अपील की कि विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में रहकर किया जाए।
आंदोलन को लेकर क्या कहा गया?
अभिजीत दीपके ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रदर्शन महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के बताए शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक मार्ग पर ही आगे बढ़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा जिससे देश या आंदोलन की छवि को नुकसान पहुंचे। उनके अनुसार, सभी प्रदर्शनकारियों से कानून का पालन करते हुए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की गई है।
दीपके ने यह भी कहा कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया जाता।
दिल्ली हाईकोर्ट में किस मामले पर होगी सुनवाई?
बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका पर सुनवाई होनी है, जो जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़ी है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि 18 जुलाई को प्रदर्शन स्थल खाली कराते समय कुछ प्रदर्शनकारियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध हटाया गया, हिरासत में लिया गया और आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया।
याचिकाकर्ता ने अदालत से इन आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी अनुरोध किया गया है।
याचिका में क्या-क्या मांगें उठाई गई हैं?
याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ कथित जबरदस्ती, गैरकानूनी हिरासत, धमकी या अनावश्यक बल प्रयोग पर रोक लगाने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।
फिलहाल इन आरोपों पर अदालत में सुनवाई होनी है और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही मामले की स्थिति स्पष्ट होगी। दूसरी ओर, सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर लगातार चिंता व्यक्त की जा रही है और कई लोग उनसे अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में हाईकोर्ट की सुनवाई और आंदोलन की अगली रणनीति इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकती है।
