सीएम साइंस कॉलेज में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, 17 सूत्री मांगों पर ठप हुआ पूरा कामकाज


 

सीएम साइंस कॉलेज हड़ताल सोमवार से शुरू हो गई है। सीएम साइंस कॉलेज हड़ताल के तहत शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने अपनी लंबित 17 सूत्री मांगों के समर्थन में कार्य बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान किया है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय प्रक्षेत्र के आह्वान पर शुरू हुए इस आंदोलन का असर पूरे महाविद्यालय पर देखने को मिला। कर्मचारियों ने मुख्य द्वार पर धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे पूरे दिन शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियां प्रभावित रहीं।

17 सूत्री मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन

महाविद्यालय शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राधेश्याम झा और सचिव अनुपम कुमार झा के नेतृत्व में कर्मचारियों ने धरना शुरू किया।

नेताओं ने कहा कि वर्षों से लंबित मांगों पर सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने के कारण कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। उनका कहना है कि जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

कर्मचारियों ने 17 सूत्री मांगों में कई प्रशासनिक और वित्तीय मुद्दों को शामिल किया है।

इनमें प्रोन्नति प्रभार प्राप्त कर्मचारियों का वेतन निर्धारण कर भुगतान सुनिश्चित करना, शेष कर्मचारियों की पदस्थापना, पात्र कर्मियों को रिक्त पदों पर प्रोन्नति देना और लोक भवन, पटना द्वारा पारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना प्रमुख मांगें हैं।

इसके अलावा चतुर्थ चरण के कर्मचारियों के सप्तम वेतन के वेतनांतर का भुगतान, न्यायालय के आदेश के अनुरूप लाभ देना और एमएसीपी का शीघ्र निर्धारण करने की मांग भी उठाई गई है।

वेतन, भत्ते और सेवांत लाभ का भी उठा मुद्दा

धरना दे रहे कर्मचारियों ने कहा कि कई कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मियों को अब तक बकाया महंगाई भत्ता और अन्य वित्तीय लाभ नहीं मिले हैं।

उन्होंने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की कथित रूप से की गई कटौतियों को वापस लेने तथा सेवांत लाभ का भुगतान जल्द करने की मांग रखी है।

साथ ही वर्ष 2017 के वेतन निर्धारण सिद्धांत के आधार पर बकाया राशि का भुगतान करने और सभी कर्मचारियों को समय पर वेतन उपलब्ध कराने की भी मांग की गई।

कॉलेज का कामकाज पूरी तरह प्रभावित

हड़ताल का असर पूरे महाविद्यालय में साफ दिखाई दिया।

शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार के कारण प्रशासनिक कार्यालयों का नियमित काम प्रभावित हुआ। मुख्य द्वार पर धरना देने के कारण दिनभर सामान्य गतिविधियां बाधित रहीं।

छात्रों को विभिन्न प्रशासनिक कार्यों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। यदि हड़ताल लंबी चलती है तो शैक्षणिक गतिविधियों और परीक्षा संबंधी कार्यों पर भी असर पड़ सकता है।

आंदोलन को मिला महासंघ का समर्थन

धरना कार्यक्रम के दौरान बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के प्रक्षेत्रीय मंत्री विनय कुमार झा और जिला मंत्री हर्षवर्धन सिंह भी पहुंचे।

उन्होंने कर्मचारियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि सभी महाविद्यालयों के कर्मचारी अपनी जायज मांगों को लेकर एकजुट हैं और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

धरना में प्रवीण कुमार झा, आकाश कुमार वर्मा, आदित्य नाथ झा, जितेंद्र राम, जितेंद्र कुमार महतो, सिंदु कुमारी, ज्योति कुमारी, अनुराधा कुमारी, जरीना खातून, चंद्रकांत चौधरी, रमेश कुमार कामती, राजेश कुमार सिंह, संतोष कुमार, मिसरी साह, युगेश्वर महतो, रामशंकर भंडारी, कुमार राजर्षि अभिषेक कुमार, जयकांत कामती, सरोज कुमार चौधरी और प्रफुल्ल कुमार झा सहित कई कर्मचारी मौजूद रहे।

आगे क्या होगा?

फिलहाल कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।

अब निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार पर हैं कि वे कर्मचारियों के साथ वार्ता कर कोई समाधान निकालते हैं या नहीं। यदि जल्द बातचीत नहीं होती है तो कॉलेज की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

छात्रों और अभिभावकों को भी उम्मीद है कि दोनों पक्ष आपसी संवाद के जरिए जल्द समाधान निकालेंगे, ताकि महाविद्यालय की नियमित गतिविधियां फिर से सामान्य हो सकें।

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