बिहार MLC चुनाव: पवन सिंह-निशांत समेत उम्मीदवार आज करेंगे नामांकन, RJD से सुनील कुमार सिंह की चर्चा

Bihar MLC Election 2026 को लेकर बिहार की राजनीति में आज बेहद अहम दिन माना जा रहा है। Bihar MLC Election 2026 के तहत विधान परिषद की 10 सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख है। दिलचस्प बात यह है कि 7 जून तक इस चुनाव के लिए किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल नहीं किया था। अब सभी दलों के प्रत्याशी विधानसभा परिसर पहुंचकर रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष अपने नामांकन पत्र जमा करेंगे। आज होने वाले नामांकन पर राजनीतिक दलों, कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों की विशेष नजर बनी हुई है। खासकर एनडीए और महागठबंधन की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
NDA ने घोषित किए 9 उम्मीदवार
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने विधान परिषद चुनाव के लिए अपने 9 उम्मीदवारों के नाम पहले ही घोषित कर दिए हैं। भाजपा ने इस बार भोजपुरी गायक और चर्चित चेहरे पवन सिंह को उम्मीदवार बनाकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है। इसके अलावा भाजपा ने अपने राष्ट्रीय मीडिया सह प्रभारी संजय मयूख को लगातार तीसरी बार मौका दिया है। पार्टी ने पूर्णिया के अनिल कुमार ठाकुर और शीला प्रजापति को भी उम्मीदवार बनाया है। राजनीतिक जानकार इसे सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। जेडीयू ने भी अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवरानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद को मैदान में उतारा है। वहीं, लोजपा (रामविलास) ने अशरफ अंसारी को उम्मीदवार बनाया है।
पवन सिंह की उम्मीदवारी बनी चर्चा का विषय
इस चुनाव में सबसे अधिक चर्चा भाजपा उम्मीदवार पवन सिंह की उम्मीदवारी को लेकर हो रही है। भोजपुरी सिनेमा और संगीत जगत में लोकप्रिय पवन सिंह का राजनीति में बढ़ता प्रभाव पहले से ही चर्चा में था। विधान परिषद चुनाव में उनकी एंट्री को भाजपा के व्यापक सामाजिक और जनसंपर्क अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि लोकप्रिय चेहरों को आगे लाकर पार्टी विभिन्न वर्गों तक अपनी पहुंच मजबूत करना चाहती है।
दीपक प्रकाश को लेकर जारी अटकलें
एनडीए उम्मीदवारों की सूची आने से पहले यह चर्चा जोरों पर थी कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश को भी मौका मिल सकता है। हालांकि अंतिम सूची में उनका नाम शामिल नहीं होने के बाद कई तरह के राजनीतिक कयास लगाए जाने लगे। इसी बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी एक पद से पार्टी का अस्तित्व तय नहीं होता। उन्होंने संकेत दिया कि सहयोगी दलों को अंतिम फैसले के लिए 8 जून तक इंतजार करना चाहिए। उनके इस बयान के बाद गठबंधन के भीतर सीटों के तालमेल और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
महागठबंधन की रणनीति पर टिकी नजरें
दूसरी ओर महागठबंधन ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की औपचारिक घोषणा नहीं की है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में पूर्व एमएलसी सुनील कुमार सिंह के नाम की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद हाल ही में सिंगापुर से लौटे हैं और फिलहाल दिल्ली में मौजूद हैं। वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी दिल्ली में हैं। ऐसे में उम्मीदवार चयन को लेकर अंतिम निर्णय कब और कैसे होगा, इस पर सबकी नजर बनी हुई है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि नामांकन के अंतिम दिन महागठबंधन अपने पत्ते खोल सकता है। यदि ऐसा होता है तो चुनावी मुकाबला और रोचक हो सकता है।
18 जून को होगा मतदान
बिहार विधान परिषद की 9 सीटों के नियमित चुनाव और 1 सीट के उपचुनाव के लिए 18 जून को मतदान निर्धारित है। हालांकि चुनावी प्रक्रिया का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि यदि कुल 10 सीटों के लिए केवल 10 उम्मीदवार ही नामांकन दाखिल करते हैं, तो मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। ऐसी स्थिति में सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा सकते हैं। इसलिए आज का दिन न केवल उम्मीदवारों के लिए बल्कि पूरे राजनीतिक परिदृश्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या रहेगा आगे का राजनीतिक समीकरण?
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि चुनाव सीधा मुकाबला बनेगा या फिर कई सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति बनेगी। साथ ही महागठबंधन की रणनीति और एनडीए की उम्मीदवार चयन नीति का राजनीतिक असर भी आने वाले दिनों में दिखाई देगा। फिलहाल बिहार की राजनीति का केंद्र विधान परिषद चुनाव बन चुका है और सभी की निगाहें आज होने वाले नामांकन पर टिकी हुई हैं।