Bihar MLC Chunav: सुनील कुमार सिंह ने भरा नामांकन, महागठबंधन ने फिर जताया भरोसा


पटना। Bihar MLC Chunav को लेकर सोमवार को राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। Bihar MLC Chunav के लिए महागठबंधन की ओर से सुनील कुमार सिंह ने विधानसभा परिसर पहुंचकर अपना नामांकन दाखिल किया। लंबे समय से उनके नाम की चर्चा चल रही थी और आखिरकार गठबंधन ने उन पर दोबारा भरोसा जताया। नामांकन के दौरान उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें दूसरी बार अवसर दिया है और वे इस भरोसे पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे। विधान परिषद की 10 सीटों के लिए हो रहे चुनाव में उम्मीदवारों के नामांकन को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीतिक दलों के बीच मंथन जारी था। महागठबंधन की ओर से अंतिम नाम तय होने में देरी के कारण राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं।

सुनील कुमार सिंह के नाम पर लगी मुहर

सूत्रों के अनुसार रविवार शाम तक महागठबंधन की ओर से उम्मीदवार के नाम पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया था। हालांकि राजनीतिक हलकों में पहले से ही यह चर्चा थी कि सुनील कुमार सिंह को दोबारा मौका मिल सकता है। सोमवार को उनके नामांकन दाखिल करने के साथ इन अटकलों पर विराम लग गया। इससे साफ हो गया कि महागठबंधन ने इस चुनाव में अनुभव और संगठनात्मक संतुलन को प्राथमिकता दी है। नामांकन के बाद मीडिया से बातचीत में सुनील कुमार सिंह ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने उन पर फिर भरोसा जताया है और वे इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाने का प्रयास करेंगे।

रोहिणी आचार्य के नाम की भी हुई थी चर्चा

पिछले कुछ दिनों में राजद नेता रोहिणी आचार्य के नाम को लेकर भी चर्चाएं तेज थीं। राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि उन्हें विधान परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया जा सकता है। हालांकि बाद में स्वयं रोहिणी आचार्य ने इन चर्चाओं पर विराम लगा दिया। इसके बाद सुनील कुमार सिंह का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महागठबंधन ने इस बार ऐसे उम्मीदवार को चुना है जिसकी संगठन में सक्रिय भूमिका रही है और जो पहले भी परिषद की राजनीति का अनुभव रखते हैं।

नामांकन में नहीं दिखे लालू परिवार के सदस्य

सुनील कुमार सिंह जब नामांकन दाखिल करने पहुंचे तो उनके साथ लालू परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। इसको लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा हुई। दरअसल, राजद प्रमुख लालू प्रसाद फिलहाल दिल्ली में हैं। वे हाल ही में नियमित स्वास्थ्य जांच के बाद सिंगापुर से भारत लौटे हैं। वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी दिल्ली में मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि इंडिया गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक के कारण वरिष्ठ नेताओं का दिल्ली में रहना जरूरी था। इसी वजह से उम्मीदवार की औपचारिक घोषणा भी समय पर नहीं हो सकी।

दिल्ली बैठक का भी पड़ा असर

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को इंडिया गठबंधन की बैठक प्रस्तावित है जिसमें कई प्रमुख विपक्षी नेता शामिल हो सकते हैं। तेजस्वी यादव के भी इस बैठक में शामिल होने की संभावना जताई गई थी। यही कारण रहा कि बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर महागठबंधन की तरफ से अंतिम घोषणा में देरी देखने को मिली। हालांकि उम्मीदवार के नामांकन के बाद अब स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो चुकी है। विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक व्यस्तताओं का असर राज्य स्तर के फैसलों पर भी दिखाई दिया।

18 जून को होना है मतदान

बिहार विधान परिषद की 9 सीटों के नियमित चुनाव और 1 सीट के उपचुनाव के लिए 18 जून को मतदान निर्धारित है। चुनावी प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण चरण अब उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी होना है। दिलचस्प बात यह है कि यदि 10 सीटों के लिए केवल 10 उम्मीदवार ही मैदान में रहते हैं तो मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। ऐसी स्थिति में सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा सकते हैं। जानकारी के अनुसार विधान परिषद चुनाव में एक सीट जीतने के लिए लगभग 25 मतों की आवश्यकता होती है। वर्तमान संख्या बल को देखते हुए राजनीतिक जानकार महागठबंधन के खाते में कम से कम एक सीट जाना लगभग तय मान रहे हैं।

आगे क्या रहेगा राजनीतिक समीकरण?

नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी की नजर उम्मीदवारों की अंतिम स्थिति और संभावित मुकाबले पर है। यदि सीटों की संख्या के बराबर ही उम्मीदवार रहते हैं तो चुनाव निर्विरोध हो सकता है। वहीं यदि अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में बने रहते हैं तो 18 जून को मतदान कराया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति का केंद्र विधान परिषद चुनाव ही रहने वाला है। 

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