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संजय राउत की PM मोदी से बड़ी मांग, अमित शाह को पद से हटाने की कही बात

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संजय राउत की PM मोदी से बड़ी मांग, अमित शाह को पद से हटाने की कही बात

महाराष्ट्र की राजनीति से लेकर दिल्ली तक बांग्लादेशी घुसपैठ और चीन के मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोला है। संजय राउत ने अमित शाह को गृह मंत्री पद से हटाने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल कार्रवाई करने को कहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर देश में करोड़ों की संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए मौजूद हैं, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

राउत के इस बयान से राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठ के साथ-साथ चीन की गतिविधियों, INDIA गठबंधन की रैली और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर भी केंद्र सरकार को घेरा।

अमित शाह को गृह मंत्री पद से हटाने की मांग क्यों कर रहे संजय राउत?

मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा।

उन्होंने बांग्लादेश की आबादी का हवाला देते हुए दावा किया कि अगर वहां से 3.5 करोड़ लोग भारत में घुस आए हैं, तो पिछले सात वर्षों से गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे अमित शाह क्या कर रहे थे?

राउत ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की निगरानी गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है। यदि इतनी बड़ी संख्या में घुसपैठिए भारत में रह रहे हैं, तो इसकी जवाबदेही भी सरकार को लेनी चाहिए।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अमित शाह को गृह मंत्री पद से तुरंत हटाने की मांग की।

हालांकि, भारत में 3.5 करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठियों के रहने का दावा संजय राउत का राजनीतिक आरोप है। उपलब्ध कराई गई जानकारी में इस आंकड़े की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

चीन की घुसपैठ पर भी केंद्र सरकार को घेरा

संजय राउत ने केवल बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि चीन को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए।

दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कांग्रेस पर चीन से फंडिंग मिलने का आरोप लगाया था। इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राउत ने कहा कि फंडिंग के आरोपों की जांच बाद में भी हो सकती है, लेकिन सरकार को पहले देश की सीमाओं से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए।

उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में चीन की गतिविधियों का मुद्दा उठाया। साथ ही मेघालय की दिशा में चीन की बढ़ती गतिविधियों और नेपाल में उसके प्रभाव का भी जिक्र किया।

राउत ने सवाल किया कि जब देश की सीमाओं और पड़ोसी क्षेत्रों में चीन की गतिविधियों को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं, तब सरकार इन मुद्दों पर क्या कदम उठा रही है?

उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह चीन से जुड़े गंभीर सवालों की जगह राजनीतिक फंडिंग के आरोपों को ज्यादा महत्व दे रही है।

INDIA गठबंधन की रैली को बताया लोकतंत्र बचाने की लड़ाई

संजय राउत ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित INDIA गठबंधन की रैली का भी समर्थन किया।

उन्होंने इस रैली को केवल राजनीतिक दलों का जमावड़ा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा और राजनीतिक बदलाव के लिए संघर्ष बताया।

राउत के मुताबिक, इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य कथित तौर पर लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बढ़ते दबाव और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को उठाना है।

उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र को बचाने और सरकार को जवाबदेह बनाने की जरूरत है। उनके अनुसार, रामलीला मैदान की रैली ने विपक्ष की एकजुटता का संदेश दिया।

जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से की रामलीला मैदान की तुलना

संजय राउत ने अपने बयान में वर्ष 1974 के जेपी आंदोलन का भी जिक्र किया।

उन्होंने याद दिलाया कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने उस समय लोकतंत्र और व्यवस्था में बदलाव के लिए रामलीला मैदान में लोगों को एकजुट होने का आह्वान किया था।

राउत ने कहा कि आज भी लोकतंत्र की रक्षा और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दे विपक्ष के आंदोलन के केंद्र में हैं।

उन्होंने हालिया रैली को उसी राजनीतिक संघर्ष की परंपरा से जोड़ते हुए इसे महत्वपूर्ण बताया।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर भी सियासत

INDIA गठबंधन के नेताओं ने दिल्ली की रैली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई।

विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनावी गड़बड़ी और मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोप लगाए।

इस विरोध प्रदर्शन में राहुल गांधी सहित INDIA गठबंधन के विभिन्न दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया।

विपक्ष का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए। वहीं, इन आरोपों और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

संजय राउत ने भी इस मुद्दे पर विपक्ष के रुख का समर्थन किया और सरकार तथा चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग की।

प्रधानमंत्री मोदी पर भी संजय राउत का तीखा तंज

अपने बयान के दौरान संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी तीखी राजनीतिक टिप्पणी की।

जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री मोदी सत्ता छोड़ सकते हैं, तो उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मोदी रहेंगे, लेकिन तिहाड़ जेल के आसपास रहेंगे।

यह टिप्पणी विपक्ष और केंद्र सरकार के बीच जारी राजनीतिक टकराव को दर्शाती है।

हालांकि, यह संजय राउत की राजनीतिक बयानबाजी है, न कि प्रधानमंत्री के भविष्य को लेकर कोई प्रमाणित जानकारी।

आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है सियासी बयानबाजी

बांग्लादेशी घुसपैठ, चीन की गतिविधियां, चुनाव आयोग और SIR जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार चर्चा में है।

एक तरफ विपक्ष सरकार से राष्ट्रीय सुरक्षा और चुनावी पारदर्शिता पर जवाब मांग रहा है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा और केंद्र सरकार की ओर से भी विपक्ष के आरोपों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

संजय राउत की अमित शाह को पद से हटाने की मांग ने इस बहस को और तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व विपक्ष के इन सवालों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

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